लंदन, रायटर। Amazon और Apple दुनिया के सबसे वैल्यूएबल ब्रांड हैं लेकिन चीन के ब्रांड्स भी इस मामले में लगातार अपने स्थान में सुधार कर रहे हैं। ब्रैंड्स की वैल्यू से जुड़ी एक हालिया रैंकिंग में यह कहा गया है। Kantar BrandZ की रैंकिंग के मुताबिक वैल्यू के मुताबिक चीन के ब्रांड्स यूरोप के टॉप ब्रांड्स से आगे निकल गए हैं। वर्ष 1994 में Jeff Bezos द्वारा स्थापित Amazon दुनिया की सबसे वैल्यूएबल ब्रांज बनी हुई है। कंपनी की ब्रांड वैल्यू 684 बिलियन डॉलर आंकी गई है। वहीं, वर्ष 1976 में स्थापित Apple की ब्रांड वैल्यू 612 बिलियन डॉलर है। इस रैंकिंग में Google 458 बिलियन डॉलर के अनुमानित ब्रांड वैल्यू के साथ तीसरे स्थान पर है।

इस लिस्ट में तीन भारतीय कंपनियां भी शुमार है। Kantar BrandZ की रैंकिंग में Tata Consultancy Services को 58वां, HDFC Bank को 66वां और LIC को 75वां स्थान मिला है।

इस रैंकिंग में चौथे स्थान पर Microsoft, छठे स्थान पर Facebook, आठवें स्थान पर Visa, नौवें स्थान पर McDonald's एवं दसवें स्थान पर MasterCard है।

चीन की सबसे बड़ी सोशल मीडिया और वीडियो गेम कंपनी Tencent पांचवें और Alibaba सातवें पायदान पर रहीं।

Kantar BrandZ में डायरेक्टर (ग्लोबल स्ट्रेटेजी) Graham Staplehurst ने कहा, ''चीन के ब्रांड्स धीरे-धीरे लेकिन स्थिर रूप से प्रगति कर रहे हैं।''

Kantar ने कहा है कि 2003 में स्थापित Tesla सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाला और सबसे ज्यादा वैल्यूएबल कार ब्रांड है।

इस लिस्ट में अमेरिकी ब्रांड्स का दबदबा है। शीर्ष 100 में से 74 प्रतिशत ब्रांड अमेरिका के हैं।

फ्रांस का Louis Vuitton 21वें पायदान है। यह टॉप यूरोपीयन ब्रांड है। जर्मनी की SAP software 26वें स्थान पर है। इस सूची में महज एक ब्रिटिश ब्रांड शामिल है। ब्रिटेन की Vodafone इस लिस्ट में 26वें स्थान पर है। इस लिस्ट में यूरोपीय ब्रांड की हिस्सेदारी घटकर आठ फीसद पर रह गई, जो एक दशक पहले 20 फीसद पर रही थी।

Kantar ने कहा कि दुनिया के टॉप 100 ब्रांड्स का मूल्यांकन 7.1 ट्रिलियन डॉलर किया गया है।

Edited By: Ankit Kumar