नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। विपक्ष दलों ने रेल बजट को पिछले रेल बजटों की नकल बताते हुए मोदी सरकार पर संप्रग सरकार की योजनाओं को नई पैकेजिंग में पेश करने और श्रेय लेने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस की ओर से राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को रेल बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा, रेल बजट सिर्फ पैकेजिंग के कारण खूबसूरत लग रहा है। इसमें ऐसा कुछ भी नहीं जो संप्रग सरकार न कर चुकी हो। रेल मंत्री सदानंद गौड़ा से मुखातिब होते हुए कहा, दरअसल, आपको राज्य सरकार चलाने का अनुभव है, मगर केंद्र सरकार चलाना उतना आसान नहीं है। आपने बड़े-बड़े वादे किए हैं, जिन्हें पूरा करना मुश्किल है। इसलिए हमारे कार्यो को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं। लेकिन हमने इतना काम कर दिया है कि आप दस साल में भी बराबरी नहीं कर पाएंगे। पांच साल तो हमारी परियोजनाओं का उद्घाटन करने में ही बीत जाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा था कि संप्रग सरकार ने कुछ नहीं किया। लेकिन आपने क्या किया? जिन चार बड़ी परियोजनाओं का एलान किया है उनकी शुरुआत संप्रग सरकार ने की थी।

सच तो यह है कि संप्रग सरकार ने 11वीं योजना में ही रेलवे की मजबूत नींव रख दी थी। इस दौरान जहां 2207 किमी नई लाइनें बिछीं वहीं 2758 किमी का दोहरीकरण तो 4556 किमी का विद्युतीकरण हुआ। यही नहीं, 2013-14 में हमने 1532 किमी नई लाइनें बिछाने का रिकार्ड बनाया। इसके अलावा 64575 नए वैगन, 1258 डीजल इंजन और 1218 इलेक्ट्रिक इंजन भी शामिल किए गए। भारतीय रेल को एक अरब टन माल ढोने वाली रेलों के 'बिलियन क्लब' में हमने ही शामिल कराया। हाईस्पीड, सेमी हाईस्पीड ट्रेन, बायो टायलेट, वाई-फाई, पीपीपी, एफडीआइ सारे आइडिया हमारे दिए हुए हैं, लेकिन आप इन्हें अपना बता रहे हैं। वाकई, पैकेजिंग में आपका कोई सानी नहीं है। इस मामले में आप दुनिया की किसी भी विज्ञापन एजेंसी को मात दे सकते हैं।

कांग्रेस के ही जयराम रमेश ने बुलेट ट्रेन को देश के लिए गैर जरूरी बताया। उनका कहना था कि मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने पर 60 हजार करोड़ तक का खर्च आएगा। किराया भी 5000 रुपये से कम नहीं होगा। उन्होंने अलग रेल बजट को भी अनावश्यक बताते हुए इसे आम बजट में शामिल करने का सुझाव दिया। सपा के रामगोपाल यादव ने बुलेट ट्रेन के बजाय ट्रेनों में साधारण दर्जे की बोगियां बढ़ाने की नसीहत दी। तृणमूल के डेरेक ओ ब्रायन का कहना था कि रेल बजट में एक भी नया आइडिया नहीं है, जबकि नीतीश कुमार ने संपर्क क्रांति तो ममता बनर्जी ने दूरंतो ट्रेनों का नया आइडिया दिया था। आप सड़क की तरह छोटी दूरियों के लिए माल ढुलाई की कोई स्कीम ही शुरू कर देते।

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