'मम्मी ने गरमा-गरम जलेबियां बनाई हैं'... याद है धारा का वो मशहूर विज्ञापन? जानिए किसके आइडिया से बना था यह खास तेल
धारा रिफाइंड ऑयल की शुरुआत 1988 में NDDB द्वारा 'ऑपरेशन गोल्डन फ्लो' के तहत हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत को ...और पढ़ें
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धारा ऑयल का इतिहास
HighLights
धारा तेल 1988 में NDDB द्वारा लॉन्च किया गया
'ऑपरेशन गोल्डन फ्लो' ने खाद्य तेल आत्मनिर्भरता दिलाई
डॉ. कुरियन ने मिलावट रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत में आज बहुत से खाद्य तेल ब्रांड हैं। इनमें से कई बहुत पुराने हैं, जिनकी शुरुआत पिछली सदी में हुई थी। वहीं कई ब्रांड इस सदी में शुरू किए गए। यदि आप 90s के बच्चे या उससे पहले जन्मे हैं तो आपको धारा रिफाइंड ऑयल (Dhara Refined Oil) जरूर याद होगा। साथ ही याद होगा, वो विज्ञापन जो दूरदर्शन पर आया करता था, जिसमें एक बच्चा घर छोड़कर जाता है और धारा ऑयल में बनी जलेबी खाने के लिए घर लौट आता है। मगर धारा ऑयल की पूरी कहानी क्या थी? किसने और क्यों इस ब्रांड को शुरू किया गया था? आइए जानते हैं।
किसने और कब शुरू किया था?
धारा (Dhara) खाद्य तेल को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) ने 23 अगस्त 1988 को 'ऑपरेशन गोल्डन फ्लो' (Operation Golden Flow) कार्यक्रम के तहत लॉन्च किया था। शुरुआती वर्षों में इसके वितरण और मार्केटिंग की जिम्मेदारी गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF - अमूल की मूल कंपनी) के पास थी।
बाद में वर्ष 2003 में एनडीडीबी ने इसे अपनी सहायक कंपनी मदर डेयरी (Mother Dairy) के स्वामित्व में ले लिया।
'ऑपरेशन गोल्डन फ्लो' के तहत हुआ लॉन्च
धारा यह भारत का पहला ऐसा ब्रांड था, जो टैम्पर-प्रूफ (छेड़छाड़-रोधी) पैक और टेट्रा पैक में खाने का तेल लेकर आया था। इसे 'ऑपरेशन गोल्डन फ्लो' कार्यक्रम के तहत बाजार में उतारा गया था। भारत में 'ऑपरेशन गोल्डन फ्लो' (Operation Golden Flow) देश को खाद्य तेलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1980 के दशक में शुरू किया गया एक महत्वपूर्ण अभियान था।
ऑपरेशन फ्लेड से था प्रेरित
ऑपरेशन गोल्डन फ्लो के जरिए भारत को खाद्य तेल के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना, ठीक उसी तरह जैसे 'ऑपरेशन फ्लड' (श्वेत क्रांति) ने दूध उत्पादन में सफलता हासिल की थी। उस समय बाजार में बिना ब्रांड वाला खुला और मिलावटी तेल बिकता था। खुले तेल की बिक्री पर अंकुश लगाकर उपभोक्ताओं को सुरक्षित विकल्प देना था।
तिलहन किसानों को सीधे बाजार से जोड़ा
धारा के जरिए मिलावट से रहित, हाई क्वालिटी वाला और भरोसेमंद खाद्य तेल सही व उचित मूल्य पर आम लोगों तक पहुंचाना था। भारत में पहली बार मिलावट रोकने के लिए सीलबंद (टैंपर-प्रूफ) और लीटर आधारित पैक पेश करना था। छोटे स्तर के तिलहन (oilseed) किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना ताकि उनकी आय में वृद्धि हो और एक स्थिर आपूर्ति बनी रहे।
इस शख्स का था दिमाग
1977 में जब भारत में जनता पार्टी की सरकार आई, तो तत्कालीन वित्त मंत्री हीरूभाई एम. पटेल ने डॉ. वर्गीज कुरियन से अपील की कि जैसे उन्होंने देश को दूध के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया है, वैसे ही भारत को खाद्य तेल (Edible Oil) के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनाएं। उस समय भारत में खुले तेल की कालाबाजारी और मिलावट बहुत बड़ी समस्या थी।
डॉ. कुरियन की अगुवाई में 'नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड' (NDDB) ने देश को खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'ऑपरेशन गोल्डन फ्लो' कार्यक्रम शुरू किया। इसी ऑपरेशन के तहत NDDB ने 23 अगस्त 1988 को 'धारा' तेल लॉन्च किया। धारा देश का पहला ऐसा ब्रांड बना जो मिलावट रोकने के लिए टैम्पर-प्रूफ टेट्रा पैक और पॉली पैक में सीलबंद तेल लेकर आया।
आज कौन है ओनर?
शुरुआत में धारा तेल का डिस्ट्रीब्यूशन अमूल (GCMMF) संभालती थी। मगर वर्तमान में धारा कुकिंग ऑयल पूरी तरह से NDDB की सहायक कंपनी मदर डेयरी (Mother Dairy) के स्वामित्व में आता है।
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