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भारत ने ढूंढा अरहर का नया सप्लायर देश, 30000 टन दाल पहुंचेगी भारत! कैसी रहेगी कीमतें?

Published: Tue, 29 Sep 2026 01:34 PM (IST)

भारत अपनी दालों की जरूरतों को पूरा करने के लिए नए देश से अरहर दाल का आयात शुरू करेगा, जिसकी ...और पढ़ें

ब्राजील से होगा अरहर का आयात

ब्राजील से होगा अरहर का आयात

HighLights

  1. ब्राजील से भारत को अरहर दाल का नया स्रोत मिला।

  2. शुरुआत में 30,000 टन अरहर दाल का आयात होगा।

  3. सूखे की आशंका से अरहर दाल की कीमतें बढ़ीं।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत अपनी जरूरत के लिए दुनिया के कई देशों से दालों का आयात करता है। अब अगले कुछ महीनों में ब्राजील से अरहर (तूर) दाल की आवक शुरू हो सकती है। दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील जल्द ही भारत के लिए इस दाल का निर्यात शुरू करने की तैयारी में है।

इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के चेयरमैन बिमल कोठारी ने कहा कि भारत को अभी भी बड़ी मात्रा में अरहर आयात करनी पड़ रही है और इस साल ब्राजील एक नए स्रोत (Origin) के रूप में जुड़ने जा रहा है। उन्होंने कहा कि फाइटोसैनिटरी मंजूरी मिलने के बाद ब्राजील से अरहर का आयात शुरू हो जाएगा, जिसकी प्रक्रिया जल्द पूरी होने की उम्मीद है।

30000 टन अरहर का इंपोर्ट

IPGA की पहल पर ब्राजील के किसानों और निर्यातकों ने भारतीय बाजार को ध्यान में रखते हुए अरहर की खेती शुरू की है। कोठारी ने बताया कि अक्टूबर-नवंबर से इसकी खेप भारत आना शुरू हो सकती है। इस साल मात्रा ज्यादा नहीं होगी और लगभग 20,000 से 30,000 टन अरहर आने का अनुमान है। हालांकि अगले साल ब्राजील से अच्छी मात्रा में तूर दाल मिलने की उम्मीद है।

ब्राजील से दालों की बढ़ रही आपूर्ति

हाल के कुछ सालों में ब्राजील ने भारत के लिए उड़द की खेती और निर्यात शुरू किया है। वर्तमान में म्यांमार के बाद ब्राजील भारत को उड़द निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। अब अरहर भी उन दालों की सूची में शामिल होने जा रही है जिनका ब्राजील भारत को निर्यात करता है। ब्राउन आई बीन्स का निर्यात पहले से किया जा रहा है।

इन देशों से भारत पहुंचती है अरहर

भारत वर्तमान में अपनी जरूरत के लिए मोजाम्बिक, म्यांमार, तंजानिया, सूडान और मलावी समेत कई देशों से अरहर का आयात करता है। जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान भारत का अरहर आयात 44 प्रतिशत बढ़कर 5.79 लाख टन पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 4.01 लाख टन था।

इस अवधि में भारत को सबसे ज्यादा अरहर मोजाम्बिक से मिली, जहां से 2.18 लाख टन आयात हुआ। इसके बाद म्यांमार से 1.35 लाख टन, तंजानिया से 1.04 लाख टन और सूडान से 68,499 टन से अधिक अरहर आयात की गई। वहीं पूरे वर्ष 2025 में भारत का अरहर आयात 5.42 प्रतिशत बढ़कर 13.25 लाख टन रहा था।

देश में बढ़ा अरहर बुवाई क्षेत्र

खरीफ 2026 सीजन में देश में लगभग 47.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अरहर की बुवाई हुई है, जो पिछले साल के 45.95 लाख हेक्टेयर से अधिक है। हालांकि प्रमुख उत्पादक राज्यों में स्थिति मिलीजुली है। कर्नाटक में अरहर का रकबा 6 प्रतिशत घटकर 14.16 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 15.33 लाख हेक्टेयर था। महाराष्ट्र में भी रकबा 1.5 प्रतिशत घटकर 12.02 लाख हेक्टेयर रह गया है।

इसके उलट उत्तर प्रदेश में अरहर का क्षेत्र 33 प्रतिशत बढ़कर 4.95 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जबकि गुजरात में 11 प्रतिशत बढ़कर 3.30 लाख हेक्टेयर हो गया है। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी अरहर का रकबा बढ़ा है।

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सूखे की चिंता से बढ़े दाम

बिमल कोठारी के अनुसार कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्यों में कम बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि फसल की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट आकलन अक्टूबर के मध्य तक ही हो पाएगा, क्योंकि कुछ राज्यों में हाल में बारिश दर्ज की गई है।

इसी बीच सोमवार को विभिन्न मंडियों में अरहर के दाम ₹50 से ₹100 प्रति क्विंटल तक बढ़ गए। व्यापारियों को आशंका है कि सूखे की स्थिति से 2026 की फसल प्रभावित हो सकती है, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं।