Hajipur News: हाजीपुर के विवेक ने छोड़ी नौकरी, खुद का शुरू किया स्टार्टअप, अब दे रहे रोजगार
हाजीपुर के विवेक ने 2010 में वैशाली के छोटे से स्थान दिग्घीकलां में ऑफिस खोलकर आईटी सेक्टर का स्टार्टअप शुरू किया था। अभी उनका यह स्टार्टअप बड़ी आईटी कंपनी का रूप ले चुका है। उनके कंपनी में इस समय 25000 कर्मचारी काम कर रहे हैं। विवेक देशभर में दो लाख से अधिक युवाओं को हुनरमंद बनाकर स्वरोजगार उपलब्ध करा चुके हैं।

रवि शंकर शुक्ला, हाजीपुर। सफल होने के लिए किसी बड़े स्थान की नहीं, सही समय पर सही विचार और योजना की आवश्यकता होती है। अगर इसके साथ शिक्षा-दीक्षा और टीम लीडर के तौर पर कार्य अनुभव हो तो सोने पर सुहागा है।
वैशाली के हाजीपुर सदर प्रखंड के वासुदेवपुर चपुता गांव के किसान पुत्र विवेक कुमार ने यह सिद्ध कर दिखाया है। 2010 में वैशाली के छोटे से स्थान दिग्घीकलां में ऑफिस खोल आईटी सेक्टर का स्टार्टअप शुरू किया, जो आज पूरे देश में फैल चुका है।
यह स्टार्टअप 15 वर्षों में बड़ी आईटी कंपनी का रूप ले चुका है। इसमें अब 25 हजार के करीब कर्मचारी काम करते हैं। नोएडा में विजन इंडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड का प्रधान कार्यालय है। विवेक इस कंपनी के सीईओ हैं।
विवेक ने किया है एमबीए
विवेक बताते हैं कि उनकी प्रारंभिक से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई गांव और हाजीपुर में हुई। पटना के एलएन मिश्रा इंस्टीट्यूट से 1997 में एमबीए किया। इसके बाद अन्य सहपाठियों की तरह औद्योगिक क्षेत्र हाजीपुर स्थित एक फैक्ट्री में नौकरी करने लगे।
फिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की फैक्ट्री में नौकरी की। पुन: एक प्रतिष्ठित कंपनी के बिहार हेड बनकर लौटे। यह करियर का वह मोड़ था, जब वे काफी तेजी से आगे बढ़ रहे थे।
विवेक ने बताया कि देश में आईटी सेक्टर में बड़ी संभावनाओं के द्वार खुले दिख रहे थे, ऐसे में लाखों के पैकेज को छोड़ने का साहस किया और स्वयं का स्टार्टअप शुरू कर दिया।
सफलता अनिश्चित थी, परंतु बाजार की मांग के अनुरूप योजनाबद्ध ढंग से काम करते गए, आईटी क्षेत्र के कई कुशल युवा भी उनके साथ जुड़ गए।
विवेक ने बताया कि इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं में दक्षता की काफी कमी थी, सभी परंपरागत पढ़ाई और सरकारी नौकरी के पीछे भाग रहे थे। ऐसे में युवाओं की रुचि के अनुसार उनके स्किल डेवलपमेंट का कार्य शुरू किया।
अब तक देशभर में दो लाख से अधिक युवाओं को हुनरमंद बनाकर स्वरोजगार उपलब्ध करा चुके हैं। विवेक बताते हैं, वह गांव में ही पले-बढ़े एक किसान के बेटे हैं।
गांव में सुविधाओं के अभाव और गरीबी को स्वयं जिया है। वह गांव के युवाओं की आवश्यकताएं बखूबी जानते हैं।
वह अब नौकरी और स्वरोजगार की चाहत रखने वाले युवाओं को राह दिखा रहे हैं। उनका सपना है कि कोई बेरोजगार नहीं रहे।
गांव के जिस स्कूल में पढ़े, उसके बगल में खोला ट्रेनिंग सेंटर
- देश के विभिन्न राज्यों में युवाओं को हुनरमंद बनाने में जुटे विवेक ने अब अपने गांव का रुख किया है।
- गांव के जिस प्राथमिक विद्यालय में उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की, उसके बगल में ही करोड़ों की लागत से विशाल भवन का निर्माण करा ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की है।
- इसी फरवरी माह में हाजीपुर के विधायक अवधेश सिंह ने वहां रोजगार मेला का शुभारंभ किया।
- मौके पर 203 युवाओं को विभिन्न पदों पर नौकरी दी गई। विवेक ने गांव-समाज के युवाओं को हुनरमंद बनाने का दायित्व छोटे भाई मुन्ना को सौंपा है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में किया सॉफ्टवेयर सपोर्ट
विवेक की कंपनी ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में सॉफ्टवेयर सपोर्ट किया है। साथ ही इस योजना के तहत वे इच्छुक लोगों को हुनरमंद बनाने में भी जुटे हुए हैं।
कुशल युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में देश के विभिन्न राज्यों में उनकी कंपनी केंद्र और राज्य सरकारों की मदद से काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा स्वरोजगार करने वाले उद्यमियों की सुविधा के लिए शीघ्र ही ई-मार्केटिंग पोर्टल लांच करने की तैयारी है।
प्रशिक्षण के क्रम में भी इस पोर्टल के संबंध में युवाओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उन्हें आगे चलकर दिक्कत नहीं हो।
कंपनी में काम करने वाले कर्मियों को उनकी योग्यता के अनुरूप आकर्षक वेतन के साथ ही पीएफ और ईएसआई समेत अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। अन्य सभी कर्मियों का वेतन उनकी योग्यता और पद के अनुरूप है।
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