मक्के से एथनॉल बनाने से फीड की महंगाई और सप्लाई पर असर? 1 महीने में बना 895 करोड़ लीटर एथनॉल बनने पर AIDA ने किया साफ
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने मक्के से एथनॉल उत्पादन को लेकर चिंताओं पर स्पष्टीकरण दिया है, कहा है कि ...और पढ़ें

मक्के से मक्के से एथनॉल बनाने पर AIDA का जवाब
HighLights
AIDA ने मक्के से एथनॉल उत्पादन पर उठ रही चिंताओं को स्पष्ट किया।
एथनॉल उद्योग अब मक्का सहित बहु-फीडस्टॉक मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
अगस्त तक कुल एथनॉल आपूर्ति का 70% अनाज आधारित स्रोतों से था।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत में एथनॉल उत्पादन में मक्का की बढ़ती खपत को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि एथेनॉल उद्योग किसी विशेष सेक्टर के साथ मक्का के लिए कॉम्पटीशन नहीं कर रहा है। उद्योग का उद्देश्य कृषि के रिसोर्सेज का बेहतर उपयोग करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
AIDA की डिप्टी डायरेक्टर जनरल भारती बालाजी ने एक ईमेल इंटरव्यू में कहा कि एथनॉल उत्पादन अब केवल एक फसल पर निर्भर नहीं है। इसके लिए मक्का के अलावा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अतिरिक्त चावल, टूटे खाद्यान्न और चीनी आधारित कच्चे माल का भी उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में मक्के का प्रोडक्शन बढ़ाने, सप्लाई चेन मजबूत होने, ऑप्शनल फीडस्टॉक की उपलब्धता बढ़ने और कृषि उत्पादन व इंडस्ट्रियल मांग के बीच बेहतर तालमेल से सभी क्षेत्रों की जरूरतें पूरी की जा सकेंगी।
मल्टीफीड स्टॉक की ओर बढ़ रही एथनॉल इंडस्ट्री
भारती बालाजी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के बायोफ्यूल इकोसिस्टम के विस्तार के साथ मक्का एथनॉल उत्पादन का एक महत्वपूर्ण कच्चा माल बन गया है। हालांकि मक्का का उपयोग खाद्य, पशु चारा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है, इसलिए इसकी कीमतें उत्पादन, खपत, स्टॉक, लॉजिस्टिक्स और बाजार मांग जैसे कई तरीके से प्रभावित होती हैं।
उन्होंने कहा कि मक्का, अतिरिक्त FCI चावल और क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों का बढ़ता उपयोग यह दिखाता है कि भारत का एथनॉल उद्योग अब वास्तव में बहु-फीडस्टॉक (Multi-Feedstock) मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
अगस्त तक कितना एथनॉल किससे बना?
AIDA के मुताबिक अगस्त के अंत तक मक्का से लगभग 345 करोड़ लीटर एथनॉल का उत्पादन हुआ इसके अलावा अतिरिक्त एफसीआई चावल से करीब 214 करोड़ लीटर एथनॉल बनाया गया। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक टूटे खाद्यान्नों से भी लगभग 64 करोड़ लीटर एथनॉल का उत्पादन हुआ
भारती बालाजी ने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि ऑप्शनल फीडस्टॉक अब एथनॉल उत्पादन में छोटी भूमिका नहीं निभा रहे, बल्कि सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
70% एथनॉल अब अनाज आधारित
AIDA के अनुसार अगस्त के अंत तक देश में कुल 895 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति हुई, जिसमें से 624 करोड़ लीटर एथनॉल अनाज आधारित फीडस्टॉक से आया। यानी कुल आपूर्ति का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अब अनाज आधारित एथनॉल का है।
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यह दर्शाता है कि एथनॉल उद्योग केवल गन्ने के रस, बी-हेवी शीरा और सी-हेवी शीरा पर निर्भर नहीं रहा, बल्कि अनाज आधारित एथनॉल अब इस कार्यक्रम का प्रमुख स्तंभ बन चुका है।
क्या है आगे का प्लान?
भारती बालाजी ने जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि एथनॉल उद्योग का अगला चरण इसके उपयोग के नए अवसरों पर केंद्रित होगा। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के बढ़ने से हाई एथनॉल ब्लेडिंग की मांग बढ़ सकती है। इसके अलावा कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) और अन्य उभरते बायोएनर्जी क्षेत्रों में भी एथनॉल की भूमिका बढ़ने की संभावना है।
