नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। कोरोना संक्रमण काल में अमीरों की संपत्ति और गरीबों की गरीबी, इन दोनों में खासा इजाफा हुआ है। ऑक्सफैम इंडिया द्वारा सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, एक तरफ पिछले वर्ष देश में अरबपतियों (जिनकी संपत्ति कम से कम एक अरब डालर या करीब 7,500 करोड़ रुपये है) की संख्या में 40 लोगों की बढ़ोतरी हुई है। बीते वर्ष के अंत में भारत में अरबपतियों की संख्या 142 पर पहुंच गई, जो एक वर्ष पहले 102 थी।

ऑक्सफैम के अनुसार, कोरोना काल की एक दूसरी तस्वीर यह है कि वर्ष 2020 में 4.6 करोड़ से अधिक लोग अत्यंत गरीबों की श्रेणी तक फिसल गए। यूनाइटेड नेशंस के अनुसार, यह संख्या दुनियाभर में नए गरीबों की लगभग आधी है। ऑक्सफैम का कहना है कि मार्च 2020 से नवंबर 2021 के कोरोना काल में देश के अरबपतियों की कुल संपत्ति 23.14 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 53.16 लाख करोड़ रुपये पर जा पहुंची।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश का अर्थतंत्र अभी तक अमीरों को ज्यादा अमीर तथा गरीबों को ज्यादा गरीब बनाने वाला रहा है। ऑक्सफैम इंडिया के सीईओ अमिताभ बेहर ने कहा कि आर्थिक विषमता के चलते दुनियाभर में हर दिन कम से कम 21,000 या प्रति चार सेकेंड एक व्यक्ति की मौत हो रही है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना संकट की अवधि में 16.3 करोड़ और लोग गरीबी रेखा के नीचे फिसल गए।

ऑक्सफैम का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान दुनियाभर के शीर्ष 10 धनकुबेरों की संपत्ति 1.5 लाख करोड़ डालर यानी 113 लाख करोड़ रुपये पर जा पहुंची है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट का कहना है कि इस समय देश के शीर्ष 10 धनकुबेरों के पास इतनी संपत्ति है कि देशभर के बच्चों की स्कूल और कॉलेज में अगले 25 वर्षों की पढ़ाई का खर्चा निकल आएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, 10 प्रतिशत धनकुबेरों पर अगर सिर्फ एक प्रतिशत अतिरिक्त वेल्थ टैक्स लगाया जाए तो देश को 17.7 लाख अतिरिक्त ऑक्सीजन सिलेंडर मिल सकते हैं। वहीं, देश के 98 अरबपति परिवारों पर यही एक प्रतिशत टैक्स लगाया जाए तो सात सालों तक दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस योजना आयुष्मान भारत का पूरा खर्च कवर हो जाएगा।

(इनपुट- आइएएनएस और पीटीआइ)

Edited By: Lakshya Kumar