नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अगर आप पैसा ट्रांसफर करने के लिए नेटबैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो आपको NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) और RTGS (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) के बारे में पता ही होगा, लेकिन क्या आपको इन दोनों मनी ट्रांसफर सर्विस, उनके शुल्क और उनके बीच अंतर के बारे में पता है? अगर नहीं तो आज हम आपको इसकी जानकारी देंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम आरटीजीएस और एनईएफटी की सुविधा ग्राहकों को दी है, लेकिन इन दोनों के संचालन में काफी अंतर हैं।

ट्रांजेक्शन का समय: आरटीजीएस में ट्रांजेक्शन सप्ताह के दिनों में सुबह 9 बजे से शाम 4:30 बजे तक और शनिवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक होती है। NEFT में ट्रांजेक्शन सोमवार से शनिवार सुबह 8 बजे से शाम 6:30 बजे तक होती है। प्रत्येक बैंक में समय थोड़ा अलग-अलग भी हो सकता है। एनईएफटी ट्रांजेक्शन समय के मामले में थोड़ी अलग होती हैं, क्योंकि इसमें समय लगता है। दूसरी तरफ आरटीजीएस ट्रांजेक्शन वास्तविक समय में होती हैं। जब आप ट्रांजेक्शन करते हैं तो दूसरे अकाउंट में तुरंत पैसा ट्रांसफर होता है।

लागत और प्रतिबंध: आरटीजीएस बड़ी ट्रांजेक्शन के लिए होता है। इसके जरिए न्यूनतम 2 लाख रुपये और अधिकतम कोई सीमा नहीं है। दूसरी ओर एनईएफटी में न्यूनतम लेनदेन सीमा नहीं है। बैंक अकाउंट वालों के लिए सीमा 10 लाख रुपये प्रति लेनदेन है, जिसमें लेनदेन की संख्या की कोई सीमा नहीं है। वहीं जिनका बैंक अकाउंट नहीं है उनके लिए लिमिट 50,000 रुपये तक है।

आरबीआई के अनुसार, एनईएफटी लेनदेन 10,000 रुपये तक प्रति लेनदेन पर 2.50 रुपये फीस है, 10,000 से 1 लाख के लिए 5 रुपये फीस है, 1 लाख से 2 लाख तक 15 रुपये फीस और 2 लाख से ऊपर के लेनदेन के लिए 25 रुपये फीस है। आरटीजीएस के मामले में 2 लाख से 5 लाख तक लेनदेन के लिए 25-30 रुपये फीस और 5 लाख से ऊपर के लेनदेन के लिए 55-55 रुपये फीस है। वहीं ये चार्ज प्रत्येक बैंक में अलग-अलग हो सकता है।

ये है जरूरी:-

इन पेमेंट सिस्टम को पैसा ट्रांसफर करने के प्रोसेस को तेज और आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। ट्रांसफर करते वक्त ध्यान रखें और सभी जानकारी ठीक से दर्ज करें।

आरटीजीएस ट्रांजेक्शन वास्तविक समय में होती हैं सेटलमेंट आरबीआई के पास दर्ज होता है, इसलिए सभी पेमेंट अंतिम और अपरिवर्तनीय होती हैं। एनईएफटी ट्रांसफर के लिए भी बैंक के ट्रांसफर शुरू करने के बाद पेमेंट को रोकने का कोई ऑप्शन नहीं है। इसलिए छोटी सी गलती भी बड़ा नुकसान कर सकती है।

Posted By: Sajan Chauhan

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