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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 27, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आर्थिक रफ्तार धीमी रहने का डर

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Published: Wed, 27 Nov 2013 09:01 PM (IST)Updated: Mon, 30 Mar 2015 06:40 PM (IST)

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। बढि़या मानसून ने खेती और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग ने निर्यात की रफ्तार को बढ़ाया है। ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। बढि़या मानसून ने खेती और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग ने निर्यात की रफ्तार को बढ़ाया है। मगर इन दोनों क्षेत्रों का बेहतर प्रदर्शन दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास की दर को पांच फीसद तक ले जाने में कामयाब नहीं हो पाया है। चालू वित्त वर्ष 2013-14 की जुलाई-सितंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बढ़ने की दर साढ़े चार से पांच फीसद के बीच रह जाने की आशंका है।

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सरकार इस शुक्रवार को दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी करेगी। ज्यादातर रिसर्च एजेंसियों का मानना है कि इस अवधि की जीडीपी वृद्धि दर 4.5 फीसद के आसपास सीमित रह सकती है। सेवा क्षेत्र और औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार बेहद धीमी रह जाने के चलते आर्थिक विकास की दर में सुस्ती का रुख चालू वित्त वर्ष में शुरू से ही बना रहा है। हालांकि इस दौरान कृषि क्षेत्र की विकास दर साढ़े तीन फीसद से ऊपर रहने की संभावना है। दूसरी तिमाही की शुरुआत से ही निर्यात के क्षेत्र में भी प्रदर्शन सुधर रहा है। पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर 4.4 फीसदी रही थी।

इस अवधि के दौरान सबसे खराब स्थिति औद्योगिक उत्पादन की रही है। औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार तीन महीने की इस अवधि में 2.6 फीसद से ऊपर नहीं उठ पाई। तीन महीने की औद्योगिक क्षेत्र की औसत विकास दर 1.73 फीसद के आसपास रहने की उम्मीद है। सेवा क्षेत्र भी अपेक्षित रफ्तार हासिल नहीं कर पाया है। इसके चलते दूसरी तिमाही की जीडीपी दर पांच फीसद से नीचे रहने की आशंका है।

इस दौरान सरकार की तरफ से अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने के कई उपाय किए गए हैं, लेकिन इनका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ब्याज की ऊंची दरों और महंगाई के चलते देश में निवेश का माहौल अभी तक नहीं बन पाया है। इसके बावजूद सरकार मान रही है कि तीसरी और चौथी तिमाही में आर्थिक विकास दर के आंकड़ों में बदलाव दिख सकता है। अच्छे मानसून से हुई बढि़या पैदावार ने ग्रामीण बाजार में मांग बढ़ाई है। इसका नतीजा मैन्यूफैक्चरिंग पर भी दिखेगा।

सरकार की उम्मीदों के विपरीत जानकार मानते हैं कि पूरे साल की आर्थिक विकास दर भी पांच फीसद को नहीं छू पाएगी। वित्तीय एजेंसी क्रिसिल ने 4.8 और इक्रा ने 4.6 फीसद विकास दर का अनुमान लगाया है। अन्य एजेंसियों को भी देश की विकास दर पांच फीसद से ऊपर जाने की उम्मीद नहीं है।