खाद बिक्री के नए सिस्टम से 28% घटी खपत, सरकार को ₹1,470 करोड़ की बचत! सब्सिडी ₹3 लाख करोड़ के पार?
केंद्र सरकार के फर्टिलाइजर सेल्स फ्रेमवर्क (FFS) पायलट प्रोजेक्ट से खरीफ 2026 में 222 जिलों में उर्वरक बिक्री में 28% की कमी आई, जिससे ₹1,470 करोड़ की बचत हुई।
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app आधारित खाद बिक्री से घटी मांग
HighLights
FFS पायलट से 222 जिलों में उर्वरक बिक्री 28% घटी।
सरकार को ₹1,470 करोड़ की बचत, किसानों की संख्या बढ़ी।
उर्वरक सब्सिडी ₹3 लाख करोड़ पार कर सकती है वैश्विक कीमतों से।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| केंद्र सरकार की ओर से खरीफ 2026 सीजन में 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 222 जिलों में लागू किए गए फर्टिलाइजर सेल्स फ्रेमवर्क (FFS) के शुरुआती नतीजे सामने आए हैं। इस पायलट योजना के तहत किसानों को उनकी जमीन और चुनी गई फसल के आधार पर ही सब्सिडी वाले उर्वरक खरीदने की अनुमति दी गई। इसके चलते इन जिलों में उर्वरकों की बिक्री में 28 फीसदी की कमी दर्ज की गई, जिससे सरकार को करीब ₹1,470 करोड़ की बचत हुई।
किसानों की संख्या बढ़ी, बिक्री के आंकड़े में गिरावट
अब तक मिली जानकारी में दिलचस्प बात यह है कि उर्वरकों की बिक्री कम होने के बावजूद इन जिलों में खाद खरीदने वाले किसानों की संख्या पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है। खरीफ 2026 में 46.97 लाख किसानों ने उर्वरक खरीदे, जबकि खरीफ 2025 में किसानों की संख्या लगभग 44.55 लाख थी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन जिलों में उर्वरकों की कुल बिक्री 18.30 लाख टन से घटकर 13.35 लाख टन रह गई। अधिकारियों का मानना है कि इससे जरूरत से अधिक खादों का इस्तेमाल और गैर-कृषि क्षेत्रों में होने वाले डायवर्जन पर रोक लगाने में मदद मिली है।
खाद बिक्री में 75 फीसदी की गिरावट, लाइनें भी कम
कृषि मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव प्रमोद कुमार मेहरदा ने हाल ही में आयोजित रबी सम्मेलन में बताया कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में उर्वरक बिक्री में 75 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ राज्यों में कम बारिश भी बिक्री घटने का एक कारण रही है।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन app आधारित व्यवस्था लागू होने से किसानों को उर्वरक खरीदने के लिए टोकन जारी किए जाते हैं। इससे दुकानों के बाहर लंबी कतारों की समस्या काफी हद तक खत्म हुई है।
राज्य खुद ले सकते हैं निर्णय
पंजाब इस पायलट परियोजना में शामिल नहीं हुआ, जबकि मध्य प्रदेश ने किसानों के विरोध के बाद इस व्यवस्था को बंद कर दिया। इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस योजना को लागू करना राज्यों के लिए अनिवार्य नहीं है और इसे अपनाने या न अपनाने का फैसला राज्य सरकारें खुद कर सकती हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मिट्टी की सेहत बचाने और केमिकल खादों के जरूरत से ज्यादा उपयोग को रोकने के लिए ऐसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं। इससे सब्सिडी वाले उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग में जाने पर भी रोक लगाई जा सकती है।
खाद सब्सिडी ₹3 लाख करोड़ के पार जाएगी?
उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने राज्यों से अपील की है कि वे सब्सिडी वाले उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग पर रोक लगाएं और मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा दें। उन्होंने ऑर्गेनिक और नैचुरल फार्मिंग को भी प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई।
मिश्रा ने कहा कि 1 अक्टूबर 2026 तक देश में उर्वरकों का शुरुआती स्टॉक पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक रहने की संभावना है। लेकिन ग्लोबल मार्केट में कीमतें बढ़ने के कारण चालू वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी का बोझ ₹3 लाख करोड़ से अधिक पहुंच सकता है।
रबी सम्मेलन में पेश आंकड़ों के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले और वर्तमान समय की तुलना करें तो उर्वरकों पर सरकार का सब्सिडी बोझ काफी बढ़ गया है। 45 किलोग्राम की एक यूरिया बोरी पर सब्सिडी ₹1,350 से बढ़कर ₹2,775 हो गई है, यानी 106 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं 50 किलोग्राम डीएपी (DAP) की एक बोरी पर सब्सिडी ₹2,102 से बढ़कर ₹3,523 पहुंच गई है, जो 61 प्रतिशत अधिक है।
