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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 16, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शुमार है दिल्ली, जानिए अन्य कौन से शहर हैं शामिल

By Surbhi JainEdited By:
Published: Fri, 16 Mar 2018 10:30 AM (IST)

रिपोर्ट के अनुसार भारत में तेजी से आर्थिक विकास हो रहा है

दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शुमार है दिल्ली, जानिए अन्य कौन से शहर हैं शामिल
दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में शुमार है दिल्ली, जानिए अन्य कौन से शहर हैं शामिल

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। दुनिया के सबसे सस्ते शहरों में नई दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई भी शामिल हैं। इकोनॉमिस्ट इंटेलीसेंज यूनिट (ईआइयू) सर्वे ने सिंगापुर को सबसे खर्चीला शहर माना है।

वर्ल्डवाइड कॉस्ट ऑफ लिविंग 2018 सर्वे के अनुसार दक्षिण एशियाई शहरों में भारत के तीन और पाकिस्तान के एक शहर कराची को दस सबसे सस्ते शहरों की सूची में स्थान मिला है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में तेजी से आर्थिक विकास हो रहा है। प्रति व्यक्ति वेतन और खर्च में वृद्धि के मामले में भारत अभी भी बहुत नीचे है। आय में असमानता की मुख्य वजह कम वेतन है। इसके चलते घरेलू खर्च बहुत सीमित है।

शहरों में गावों से उत्पादकों द्वारा सस्ते मूल्य पर बड़ी मात्र में सप्लाई किये जाने के कारण तेजी नहीं आती है। सीरिया की राजधानी दमिश्क दुनिया का सबसे सस्ता शहर है। इस सूची में वेनेजुएला की राजधानी कराकास और कजाकिस्तान का व्यापारिक केंद्र अलमाटी क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। शीर्ष दस शहरों में लागोस चौथे, बेंगलुरु पांचवें, कराची छठे, अल्जीयर्स सातवें, चेन्नई आठवें, बुखारेस्ट नौवें और नई दिल्ली दसवें स्थान पर रहे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय उपमहाद्वीप सस्ता स्थान बना हुआ है, यद्यपि अस्थिरता यहां पर जीवन जीने की लागत कम रखने में मुख्य भूमिका निभाती है। ऐसे में दुनिया के कुछ सबसे सस्ते शहरों में जोखिम ज्यादा रहता है। सिंगापुर दुनिया के सबसे खर्चीले शहरों की सूची में सर्वोच्च स्थान पर बना हुआ है। पेरिस दूसरे, ज्यूरिख तीसरे और हांगकांग चौथे स्थान पर रहे।

रिपोर्ट के अनुसार ऑस्लो पांचवें, जेनेवा छठे, सियोल सातवें, कोपेनहेगेन आठवें, तेल अवीव नौवें और सिडनी दसवें स्थान पर रहे। यह सर्वे दो साल बाद होता है। इसमें 400 से ज्यादा लोगों से बात करके 160 उत्पादों और सेवाओं का विश्लेषण किया जाता है। खाद्य, पेय, क्लॉथिंग, घरेलू वस्तुएं, पर्सनल केयर आयटम, होम रेंट, ट्रांसपोर्ट, यूटीलिटी बिल्स, प्राइवेट स्कूल, घरेलू नौकर और मनोरंजन खर्च पर गौर किया जाता है।