संवाद सहयोगी, सोनपुर

समय के बदलते प्रभाव के असर से हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला भी अछूता नहीं है। धर्म-कर्म का स्वरूप तो वही रहा लेकिन मेले का रंग-ढंग बदल गया। पशु बाजारों से हटकर अब यह मेला आटो एक्स्पो मेले का रूप भी लेता जा रहा है। मेले में कार और ट्रैक्टर की एजेंसियों के स्टॉल भी लग रहे हैं। यह मेला गाड़ियों का बाजार भी बनता जा रहा है। पिछले कई वर्षों से इस मेले में कई कंपनियों के शोरूम तथा बिक्री केंद्र यहां खुल रहे हैं।

इनमें कार के अलावा पिकअप वैन, माल वाहक, मिनी बस तथा स्कूल बस की एजेंसी के स्टॉल लग रहे हैं। उधर आटो का एक अलग बाजार है। इसके अतिरिक्त बड़े ट्रैक्टर से लेकर खेती-बारी के काम में आने वाले छोटे ट्रैक्टर भी प्रदर्शन और बिक्री के लिए लाये जाते हैं। पशु प्रधान कहे जाने वाले इस मेले से धीरे-धीरे मवेशी लुप्त होते जा रहे हैं। पहले गाय, फिर भैंस और उसके बाद हाथी। मेले से ये सभी गायब हो गए।

बैलों की संख्या विलुप्ति के कगार पर है। चिड़िया बाजार में चिड़ियों की चहचाहट बंद हो गई है। ऐसे में यह मेला आगे भी अर्थ व्यापार का केंद्र बना रहे इसके लिए जरूरी है कि इसे ऑटोमोबाइल फेयर और ट्रेड फेयर के रूप में विकसित किया जाए। मेला प्रेमियों का मानना है कि अगर मेला अवधि तक के लिए यहां बिक्री के लिए लाई गई कार, जीप, ट्रैक्टर और मालवाहक गाड़ी आदि की खरीदारी पर यहां टैक्स में राहत मिले तो दूरदराज के ग्राहकों और किसानों की इस मेले में आमदरफ्त बढ़ेगी। लोग इन चीजों की खरीदारी यहीं से करेंगे।

Posted By: Jagran

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