भारत में मिला 50000 किलो सोने का भंडार, जल्द शुरू होगी माइनिंग; पहली बार प्राइवेट कंपनियों को मौका
आंध्र प्रदेश में 50,000 किलोग्राम सोने के विशाल भंडार मिलने के संकेत मिले हैं, जिससे भारत का सोने का आयात ...और पढ़ें
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आंध्र प्रदेश में 50,000 किलो सोने के भंडार के संकेत मिले।
HighLights
आंध्र प्रदेश में 50,000 किलो सोने के भंडार के संकेत मिले।
कुर्नूल के जोन्नागिरी में व्यावसायिक स्तर पर सोने का खनन शुरू।
खनन कार्य के लिए निजी कंपनियों को निविदा से मौका मिलेगा।
नई दिल्ली। सोने के भंडार को लेकर एक बड़ी खबर आई है। दरअसल, आंध्र प्रदेश में 50000 किलो सोने का भंडार (Gold Reserve in Andhra Pradesh) मिलने के संकेत मिले हैं। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुर्नूल जिले समेत राज्य के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर सोने के भंडार मिलने के संकेत मिले हैं।
इतना बड़ा सोने के भंडार मिलने का अनुमान अगर सही साबित हुआ तो भारत को गोल्ड का आयात कम करना पड़ेगा और आंध प्रदेश प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरेगा।
प्रधान सचिव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जानकारी
खनन विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कुर्नूल जिले के जोन्नागिरी गांव में ही लगभग 50 टन सोने का भंडार होने का अनुमान है। इसके अलावा रामागिरी, जाव्वाकुला, चिगुरुकुंटा और बिस्नातम समेत चार अन्य स्थानों को भी संभावित स्वर्ण खनन क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि अनुमान सही साबित होते हैं तो अगले कुछ वर्षों में आंध्र प्रदेश देश में सबसे अधिक सोना उपलब्ध कराने वाला राज्य बन सकता है।
1,500 एकड़ भूमि सोने के खनन के लिए हुई थी आवंटित
मीणा ने बताया कि जोन्नागिरी में व्यावसायिक स्तर पर सोने का उत्पादन शुरू हो चुका है। करीब दस साल पहले यहां लगभग 1,500 एकड़ भूमि सोने के खनन के लिए आवंटित की गई थी। हालांकि अब तक केवल 500 एकड़ क्षेत्र में ही खोज और सर्वेक्षण का काम किया गया है।
अब तक किए गए सर्वेक्षण के आधार पर इस क्षेत्र में लगभग 13 टन सोने का भंडार होने का अनुमान लगाया गया है। बाकी 1,000 एकड़ भूमि में अभी खोज कार्य शुरू नहीं हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि पूरे क्षेत्र की जांच पूरी होने के बाद जोन्नागिरी में कुल सोने का भंडार 50 टन तक पहुंच सकता है।
निजी कंपनियों को भी मिलेगा मौका
अधिकारी ने बताया कि सोने का खनन एक पूंजी-प्रधान और तकनीकी रूप से जटिल उद्योग है। इसी वजह से सरकार ने खनन कार्य को निविदा प्रक्रिया के जरिए निजी कंपनियों को सौंपने का फैसला किया है।
उन्होंने यह भी बताया कि समय के साथ सोने की रिकवरी दर में काफी गिरावट आई है। पहले एक टन खनिज सामग्री से लगभग 3 ग्राम सोना निकल जाता था, जबकि अब यह मात्रा घटकर करीब 1 ग्राम प्रति टन रह गई है।
मीणा के अनुसार, यदि रिकवरी दर 0.8 ग्राम प्रति टन से नीचे चली जाए तो खनन परियोजनाएं आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं रहतीं।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu इस महीने के अंत में जोन्नागिरी स्वर्ण खनन परियोजना का औपचारिक शुभारंभ कर सकते हैं।
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