नई दिल्ली। अभी तक चीनी अर्थव्यवस्था को सबसे तेजी से आगे बढ़ता मानने वाले अब इस भ्रम को दूर कर लें। विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन का आर्थिक संकट ग्रीस के संकट से अधिक भयावह हो सकता है। वित्त विशेषज्ञों का मानना है कि चीन में हालात वैसे ही बनते जा रहे हैं जो अमेरिका में 1929 में शेयर बाजार डूबने से पैदा हुए अब तक के सबसे बड़े आर्थिक महासंकट के थे। महज कुछ हफ्तों में ब्राजील की अर्थव्यवस्था जितनी रकम करीब 3 खरब डॉलर चीनी शेयर बाजारों से साफ हो गई है।

चीनी सरकार की अर्थव्यस्था को संभालने की लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें अब तक विफलता ही हाथ लगी है। मध्य जून से अब तक चीन के शेयर बाजार में तीस प्वाइंट की गिरावट मौटे तौर पर पिछले साल ब्रिटेन में हुए कुल आर्थिक लाभ के बराबर है। आधुनिक अर्थव्यवस्था के चहेते चेहरे रहे चीन की करीब एक-तिहाई कंपनियों यानी 940 से अधिक कंपनियों ने चीन के मुख्य दो स्टाक एक्सचेंजों शंघाई और शेनझेन ने ट्रेडिंग स्थगित कर दी है। मौटेतौर पर चीन उसी राह चल पड़ा है जहां अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपने शेयर बाजारों के कारण औंधे मुंह गिर पड़ी थी।

एक दशक के बेतहाशा विकास, बेलाग मुनाफा और सफलताओं ने वर्ष 1929 में अमेरिका और अब चीनी अर्थव्यवस्था को आर्थिक विकास के संतृप्ति पर ला खड़ा किया है। दोनों देशों ने विकास उधार की अर्थव्यवस्था पर किया। या फिर उद्योग बढ़ाने के लिए निवेश से मुनाफे का अंतर बहुत कम रखा। यही इन दोनों देशों में मंदी का दौर लाने का कारण बना।

ऊंची उड़ान के दुष्परिणाम

अब तक चमकती-दमकती चीनी अर्थव्यवस्था में पिछले दो-तीन साल से रीयल एस्टेट में मंदी का जो कारण रहा वहीं अब शेयर बाजार के बेजान पड़ने का भी है। अत्यधिक निवेश और आधारभूत ढांचा खड़ा करने की होड़ में वैश्विक मांग तो क्या घरेलू मांग भी गैर जरूरी हो गई। अंदर से खोखली होती जा रही चीनी अर्थव्यवस्था कार्टून कैरेक्टर जैसी हो गई जिसमें कार्टून जमीन का सिरा खत्म होने के बाद भागता ही रहता है।

चीनी सरकार ने लगाई ताकत

चीन अभी भी एक योजनाबद्ध और केंद्र नियंत्रित अर्थव्यवस्था है। चीन की सरकार अभी भी शेयर बाजारों को अर्थव्यवस्था के नियमों से परे कई उपायों के जरिए बचाने की कोशिश कर रही है। इसलिए चीनी शेयर बाजार कितने ही नीचे गिर जाएं, हालात 2007-08 की मंदी से अधिक बुरे नहीं होंगे। पहले सोने और फिर रीयल इस्टेट में सरकार ने पैसा बहाने के बाद अब शेयर बाजार को स्थिर रखने के लिए शेयर बाजारों में रकम लगाई है।

चीनी बाजारों का धन संकट

-एक महीने से कम समय में चीनी शेयर बाजारों से 3.2 खरब डॉलर का सफाया

-हालात संभालने को प्रमुख ब्रोकरों ने 19 अरब डॉलर शेयर मार्केट में लगाए

-सरकार और फंड मैनेजर ब्लू चिप बचाना चाहते थे, पर स्माल कैप की ट्रेडिंग बंद होने से ब्लू चिप बेचने पड़े।

-चीन में सूचीबद्ध 500 कंपनियों को शंघाई और शेनझेन एक्सचेंजों में ट्रेडिंग बंद करनी पड़ी। वैसे कुल 1300 कंपनियों से कारोबार बंद किया।

-चीन के पूंजी नियामक ने कहा कि सिक्योरिटीज फाइनेंस कार्प ने 21 ब्रोक्रेरेज को 260 अरब यूयान (41.8 अरब डालर) दिए हैं।

-हांगकांग शेयरों को भारी नुकसान, हेंगसेंग इंडेक्स में 3.3 फीसद गिरावट।

Posted By: Gunateet Ojha