कला गुरुओं को 15000, संगत कलाकारों को 7500 और शिष्य को मिलेंगे 3000 रुपये प्रतिमाह, जानें कैसे और कहां मिलेगा मौका
बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री गुरु शिष्य परंपरा योजना शुरू की है जिसका उद्देश्य युवाओं को परंपरागत लोक और शास्त्रीय कलाओं का प्रशिक्षण देना है। इसके तहत गुरुओं को 15 हजार रुपये संगत कलाकारों को 7500 रुपये और शिष्यों को तीन हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। आवेदन 31 अगस्त तक जमा किए जा सकते हैं।

जागरण संवाददाता, बेतिया (पश्चिम चंपारण)। West Champaran News : कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार की ओर से "मुख्यमंत्री गुरु शिष्य परंपरा योजना" की शुरुआत की गई है।
इस योजना का उद्देश्य बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, दुर्लभ एवं विलुप्तप्राय पारम्परिक लोक और शास्त्रीय कलाओं यथा-लोक गाथा, लोक नृत्य, लोक संगीत, लोक वाद्य यंत्र, लोक शास्त्रीय कला, चित्रकला का संरक्षण तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
इसके तहत विशिष्ट गुरुओं के मार्गदर्शन में युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि यह योजना बिहार की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ी को परंपरागत कलाओं में प्रशिक्षित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत चयनित गुरुओं को प्रतिमाह 15 हजार रुपये, संगत कलाकारों को 7500 रुपये तथा शिष्य को तीन हजार रुपये बतौर मानदेय दिया जाएगा। 31 अगस्त तक आवेदन के साथ आवश्यक प्रमाण पत्रों को संलग्न करते हुए, सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, विकास भवन सचिवालय, पटना में स्पीड पोस्ट या हाथों-हाथ जमा करना होगा।
योजना के अंतर्गत पात्रता हेतु अनिवार्य शर्तें:
- गुरु की आयु कम से कम 50 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
- गुरु का मूल निवास बिहार राज्य में होना अनिवार्य है।
- संबंधित विलुप्तप्राय विद्या या कला में न्यूनतम 10 वर्षों का अनुभव होना चाहिए।
- गुरु के पास प्रशिक्षण देने हेतु उपयुक्त स्थान अथवा पृथक प्रशिक्षण केन्द्र की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।
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