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'हमें बचा लो'...भारतीय धागे ने उड़ाई बांग्लादेशी कपड़ा मिल मालिकों की नींद; अपनी सरकार से लगा रहे गुहार

Published: Tue, 27 Jan 2026 11:07 AM (IST)

बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग (Bangladesh Textile Mill) गंभीर संकट में है और 1 फरवरी से बंद हो सकता है। घरेलू ...और पढ़ें

बांग्लादेशी कपड़ा मिल मालिकों को हुई टेंशन

बांग्लादेशी कपड़ा मिल मालिकों को हुई टेंशन

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संक्षेप में पढ़ें

नई दिल्ली। भारत के साथ तनाव के बीच बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री संकट में है। बांग्लादेश का टेक्सटाइल उद्योग 1 फरवरी से बंद हो सकता है। ये खतरा इसलिए सामने आया क्योंकि घरेलू मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जनवरी के आखिर तक यार्न पर ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की सुविधा वापस नहीं लेती, तो देश भर की स्पिनिंग यूनिट्स में काम बंद हो जाएगा। इस स्थिति का जिम्मेदार भारतीय धागे को बताया जा रहा है। आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है।

घरेलू स्पिनिंग यूनिट्स को नुकसान

मिल मालिकों की यह चेतावनी अंतरिम सरकार पर बढ़ते दबाव के बीच आई है, जिनकी मांग है कि सरकार कि बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत आयात किए जाने वाले धागे पर जीरो-ड्यूटी बेनिफिट्स को सस्पेंड करे। यह संकट तब और बढ़ गया जब कॉमर्स मिनिस्ट्री ने नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू को चिट्ठी लिखकर इस सुविधा को वापस लेने की सिफारिश की।
बांग्लादेश के मिल मालिकों का तर्क है कि ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट ने लेवल प्लेइंग फील्ड को खराब कर दिया है और लोकल यानी घरेलू स्पिनिंग यूनिट्स को बहुत नुकसान पहुंचाया है।

भारत से जाता है कॉटन यार्न

बांग्लादेश में काफी समय से गारमेंट बनाने वाले और एक्सपोर्टर प्रतिस्पर्धी कीमतों और लगातार अच्छी क्वालिटी की वजह से भारत से इंपोर्ट किए गए कॉटन यार्न पर निर्भर हैं। वहीं वे चीन से पॉलिएस्टर यार्न इंपोर्ट करते हैं। मगर, अब लोकल मिल मालिकों का कहना है कि इस निर्भरता ने घरेलू टेक्सटाइल इंडस्ट्री को गहरे वित्तीय संकट में पहुंचा दिया है, जिससे निपटने के लिए ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट सुविधा को खत्म करना जरूरी है।

गैस संकट से हालात और खराब

बांग्लादेश में चल रहे गैस संकट की वजह से वहां की मिलों के लिए हालात और खराब हो गए हैं। पिछले तीन-चार महीनों में, गैस की कमी, अनियमित सप्लाई और बढ़ती एनर्जी कीमतों के कारण टेक्सटाइल सेक्टर को लगभग 2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।
मिलों को सब्सिडी रेट पर गैस भी नहीं मिल रही है। अधिक कीमतों और सप्लाई में रुकावट से प्रोडक्शन 50 प्रतिशत तक घटा है।

भारतीय धागा होता है सस्ता

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के मुताबिक भारतीय धागा सस्ता होता है, जो वहां के घरेलू बाजार में भरा पड़ा है। इससे मिल मालिकों के पास 12,000 करोड़ टका (करीब 9022 करोड़ रुपये) से ज्यादा का स्टॉक बिना बिका पड़ा है।
50 से ज्यादा टेक्सटाइल मिलें पहले ही बंद हो गई हैं। बहुत से मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। वित्तीय दबाव बढ़ने के चलते मिल मालिक लोन भी नहीं चुका पा रहे हैं।

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