यूरिया की कीमत में 106% की बढ़ोतरी DAP की बोरी भी ₹3500 के पार! ₹3 लाख करोड़ तक पहुंचेगी उर्वरक सब्सिडी
चालू वित्त वर्ष में भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल ₹3 लाख करोड़ के पार जा सकता है, क्योंकि वैश्विक बाजार ...और पढ़ें

उर्वरक सब्सिजी ₹3 लाख करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान
HighLights
उर्वरक सब्सिडी बिल ₹3 लाख करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान।
यूरिया पर सब्सिडी 106%, डीएपी पर 61% बढ़ी।
वैश्विक कच्चे माल की कमी से कीमतें बढ़ीं, आपूर्ति प्रभावित।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत ईंधन के अलावा उर्वरकों का भी बड़ा इंपोर्टर देश है। चीन, रूस सहित कई देशों से किसानों के लिए खाद का आयात किया जाता है। ग्लोबल मार्केट में उर्वरकों और कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण केंद्र सरकार का खाद सब्सिडी बिल चालू वित्त वर्ष में ₹3 लाख करोड़ के पार जा सकता है। इस बढ़ते बोझ को देखते हुए केंद्र ने राज्यों से किसानों के बीच उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने और जरूरत से ज्यादा खाद के छिड़काव को रोकने की अपील की है।
रॉकेट बने यूरिया-DAP के सब्सिडी दाम
कृषि मंत्रियों के वार्षिक रबी सम्मेलन के दूसरे दिन उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने बताया कि युद्ध से पहले और वर्तमान समय की तुलना में सरकार पर प्रति बोरी सब्सिडी का बोझ काफी बढ़ गया है। 45 किलोग्राम की एक बोरी यूरिया पर सब्सिडी ₹1,350 रुपये से ₹2,775 हो गई है, जो 106% की बढ़ोतरी है। वहीं 50 किलोग्राम की डीएपी (DAP) की बोरी पर सब्सिडी ₹2,102 से बढ़कर ₹3,523 पहुंच गई है, जो 61% अधिक है।
उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा अनुमान के मुताबिक इस वित्त वर्ष में खाद सब्सिडी का खर्च ₹3 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, लेकिन यदि वैश्विक कीमतें और बढ़ती हैं तो यह इससे भी अधिक हो सकता है।
सल्फर और फॉस्फोरिक एसिड की कमी बनी चिंता
उर्वरक सचिव ने कहा कि ग्लोबल लेवल पर कच्चे माल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर सल्फर और फॉस्फोरिक एसिड की कमी के कारण फॉस्फेटिक उर्वरकों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। डीएपी और एनपीकेएस जैसे उर्वरकों के निर्माण में सल्फर महत्वपूर्ण कच्चा माल है। फरवरी 2026 में वैश्विक बाजार में सल्फर की कीमत 532 डॉलर प्रति टन थी, जो बढ़कर 1,050 डॉलर प्रति टन हो गई है।
ईरान के खिलाफ युद्ध के बाद कतर में उत्पादन प्रभावित होने से सल्फर की उपलब्धता घटी। इसके कारण दुनिया की कई कंपनियों ने फॉस्फोरिक एसिड, DAP और NPK उर्वरकों का उत्पादन कम कर दिया। इससे फॉस्फोरिक एसिड की कीमत 1,290 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 1,700 डॉलर प्रति टन पहुंच गई।
DAP का आयात भी महंगा
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण उर्वरकों की सप्लाई में काफी समस्या देखी गई है। इसके अलावा कीमतों में भी बहुत अधिक बढ़ोतरी देखने को मिली है। युद्ध से पहले आयातित DAP की कीमत 681 डॉलर प्रति टन थी, जो अब बढ़कर 940 डॉलर प्रति टन हो गई है। उर्वरक सचिव ने बताया कि युद्ध के बाद भारत में कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का घरेलू उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत घट गया है।
यूरिया उत्पादन पर भी असर
यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस प्रमुख कच्चा माल है और भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक गैस आयात करता है। युद्ध के कारण वैश्विक गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है और कई बड़े उत्पादक देशों में यूरिया उत्पादन कम हुआ है।
भारत को दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत मिलने वाली गैस की आपूर्ति भी युद्ध पूर्व स्तर की तुलना में 60 से 65 प्रतिशत तक घट गई है। गैस की कीमत लगभग 10 डॉलर प्रति MMBtu से बढ़कर 28-29 डॉलर प्रति MMBtu हो गई है।
रबी सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उर्वरक सचिव ने कहा कि सरकार ने खरीफ सीजन के दौरान खाद की मांग को सफलतापूर्वक कंट्रोल किया है और रबी सीजन में भी जरूरत पूरी होने की उम्मीद है। 27 सितंबर तक देश में यूरिया, डीएपी, एमओपी (MOP) और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का कुल स्टॉक 145.46 लाख टन था। इसके अलावा 20.88 लाख टन SSP भी उपलब्ध है।
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उन्होंने बताया कि देश के 32 यूरिया प्लांट्स ने खरीफ सीजन के दौरान 149 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया है। बंदरगाहों और ट्रांजिट में मौजूद स्टॉक को मिलाकर कुल उपलब्धता 206.35 लाख टन तक पहुंच जाएगी।
रबी सीजन में कुल खाद मांग 380.96 लाख टन रहने का अनुमान है। प्रमुख खादों का स्टॉक
| यूरिया | 199.27 लाख टन |
| DAP | 55.07 लाख टन |
| MOP | 16.40 लाख टन |
| कॉम्प्लेक्स उर्वरक | 79.12 लाख टन |
| SSP | 31.10 लाख टन |
