Google, WhatsApp से OYO तक, कोई नहीं बचा; CCI ने 5 साल में 54 मामलों में ठोका ₹4225 करोड़ का जुर्माना
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने पिछले पांच वर्षों में प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों के लिए ₹4225 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया है।

CCI ने 5 साल में 4225 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया। (इमेज AI जेनरेटेड है)
HighLights
CCI ने 5 साल में 4225 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया।
Google, WhatsApp, OYO जैसी बड़ी कंपनियों पर कार्रवाई हुई।
नए दिशानिर्देशों से कंपनियों पर अनुपालन का दबाव बढ़ा।
नई दिल्ली। भारत में कंपनियां सही से बिजनेस कर रही हैं या नहीं, गलत तरीके से व्यापार तो नहीं कर रहीं, कॉम्पिटिशन-विरोधी तौर-तरीकों का इस्तेमाल तो नहीं कर रहीं? इसकी देखरेख के लिए भारत में एक संस्था है जिसका नाम कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया यानी CCI है। यह संस्था यह इंश्योर करती है कि मार्केट में कंपनियों के बीच हेल्दी कंपटीशन हो।
अगर कोई कंपनी नियम तोड़ती है, तो उसके खिलाफ CCI एक्शन लेती है। कॉम्पिटिशन लॉ के जानकारों पिछले 5 सालों में इसने 54 मामलों में कंपनियों पर ताबड़तोड़ एक्शन लिए और कुल लगभग 4,225.83 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
अगर कंपनियों को भारत में कारोबार करना है तो उन्हें प्रतिस्पर्धा नियमों का पालन जरूरी है। चाहे बात Google की हो, WhatsApp की हो या फिर OYO और MakeMyTrip जैसी कंपनियों की, पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी कंपनियां भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की कार्रवाई का सामना कर चुकी हैं।
CCI ने कब कितना ठोका जुर्माना
- वित्त वर्ष 2020-21 में केवल 1.34 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
- वित्त वर्ष 2021-22 में यह बढ़कर 1,335.77 करोड़ रुपये पहुंच गया।
- वित्त वर्ष 2022-23 में रिकॉर्ड 2,672.48 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
- वित्त वर्ष 2023-24 में जुर्माने की राशि घटकर 2.55 करोड़ रुपये रह गई।
- वित्त वर्ष 2024-25 में फिर से 213.69 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
वित्त वर्ष 2022-23 में लगाए गए भारी जुर्मानों के पीछे Google, MakeMyTrip और OYO से जुड़े प्रमुख मामले रहे। वहीं हाल के वर्षों में Meta और WhatsApp की प्राइवेसी नीति से जुड़े मामलों ने भी काफी चर्चा बटोरी।
2024 में जारी किए गए नए पेनाल्टी दिशानिर्देशों के बाद कंपनियों को यह स्पष्ट संकेत मिला है कि नियमों के पालन को गंभीरता से लेना होगा। अच्छी अनुपालन व्यवस्था रखने वाली कंपनियों को कुछ मामलों में राहत भी मिल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कई मामलों में नियमों की व्याख्या को लेकर अभी भी स्पष्टता की जरूरत है। कई बड़े जुर्माने अदालतों और अपीलीय मंचों पर चुनौती के कारण वर्षों तक लंबित रहते हैं।
कंपनियों पर बढ़ा दबाव
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ साल पहले तक प्रतिस्पर्धा कानून को कंपनियां केवल एक औपचारिक नियम के रूप में देखती थीं। लेकिन अब यह सीधे तौर पर कारोबारी रणनीति और जोखिम प्रबंधन का हिस्सा बन चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल बाजार अब CCI के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हो चुका है। ऑनलाइन विज्ञापन, डेटा उपयोग, डिजिटल प्लेटफॉर्म की बाजार शक्ति और उपभोक्ता हितों से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य सेवाएं और फार्मास्युटिकल सेक्टर भी आयोग की निगरानी में बने हुए हैं।
