क्रिसिल रेटिंग्स का दावा, ट्रंप टैरिफ से इस साल 18 प्रतिशत तक घट सकता है भारत का श्रिंप निर्यात
CRISIL Report रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने भारत से श्रिंप निर्यात पर एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद मौजूदा वित्त वर्ष में भारत का श्रिंप निर्यात 15 से 18 प्रतिशत घट सकता है। भारत का निर्यात इक्वाडोर वियतनाम इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों के मुकाबले कम प्रतिस्पर्धी हो जाएगा।

अमेरिका के टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद इस वर्ष भारत से अमेरिका को श्रिंप (झींगा) का निर्यात 15 से 18 प्रतिशत घट सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही है। अमेरिका ने 27 अगस्त से भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया है। पुराने टैरिफ को मिलाकर श्रिंप पर अब टैरिफ 58.26 प्रतिशत हो गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्यातक अपने प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव करने और अमेरिका से अलग दूसरे बाजारों की तलाश में हैं। इस सेगमेंट का रेवेन्यू पिछले चार वर्ष से स्थिर है। टैरिफ वृद्धि की आशंका के चलते पहली तिमाही में शिपमेंट में वृद्धि हुई थी।
पिछले साल 48 प्रतिशत श्रिंप निर्यात अमेरिका को
वित्त वर्ष 2024-25 में, भारत ने लगभग 5 अरब डॉलर के श्रिंप का निर्यात किया, जिसमें से अमेरिका को निर्यात लगभग 48 प्रतिशत था। स्थिर राजस्व और टैरिफ का बोझ ग्राहकों पर न डाल पाने के कारण ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 1.5 से 2 प्रतिशत कम हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, आसान बाजार पहुंच, ग्रोथ की बेहतर संभावनाओं और बेहतर प्रॉफिट मार्जिन के कारण अमेरिका लंबे समय से श्रिंप निर्यातकों का पसंदीदा गंतव्य रहा है। एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी, तथा अप्रैल 2025 में 10 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ के बावजूद अमेरिका पसंदीदा गंतव्य बना हुआ था, क्योंकि ग्राहकों ने इन शुल्कों के एक हिस्से का वहन किया।
शुल्क में 50 प्रतिशत वृद्धि भारत को इक्वाडोर, वियतनाम, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों के मुकाबले कम प्रतिस्पर्धी बना देगी। इन देशों पर अमेरिकी टैरिफ भारत के आधे से भी कम है। इसलिए अमेरिका को भारत का श्रिंप निर्यात अव्यावहारिक हो जाएगा, और वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में निर्यात की मात्रा में गिरावट आएगी।
वैकल्पिक बाजारों की तलाश
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय प्रोसेसर्स की तरफ से अपने श्रिंप निर्यात को ब्रिटेन, चीन और रूस जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर मोड़ने से इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में निर्यात कुछ हद तक बढ़ाया जा सकता है।
क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक राहुल गुहा ने कहा, “इन विपरीत परिस्थितियों का असर प्रोसेसर्स पर पड़ेगा और किसान श्रिंप पालन में निवेश से हतोत्साहित होंगे। किसानों को जमीन के पट्टे, बीज और चारे पर अग्रिम लागत उठानी पड़ती है। इसके अलावा एरेशन, बिजली, तालाब प्रबंधन और जैव सुरक्षा के लिए उपकरणों में निवेश से उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजनेस घटने के कारण चालू वित्त वर्ष में ऑपरेटिंग मार्जिन भी दशक के निचले स्तर 5-5.5 प्रतिशत तक गिर जाएगा।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।