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वेदांता का 'पावर' गेम: इस देश के राष्ट्रपति ने अनिल अग्रवाल का थामा हाथ, बिजली से लेकर हर मोर्चे पर मिलेगी मदद

Published: Tue, 20 Oct 2026 11:17 AM (IST)

भारतीय अरबपति अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता साउथ अफ्रीका में अपनी जिंक उत्पादन क्षमता को दोगुना करने के लिए निवेश ...और पढ़ें

एक बड़े प्रोजेक्ट को लेकर दिया क्लियरेंस (AI फोटो)

एक बड़े प्रोजेक्ट को लेकर दिया क्लियरेंस (AI फोटो)

HighLights

  1. वेदांता साउथ अफ्रीका में जिंक उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है

  2. राष्ट्रपति रामाफोसा ने नए जिंक स्मेल्टर को समर्थन दिया

  3. परियोजना से हजारों नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय अरबपति अनिल अग्रवाल की कंपनी 'वेदांता' साउथ अफ्रीका में लगातार विस्तार कर रही है। इसने साउथ अफ्रीका में अपनी जिंक उत्पादन क्षमता को डबल करने के लिए निवेश किया है। अब कंपनी को नॉर्दर्न केप में एक मल्टी-बिलियन रैंड (दक्षिण अफ्रीका मुद्रा) वाले जिंक स्मेल्टर के लिए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा का सपोर्ट मिल गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत, कंपनी की गैम्सबर्ग खदान से निकलने वाले अयस्क को विदेश भेजने के बजाय, देश के भीतर ही रिफाइंड धातु में बदला जा सकेगा।

क्या बोले साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति?

शुक्रवार को एगेनीस के पास खदान के दूसरे चरण के उद्घाटन के मौके पर, रामाफोसा ने स्मेल्टर को शुरू करने में अपनी सरकार की मदद का वादा किया। उन्होंने कहा कि इससे इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, स्थानीय खरीद और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

सरकार से सपोर्ट का भरोसा

एगेनीस ने इस प्लांट को लगाने में आने वाली अड़चन को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा, "हम समझते हैं कि इतने बड़े निवेश के लिए व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक बिजली, भरोसेमंद इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य अनुकूल परिस्थितियों की आवश्यकता होती है।" उन्होंने आगे कहा कि इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए सरकार को "वेदांता और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर काम करना होगा।"

बिजली होती है अहम

किसी भी जिंक स्मेल्टर के लिए बिजली की लागत सबसे अहम होती है, क्योंकि धातु को रिफाइन करने में बहुत अधिक बिजली की खपत होती है। साउथ अफ्रीका बिजली मंत्री क्गोसिएंतशो रामोक्गोपा ने कहा कि उनका विभाग इस प्रोजेक्ट का सपोर्ट करता है और कंपनी के साथ टैरिफ को लेकर बातचीत करेगा। उन्होंने कहा, "हम स्मेल्टर बनाने के उनके सपने को साकार करने जा रहे हैं।"

दक्षिण अफ्रीका में एक दशक से भी अधिक समय से कोई जिंक रिफाइनरी नहीं है। इससे पहले एक्सारो रिसोर्सेज ने जोहान्सबर्ग के पूर्व में स्प्रिंग्स स्थित अपना जिंकॉर प्लांट बंद कर दिया था। इसलिए, देश में खनन किया जाने वाला जिंक 'कॉन्संट्रेट' के तौर पर बाहर भेज दिया जाता है।

ये है वेदांता का प्लान

वेदांता का ये प्रोजेक्ट इसकी स्मेल्टर योजना का हिस्सा है। वेदांता दक्षिण अफ्रीका में एक इंटीग्रेटेड जिंक बिजनेस बनाना चाहती है, जिसमें सालाना लगभग 1 मिलियन टन का उत्पादन होगा। इसके लिए नए स्मेल्टर, डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग और नामाक्वा स्पेशल इकोनॉमिक जोन का सहारा लिया जाएगा। अगर यह योजना पूरी तरह से लागू हो जाती है, तो इससे "हजारों नई नौकरियां" पैदा हो सकती हैं।

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