जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। देश में ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में जिस तेजी से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ है, उसके लंबे समय तक जारी रहने की स्थिति में इकोनामी में सुधार की गति पर भी असर पड़ने की आशंका है। पेट्रोलियम उत्पादों के साथ ही कोयला और गैस की कीमतों में भारी इजाफे ने नीति निर्धारकों के माथे पर ¨चता की लकीरें खींच दी हैं। वित्त मंत्रालय के स्तर पर ऊर्जा कीमतों की निगरानी हो रही है।

इसका असर आरबीआइ की इस हफ्ते होने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा पर भी दिखाई देने की संभावना है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया गया है कि भारत में चीन जैसा बिजली संकट पैदा होने की आशंका नहीं है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें पिछले सात वर्षों के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 81.51 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गई है जो वर्ष 2014 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। सरकारी तेल कंपनियों का कहना है की घरेलू बाजार में कीमतें और बढ़ेंगी।कच्चे तेल के साथ ही प्राकृतिक गैस की कीमतें भी अतंरराष्ट्रीय बाजार में सात वर्षों के उच्चतम स्तर पर हैं। चीन, ब्रिटेन व दूसरे यूरोपीय देशों की तरफ से भारी मांग है।

खासतौर पर चीन ने अपने बिजली संकट को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर आन-स्पाट गैस खरीद शुरू कर दी है। भारत अपनी जरूरत का 45 फीसद गैस आयात करता है और इसमें तेजी से बढ़ोतरी भी होने वाली है। भारत में घरेलू गैस की कीमत भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से संबंधित है। घरेलू खनन क्षेत्रों से निकाले गए गैस की कीमत भी 62 फीसद बढ़ाई गई है। इसके बाद देशभर में पीएनजी व सीएनजी की कीमतों में इजाफा किया गया है। यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।कोयला भी चार गुणा महंगाभारत को विदेशी बाजार में महंगे होते कोयले का भी बोझ उठाना पड़ रहा है। इस वर्ष अप्रैल में कोयला 50 डालर प्रति टन का था जो अभी 200 डालर प्रति टन हो चुका है।

चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की ताप बिजली संयंत्रों ने 4.5 करोड़ मैट्रिक टन कोयला आयात करने की योजना बनाई थी लेकिन बढ़ती कीमत की वजह से ये कंपनियां भी घरेलू स्त्रोतों से कोयला हासिल करने की कोशिश में है। इस वजह से भी कोयले की किल्लत हो रही है। मंगलवार को सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 135 ताप बिजली संयंत्रों में से 17 संयंत्रों के पास कोई कोयला नहीं है।

वहीं, 20 संयंत्रों के पास एक दिन और अन्य 20 संयंत्रों के पास दो दिनों, 19 संयंत्रों के पास तीन दिनों और सिर्फ 15 संयंत्रों के पास चार दिनों का कोयला बचा हुआ है। वृद्धि लंबे समय तक चली तो मुश्किल: रे¨टग एजेंसी क्रिसिल के प्रमुख अर्थशास्त्री डीके जोशी ने दैनिक जागरण को बताया कि सभी तरह के ऊर्जा स्त्रोतों की कीमतों में वृद्धि का सिलसिला ज्यादा समय तक रहेगा तो दिक्कत होगी। बिजली व इंधन की कीमतों से महंगाई दर पर तो असर पड़ेगा ही लेकिन इसका परोक्ष तौर पर आम जनता के बचत पर भी असर होता है। माल भाड़ा बढ़ने से कई तरह के उत्पाद महंगे हो जाते हैं।

Edited By: Nitesh