बीजिंग, एपी। चीन का सबसे बड़ा रियल एस्टेट डेवलपर एवरग्रैंड जिस तरह कंगाली के कगार पर पहुंचा है, उससे चीन के निवेशक सहमे हैं और ग्लोबल शेयर बाजारों में इसका असर दिखने लगा है। कुछ लोग इसे अमेरिका के सब-प्राइम संकट जैसा देख रहे हैं जब वर्ष 2008 में अमेरिकी कंपनी लीमैन ब्रदर्स दिवालिया हो गई थी। दरअसल, रियल एस्टेट कंपनियां चीन की इकोनामी की रीढ़ रही हैं। यदि वे अपने कर्ज चुकाने में विफल रहती हैं तो इसका असर दुनियाभर में दिखने की संभावना है।

बता दें कि एवरग्रैंड के शेयरों की कीमत इस साल अब तक लगभग 80 फीसद तक गिर चुकी है। हाल के हफ्तों में चीन के स्टाक एक्सचेंज द्वारा बार-बार कंपनी के बांड कारोबार को रोका गया है। रेटिंग एजेंसियों फिच और मूडीज ने कंपनी को डाउनग्रेड किया है। फिच ने कहा कि हमें किसी तरह का डिफाल्ट दिख रहा है।इस बीच, डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते मामलों और प्रापर्टी व इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र पर सरकार के कड़े नियंत्रण के चलते अमेरिका के सबसे बड़े इन्वेस्टमेंट बैंक ने अगले तीन वर्षो के लिए चीन के आर्थिक विकास के पूर्वानुमान में कटौती की।

बैंक आफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने कहा कि नए पूर्वानुमान को चालू वर्ष में 8.3 फीसद से 8.0 फीसद, वर्ष 2022 के लिए 6.2 फीसद से 5.3 फीसद और वर्ष 2023 के लिए 6.0 फीसद से 5.8 फीसद किया गया है। इंवेस्टमेंट बैंक ने एवरग्रैंड मामले का हवाला देते हुए कहा है कि अगर इस संकट का हल नहीं निकाला गया तो पूरे प्रापर्टी सेक्टर पर फर्क पड़ेगा।

एवरग्रैंड समूह की स्थापना वर्ष 1996 में हुई थी। अपार्टमेंट, ऑफिस और शापिंग माल बनाने वाली यह चीन की सबसे बड़ी कंपनी है। दो लाख से अधिक स्थायी कर्मचारियों के साथ ही 38 लाख से अधिक अस्थायी कर्मचारी किसी न किसी रूप में इससे जुड़े हैं। 280 शहरों में इसके 1,300 प्रोजेक्ट हैं जिनकी कीमत 350 अरब डालर है। हुरुन की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के संस्थापक शू झियान वर्ष 2017 में चीन के सबसे अमीर उद्यमी थे। उस समय उनकी कुल संपत्ति 43 अरब डालर थी। हालांकि इंटरनेट क्रांति के बाद वह अमीरों की सूची में अपना स्थान बरकरार नहीं रख पाए, लेकिन पिछले साल भी वह चीन के सबसे अमीर रियल एस्टेट डेवलपर थे।

हुरुन की 2020 की परोपकारी लोगों की सूची में भी उन्होंने शीर्ष स्थान हासिल किया था। 30 जून तक एवरग्रैंड पर 310 अरब डालर का कर्ज था। वर्ष 2021 की शुरुआत में कंपनी ने अनुमान लगाया था कि उसकी कुल वार्षिक आय 310 अरब डालर के स्तर को पार कर जाएगी, लेकिन कमजोर बिक्री के चलते ऐसा नहीं हो सका।

Edited By: Ankit Kumar