जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अभी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए उद्यमियों के सामने सबसे बड़ी समस्या जगह की होती है। लेकिन जल्द ही घरेलू स्तर पर कारोबार करने वाले उद्यमियों को मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए जगह की कमी नहीं होगी। क्योंकि सरकार जल्द ही विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) की जगह लेने वाला दि डेवलपमेंट (इंटरप्राइज एंड सर्विसेज) हब (देश) बिल ला रही है। इस बिल के पारित होते ही सेज से घरेलू बाजार में भी कारोबार किया जा सकेगा। अभी सेज में बनाए गए सामान को घरेलू बाजार में बेचने के लिए कस्टम ड्यूटी देना पड़ता है।

वर्ष 2005 में लाया गया था सेज एक्ट

बता दें कि वर्ष 2005 में सेज एक्ट लाया गया था ताकि निर्यात को प्रोत्साहित किया जा सके। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के मुताबिक अब तक 424 सेज की मंजूरी दी गई है और इनमें से 357 सेज को अधिसूचित किया जा चुका है। अधिसूचित सेज में से सिर्फ 270 ही संचालन में है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 तक सेज के 23,779 हेक्टेयर जमीन खाली पड़े थे। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक बुधवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में देश बिल को पेश किया जा सकता है।

देश बिल से सेज में बड़ा बदलाव

इस साल फरवरी में पेश बजट में देश बिल लाने की घोषणा की गई थी। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के मुताबिक देश बिल से सेज में बड़ा बदलाव आएगा। इस बिल के पारित होने के बाद सेज में काम कर रही यूनिट से निर्यात भी किया जा सकेगा और घरेलू बाजार में भी बिना किसी झंझट के रुपए में कारोबार किया जा सकेगा। अभी घरेलू बाजार में सेज यूनिट के माल को विदेशी करेंसी में बेचना पड़ता है। देश बिल के पारित होने पर सेज में सभी प्रकार की यूनिट लगाई जा सकेंगी। मैन्यूफैक्चरिंग वाले सेज में सर्विस सेक्टर वाले भी यूनिट लगा सकेंगे। एक ही जगह पर निर्यात करने वाली यूनिट और घरेलू बाजार में माल बेचने वाली यूनिट लगाई जा सकेंगी।

सेज एक्ट के तहत क्या है नियम

अभी सेज में उन्हीं वस्तुओं का निर्माण किया जाता है या उसी सर्विस सेक्टर की स्थापना की होती है जिनके लिए सरकार से सेज की मंजूरी ली गई है। किसी भी प्रकार के बदलाव के लिए सरकार से फिर से मंजूरी लेनी पड़ती है। विशेषज्ञों के मुताबिक अब इस प्रकार की कोई परेशानी नहीं रहेगी। इसका एक और फायदा यह होगा कि सेज में खाली पड़ी जमीन का भी औद्योगिक यूनिट लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। नियम में बंधे होने की वजह से खाली जमीन का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था।विशेषज्ञों के मुताबिक सेज अब सिर्फ निर्यात प्रोत्साहन का केंद्र नहीं रह जाएगा बल्कि बिजनेस क्लस्टर के रूप में उभर सकता है। जहां सप्लाई चेन, असेंब¨लग सर्विसेज, कंटेनर फ्रेट स्टेशन, कोल्ड स्टोरेज जैसी तमाम सुविधाएं विकसित हो सकती है।

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Edited By: Devshanker Chovdhary

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