Bihar News: पश्चिम चंपारण के गोवर्धना में खेत में काम कर रहे किसान पर बाघ का हमला, पहुंची वन विभाग की टीम
गोवर्धना थाना क्षेत्र के डुमरी गांव के समीप एक दुखद घटना घटी। खेत में सोहनी करने गए 35 वर्षीय किसान जीतन महतो पर बाघ ने हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल किसान को तुरंत पीएचसी में भर्ती कराया गया जहाँ से उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए रेफर कर दिया गया है। स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

जागरण संवाददाता, बगहा (पश्चिम चंपारण)। Bagha tiger attack: गोवर्धना थाना क्षेत्र के डुमरी गांव के समीप शनिवार की सुबह नौ बजे वीटीआर ( वाल्मीकि टाइगर रिजर्व ) के जंगल से निकले बाघ ने 35 वर्षीय जीतन महतो पर हमला कर दिया। उसके पीठ पर बाघ के पंजे के तीन निशान हैं।
अगल-बगल के खेतों में काम कर रहे लोगों के शोर मचाने पर बाघ जंगल की ओर बाघ निकला। घायल को रामनगर पीएचसी में भर्ती कराया गया है। जहां से उसे बेतिया एमजेके रेफर कर दिया गया। घटना के समय वह मवेशियों के लिए चारा लाने गया था।
फारेस्टर सूर्यकांत ने बताया कि बाघ के पागमार्क मिले हैं। लोगों को खेत में जाने के लिए मना किया गया है। वन विभाग की टीम बाघ की निगरानी कर रही है।
घटना के संबंध में बताया जाता है कि डुमरी गांव से उत्तर दोन जाने वाली सड़क से पश्चिम सरेह में मवेशी के लिए घास काटने गए जीतन पर गन्ने के खेत में छिपे बाघ ने हमला कर दिया। हालांकि जीतन ने बाघ को देखकर भागने की कोशिश की।
जिससे उसके तीन पंजे पीठ पर लगे हैं। जिससे गहरा जख्म हो गया है। एक जांघ पर हल्की खरोच है। शोर सुनकर ग्रामीण पहुंचे तो बाघ जंगल की तरफ भाग गया।
वन विभाग की टीम स्थानीय पीएचसी लेकर पहुंची। जहां मौके पर मौजूद प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ डीएस आर्या ने प्राथमिक उपचार किया। बताया की स्थिति खतरे से बाहर है। पर, बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए जीएमसीएच रेफर किया गया है।
लोकेशन पता कर रही वन विभाग की टीम
बाघ के हमले के बाद गांव के सरेह में वन विभाग के कर्मी बाघ के पगमार्क के आधार पर उसका लोकेशन ढूंढने में लगे हुए हैं । इधर डुमरी गांव के ग्रामीणों में इस हमले के बाद से दहशत है।
लोग अपने खेतों में जाने से डर रहे हैं। वन विभाग के तरफ से भी अभी खेतों की तरफ लोगों को अकेले जाने के लिए मना किया गया है। समूह में ही निकलने की बात कही गई है।
15 अगस्त को भी दिखा था बाघ
बीते 15 अगस्त को भी डुमरी गांव से पश्चिम सरेह में ग्रामीणों को बाघ दिखाई दिया था। इसके बाद वन कर्मी उस क्षेत्र में लोकेशन एवं पग मार्ग चेक करने के लिए पहुंचे थे, लेकिन वन कर्मियों ने इसे अफवाह करार दिया था। जिसके बाद यह हमला हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि वन कर्मियों ने अगर उसी समय तत्परता दिखाई होती। अच्छे तरीके से लोकेशन ट्रैक किया होता तो शायद वीटीआर से निकलकर सरेह में पहुंचे बाघ को उसी समय वापस जंगल में खदेड़ा जा सकता था।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।