बचपन में खूब फुलाए होंगे Big Babol से गुब्बारे! जानते हैं किस देश की कंपनी की है ये च्यूइंग गम; पढ़ें दिलचस्प इतिहास
90 के दशक की मशहूर च्यूइंग गम 'बिग बबल' का भारत में एक समय बोलबाला था, जिसके विज्ञापन काफी लोकप्रिय ...और पढ़ें

Big Babol किस कंपनी की है?
HighLights
90 के दशक में 'बिग बबल' का विज्ञापन था मशहूर
परफेटी वैन मेले ने 1994 में भारत में लॉन्च किया
लिक्विड-फिल्ड गमों के कारण बिक्री में गिरावट आई
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अगर 90's में पैदा हुए हैं, तो आपको "बड़े काम की चीज" वाला जिंगल याद होगा। अगर आपको एक और हिंट चाहिए, तो सोचिए एक कछुआ च्यूइंग गम का बुलबुला फुलाकर उड़ने लगता है। कुछ याद आया? हां, हम 'बिग बबल' (Big Babol) की बात कर रहे हैं। आइए ले चलते हैं आपको उसी दौर में और बताते हैं कि ये किस कंपनी का प्रोडक्ट है।
विज्ञापन की थी खास पहचान
एक समय था जब Big Babol की वजह से बच्चे बड़ा बुलबुला फुलाने की होड़ में रहते थे। इसके साथ जुड़ी टैगलाइन इसे एक मजेदार विज्ञापन बनाती थी, जो बच्चों को दिखाता था कि कैसे एक बुलबुला उन्हें मुसीबत से बचा सकता है या उनके काम आ सकता है।
उसका मकसद सिर्फ यह दिखाना नहीं था कि बुलबुले फुलाना मजेदार है, बल्कि इसे 'कूल' और 'काम की चीज' के रूप में पेश करना था।
ऐसा थे वो विज्ञापन
2000 के दशक की शुरुआत का वह मशहूर एनिमेटेड विज्ञापन याद करें, जिसमें एक कछुआ था। एक चिड़िया द्वारा अपनाए जाने के बाद, वह कछुआ एक बड़ा गुलाबी बुलबुला फुलाता है ताकि वह अपने पंख वाले भाई-बहनों की तरह उड़ सके। मार्केटिंग के माहिर प्रसून जोशी द्वारा लिखे गए बोल और नैरेशन के साथ, यह विज्ञापन काफी अनोखा और मजेदार था, जिसने बुलबुले को एक खास पहचान दी।
अगले साल एक ऐसा और विज्ञापन आया जिसमें एक छोटा लड़का एक कौवे से बदला लेता है। पेड़ पर बैठा कौवा लड़के पर बीट कर देता है, जिसके बाद लड़का एक बुलबुला फुलाता है। इस बुलबुले की मदद से वह हवा में उठ जाता है और कौवे पर टूथपेस्ट छिड़क देता है। यह विज्ञापन काफी पसंद किए गए।
कई देशों में लोकप्रिय
Big Babol नाम इटली की कंपनी परफेटी वैन मेले (Perfetti Van Melle) की देन था। इसी कंपनी के पास 'एल्पेनलीबे' (Alpenliebe), 'सेंटर फ्रेश' (Centre Fresh), 'सेंटर शॉक' (Centre Shock), 'फ्रूटेला' (Fruittella) और 'हैप्पीडेंट' (Happydent) जैसी मशहूर कैंडी ब्रांड्स भी हैं।
कंपनी की ये च्यूइंग गम न सिर्फ इटली, बल्कि भारत, तुर्किये, रूस, चीन, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों में भी काफी लोकप्रिय हो गई।
1994 में आई भारत
भारत में Big Babol को 1994 में पेश किया गया। परफेटी वैन मेले इंडिया के मार्केटिंग डायरेक्टर रहे रोहित कपूर के अनुसार, इस प्रोडक्ट ने भारत में एक बहुत ही सरल पैकेजिंग आइडिया (प्लास्टिक जार) के जरिए अपनी जगह बनानी शुरू की।
कपूर के अनुसार छोटे प्लास्टिक के डिब्बे को छोटे किराना स्टोर वाले भी अपने काउंटर पर आगे रख सकते थे। सुनने में यह भले ही बहुत साधारण लगे, लेकिन ऐसी रणनीति अकसर काम आती हैं।
स्पेशल एडिशन किया लॉन्च
सदी के बदलाव के साथ कंपनी ने 'Big Babol 2000' नाम से एक स्पेशल एडिशन पेश किया, जो एक कोटेड और लिक्विड फिल्ड गम थी। 2003 में, इसे एक बड़े री-लॉन्च के साथ पेश किया गया, जिसमें प्रोडक्ट का साइज पहले से बड़ा कर दिया गया, ताकि इससे और भी बड़े बुलबुले (बबल्स) फुलाए जा सकें।
फिर कंपनी ने अपनी पैकेजिंग में छोटे-छोटे गिफ्ट्स देना शुरू किया, जैसे कि टेम्पररी टैटू और WWE के कार्ड, जिन्हें जोड़कर खिलौने बनाए जा सकते थे। इन चीजों ने प्रोडक्ट को और भी ज्यादा इंटरैक्टिव बना दिया और कंपनी के पोर्टफोलियो में इसे एक अहम ब्रांड बना दिया।
क्या इसलिए पिछड़ गई Big Babol?
बाद में कंपनी ने 'सेंटर फ्रूट' (Centre Fruit) पेश किया, जो लिक्विड से भरी एक च्युइंग गम है। यह वह दौर था जब मार्केट धीरे-धीरे इस तरह की 'वैल्यू-ऐड' (अतिरिक्त खूबियों वाली) कैंडीज की ओर बढ़ने लगा था, क्योंकि लोगों को ये अधिक स्वादिष्ट लगती थी।
जल्द ही, 'सेंटर फ्रूट' और 'सेंटर फ्रेश' ने 'Big Babol' को पीछे छोड़ दिया। कंपनी ने'बिग बबल स्पलूश' नाम से एक लिक्विड-फिल्ड वर्जन पेश करने की कोशिश की, लेकिन वह भी उनके सामने टिक नहीं पाया।
अब Big Babol सिमटकर भारत के पूर्वी हिस्सों (मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों) तक ही सीमित रह गई। इसकी प्रतिस्पर्धी 'बूमर' का भी यही हाल हुआ। पिछले छह-सात सालों में 'Big Babol' की बिक्री बहुत घट गई और लिक्विड-फिल्ड बबल गम बनाने वाली कंपनियां आगे निकल गईं। मगर, इस ब्रांड के मशहूर विज्ञापन आज भी भुलाए नहीं जा सकते।
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