टैक्स भरने वालों के लिए खुशखबरी! अब आयकर विभाग नहीं पूछेगा फालतू के सवाल, CBDT का बड़ा आदेश, जानें क्या बदला
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने फेसलेस असेसमेंट सिस्टम को सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीबीडीटी के अध्यक्ष रवि अग्रवाल ने अधिकारियों को कर मामलों में अनावश्यक सवाल न पूछने के सख्त निर्देश दिए हैं। यह निर्देश देशभर के प्रिंसिपल चीफ कमिश्नरों ऑफ इनकम टैक्स को भेजे गए पत्र के जरिए जारी किए गए हैं।
नई दिल्ली। आयकर विभाग के संगठन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने फेसलेस असेसमेंट सिस्टम में सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। CBDT के अध्यक्ष रवि अग्रवाल ने फेसलेस असेसमेंट अधिकारियों (FAOs) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि वे कर मामलों में बेवजह और अप्रासंगिक सवाल न पूछें और केवल मामले से संबंधित व विशेष रूप से जरूरी पूछताछ ही करें।
यह निर्देश देशभर के प्रिंसिपल चीफ कमिश्नरों ऑफ इनकम टैक्स को भेजे गए पत्र के जरिए जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि फेसलेस असेसमेंट प्रक्रिया को अधिक कुशल, उद्देश्यपूर्ण और करदाताओं के अनुकूल बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को बेहतर मानकों पर लाया जाएगा।
नोटिस और नई गाइडलाइंस
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की अनिवार्य जांच के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं, जिनके तहत कंप्यूटर असिस्टेड स्क्रूटनी सिलेक्शन (CASS) के माध्यम से मामलों का चयन किया जा रहा है। इन मामलों में सेक्शन 143(2) के तहत प्रारंभिक नोटिस भेजे जा रहे हैं और उसके बाद जरूरत के अनुसार सेक्शन 142(1) के तहत पूछताछ या अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाएंगे।
क्यों है यह फैसला अहम?
1. करदाताओं पर अनावश्यक दबाव और उलझनों को कम करने के लिए
2. फेसलेस टैक्स असेसमेंट को उद्देश्यपूर्ण और असरदार बनाने के लिए
3. विभाग और करदाताओं के बीच भरोसे को मजबूत करने के लिए
4. फ्रिवोलस (गैर-जरूरी) पूछताछ और नोटिस की संख्या घटाने के लिए
क्या कहा CBDT चेयरमैन ने?
रवि अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि, "फेसलेस असेसमेंट के दौरान उठाए गए सभी सवाल प्रासंगिक, सटीक और केस की परिस्थितियों पर आधारित होने चाहिए। अनावश्यक और बेतुके सवालों से बचा जाए।"
उन्होंने आगे कहा कि असंबंधित पूछताछ न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि इससे करदाताओं पर अनावश्यक बोझ भी पड़ता है, जिससे विभाग की छवि को नुकसान पहुंचता है।
यूनिट प्रमुखों पर जिम्मेदारी
CBDT ने यह भी स्पष्ट किया है कि फेसलेस असेसमेंट के यूनिट हेड्स एडिशनल और जॉइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारी अब सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे कि उनके अधीनस्थ अधिकारी क्या और कैसे पूछताछ कर रहे हैं। उन्हें यह देखना होगा कि पूछे गए सवाल CASS चयन के मापदंडों के अनुसार हैं या नहीं।
हर महीने होगी समीक्षा
इस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक महीने प्रिंसिपल चीफ कमिश्नरों को फेसलेस यूनिट्स के साथ इंटरैक्शन और समीक्षा बैठकें करनी होंगी। इसके साथ-साथ, वे महीनेभर में जारी किए गए नोटिसों की गुणवत्ता पर रिपोर्ट भी तैयार करेंगे। यह निगरानी और समीक्षा प्रणाली न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ाएगी बल्कि टैक्स असेसमेंट प्रक्रिया में जवाबदेही और निरंतर सुधार को भी सुनिश्चित करेगी।
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