नई दिल्ली, बलवंत जैन। मेरे एक जानकार को हाल में एक प्रोपर्टी लेनी थी। मैंने ऐसे ही जिज्ञासावश पूछ लिया कि आपने किस-किस के नाम पर यह प्रोपर्टी लेने का सोचा है। इस पर उन्होंने कहा कि इसमें सोचना क्या है। मैं अपने ही नाम पर प्रोपर्टी लूंगा, न? फिर मैंने उन्हें बताया कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी तरह का निवेश संयुक्त नाम के साथ करना चाहिए। इसमें कई तरह के फायदे हैं। मैंने जब पूरे आराम से उन्हें इन फायदों के बारे में बताया तो उन्होंने ना सिर्फ मेरा आभार जताया, बल्कि प्रोपर्टी को ज्वाइंट नाम से खरीदने पर सहमत भी हो गए। ऐसे में मैंने सोचा कि हमारे पाठकों को भी इन फायदों के बारे में निश्चित तौर पर जानकारी होनी चाहिए। 

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आप किन लोगों को बना सकते हैं संयुक्त मालिक?

प्रोपर्टी खरीदते समय आप किस व्यक्ति को संयुक्त मालिक बना सकते हैं और किसे नहीं, इस संबंध में कोई कानून नहीं है। आप किसी नजदीकी रिश्तेदार, बिजनेस पार्टनर या यहां तक कि करीबी दोस्त को संयुक्त मालिक बना सकते हैं। किसी प्रोपर्टी को खरीदते समय ये जरूरी नहीं है कि ज्वाइंट होल्डर भी कुछ पैसों का योगदान करे। अगर आप अकेले पूरा पैसा दे रहे हैं तो भी अपनी पत्नी या बच्चों को प्रोपर्टी एग्रीमेंट पेपर में ज्वाइंट मालिक के रूप में शामिल करना फायदेमंद साबित होता है। वहीं, अगर आपकी शादी नहीं हुई है तो आप अपने माता-पिता या भाई को संयुक्त मालिक बना सकते हैं। आप प्रोपर्टी खरीदते समय कितने भी लोगों को संयुक्त रूप से मालिक बना सकते हैं।  

जानिए संयुक्त नाम से प्रोपर्टी खरीदने के क्या हैं फायदे

1. होम लोन लेते वक्तः 

होम लोन देते वक्त बैंक सभी संयुक्त मालिकों को संयुक्त तौर पर लेनदार बनाने पर जोर देते हैं। अगर आप अपने स्पाउस, माता-पिता या बच्चे जैसे नजदीकी रिश्तेदारों को को-बॉरोअर बनाकर लोन के लिए अप्लाई करते हैं तो आपको ज्यादा रकम का लोन मिल सकता है। अधिकतर बैंक इन नजदीकी रिश्तेदारों के अलावा किसी और को को-बॉरोअर बनाने पर आवेदन को अधिक तवज्जो नहीं देते हैं। यहीं नहीं, दोस्त, साझीदार या यहां तक कि भाई या बहन को संयुक्त तौर पर मालिक बनाने पर आपका होम लोन अप्लीकेशन खारिज भी हो सकता है।  

2. प्रोपर्टी को एक नाम से दूसरे के नाम पर करने में नहीं आती है कोई दिक्कत

आजकल अधिकतर लोग हाउसिंग सोसायटी में फ्लैट खरीदते हैं। ऐसे में संयुक्त नाम के साथ प्रोपर्टी खरीदना बेहतर होता है। ऐसा इसलिए कि कल को ईश्वर ना करें लेकिन अगर ज्वाइंट होल्डर्स में से किसी को कुछ हो गया तो सोसायटी आम तौर पर ज्वाइंट होल्डर के नाम पर प्रोपर्टी कर देती है। इसके लिए वह आम तौर पर प्रोबेट या अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों से एनओसी नहीं मांगते हैं। हालांकि, सोसायटी में नॉमिनेशन पेपर जमा करने का प्रावधान होता है लेकिन संयुक्त मालिक की तुलना में नॉमिनी को फ्लैट ट्रांसफर करवाना ज्यादा कठिन होता है।   

3. आयकर और अन्य लाभ

संयुक्त नाम के साथ प्रोपर्टी खरीदने पर आपको बेहतर टैक्स प्लानिंग में भी मदद मिलती है। आप होम लोन के मूलधन पर सेक्शन 80C या सेक्शन 24b के तहत आवासीय ऋण के पर मिलने वाली टैक्स छूट का फायदा ले सकते हैं। इन दोनों टैक्स छूट का लाभ मालिक या संयुक्त मालिक को मिलता है। आपको होम लोन से संबंधित इन टैक्स छूट का लाभ ऐसे मामलों में नहीं मिलेगा अगर लोन आपके नाम पर है लेकिन घर आपके नाम पर नहीं है।  

आज के समय में शहरों में 50 लाख रुपये से कम में अच्छा मकान मिलना मुश्किल है। ऐसे में हम देखें तो आठ फीसद की दर से 50 लाख रुपये पर हर साल 4 लाख रुपये का ब्याज देय होता है। अगर आपने खुद के रहने के लिए घर लिया है और मकान एवं लोन सिर्फ आपके नाम पर है तो आप एक साल में अधिकतम दो लाख रुपये तक के ब्याज पर ही टैक्स छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, अगर उसी प्रोपर्टी को अगर आप संयुक्त नाम के साथ लेते हैं तो दोनों ज्वाइंट होल्डर दो-दो लाख रुपये के टैक्स छूट को क्लेम कर सकते हैं। दोनों ज्वाइंट होल्डर मूलधन के भुगतान के मामले में भी इसी तरह से टैक्स छूट का लाभ हासिल कर सकते हैं।  

4. स्टांप ड्यूटी में भी मिल सकती है राहत

कुछ मामलों में अगर महिला के नाम पर रजिस्ट्री होती है तो कम स्टांप ड्यूटी देना पड़ता है। इसी तरह होम लोन में अगर महिला पहली आवेदक रहती है तो कुछ बैंक ब्याज दर में कुछ छूट देते हैं।   

इन सभी पहलुओं से यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि संयुक्त नामों से मकान खरीदना कई लिहाज से फायदे का सौदा है। इसमें ना सिर्फ प्रोपर्टी को एक नाम से दूसरे नाम पर ट्रांसफर करने में मदद मिलती है बल्कि टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है। 

(लेखक टैक्स एंड इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट और Apnapaisa.Com के चीफ एडिटर हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)

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