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जानलेवा साबित हो सकती है प्रचंड गर्मी, डायरिया, पेट दर्द और बुखार ऐसे करें बचाव; बच्चों का रखें खास ख्याल

देश का अधिकांश हिस्सा इन दिनों भीषण गर्मी और हीटवेव की तपिश से जल रहा है। भीषण गर्मी के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या अचानक से बढ़ गई है। गर्मी की चपेट में आए कई लोगों की मौत की खबरें आ रही हैं। ऐसे में यदि अपना बचाव करना है तो विशेषज्ञों की राय के मुताबिक अपनी दिनचर्या को बदलना होगा।

By Sunil Tiwari Edited By: Mohit Tripathi Sat, 15 Jun 2024 03:31 PM (IST)
गर्मी और हीटवेव से अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़। (सांकेतिक फोटो)

जागरण संवाददाता, बेतिया। गर्मी बढ़ने के साथ ही कई बीमारियां आम हो गई है। मौसम में परिवर्तन की वजह से विभिन्न बीमारियों के मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। निजी और सरकारी अस्पतालों में पेट दर्द, डायरिया, बुखार और सांस में तकलीफ के मरीज अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं।

डॉक्टर मरीजों के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें गर्मी से बचने व खानपान का विशेष ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं। ओपीडी में हर रोज आने वाले मरीजों में करीब 20 प्रतिशत डायरिया एवं बुखार के मरीज इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। यहां पर मरीजों के आने का हर दिन का आंकड़ा करीब 900 से 1100 तक का है।

सबसे अधिक मेडिसिन विभाग में 250 से 400 तक मरीज पहुंच रहे है। वहीं, मनोरोग में भी करीब 50 से 100 तक हर दिन रोगियों का इलाज किया जा रहा है।

डायरिया और बुखार के मरीजों की भरमार निजी अस्पतालों में भी है। बच्चे जवान और बुजुर्ग सब इसके चपेट में आ रहे है। हालांकि राहत की बात है कि चार से सात दिनों के अंदर मरीज ठीक हो जा रहे हैं।

25 मरीज अस्पताल में भर्ती

मौसम में परिवर्तन की वजह से फिलहाल डायरिया, बुखार और सांस आदि के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुमित कुमार ने बताया कि विगत एक हफ्ते में मरीजों की संख्या में करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 25 से अधिक मरीज भर्ती है। यही स्थिति निजी अस्पतालों की भी है। खाने में इंफेक्शन और सड़क पर उड़ रहे धूल कण इसके मुख्य कारण है।

उन्होंने लोगों को गर्मी से बचने के साथ-साथ साफ सफाई का ध्यान रखने को कहा। भोजन तैयार होने के दो घंटे बाद उसे लेने से मना किया।

उन्होंने कहा कि ताजा भोजन, फल और शुद्ध पानी पीना इस मौसम में जरूरी है। यही बचाव का उपाय है। कारण सबसे अधिक लोग लू लगने और फूड प्वाइजनिंग की वजह से बीमार हो रहे। उन्होंने ठंडा जगह रहने,खूब पानी पीने और ताजा भोजन करने की सलाह दी।

30 में से 15 बीमार बच्चे डायरिया से पीड़ित

शहर के प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर इम्तियाज अहमद ने बताया कि हर 30 में से करीब 15 बच्चे डायरिया से पीड़ित है। जितने बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं उसमें से अधिकांश डायरिया के मरीज हैं। उल्टी, दस्त और बुखार उनकी मुख्य समस्या है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल गर्मी चरम पर है। इसकी वजह से डायरिया का प्रकोप बढ़ा है। हाइजीन मेंटेनेंस नहीं करना इसका मुख्य कारण है। उन्होंने चिकित्सीय सलाह देते हुए कहा कि इन्फेक्शन से बचने के लिए लोगों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बच्चे बीमार ना हो इसके लिए उनके खाने-पीने का खास ख्याल रखना होगा।

डॉक्टर इम्तियाज ने बताया कि फिलहाल मक्खी की संख्या बढ़ी है। वे भोजन एवं पानी को दूषित कर देती है। नतीजतन कुछ ही घंटे बाद खाना खराब हो जाता है। इसलिए बच्चों का खाना तैयार करते समय हाथ को बार-बार धोएं।

दूध पिलाने एवं खाना देने के लिए जिस बर्तन का उपयोग किया जा रहा हो उसकी साफ-सफाई बेहद जरूरी है। पानी को उबालकर दे। छोटे बच्चे को मां का ही दूध देना बेहतर है। दूध पिलाई का उपयोग करने पर उसकी सफाई बेहद जरूरी है।

चार दिन हो गए बुखार नहीं उतर रहा है...

शहर के परबतिया टोला निवासी सुरेश कुमार, बैरिया की मालती देवी ने बताया कि विगत चार दिन से बीमार हैं। जाड़ शरीर में दर्द के साथ बुखार हुआ। दो दिनों तक दवा ली लेकिन कोई राहत नहीं हुई। दस्त और उल्टी होने लगी। उसके पश्चात गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल आए। चिकित्सकों ने उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू की। फिलहाल राहत है।

क्या कहते हैं सिविल सर्जन?

हीटवेब एवं अन्य बीमारियों से निपटने की पूरी तैयारी की गई है। हर स्वास्थ्य केंद्र में दावा उपलब्ध है। स्वास्थ्य केंद्रों को खास निर्देश दिए गए हैं। इसलिए घबराने की बात नहीं है। डायरिया के इलाज के लिए पुख्ता इंतजाम है और इसका लाभ मरीजों को मिल भी रहा है। -डॉ श्रीकांत दुबे, सिविल सर्जन, बेतिया

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