योग दिवस:::::::: शरीर, मन और भावना को संतुलित रखता है योग
जागरण संवाददाता सुपौल योग को व्यायाम या सिर्फ एक वर्ग विशेष के लिए पूजा-पाठ की पद्धति के रूप
जागरण संवाददाता, सुपौल: योग को व्यायाम या सिर्फ एक वर्ग विशेष के लिए पूजा-पाठ की पद्धति के रूप में देखना संकीर्ण दृष्टिकोण का परिचायक है। हमें ज्ञान एवं अहंकार से ऊपर उठकर योग को एक संपूर्ण विज्ञान की तरह देखना चाहिए। वैसे भी योग की पौराणिक मान्यता है कि इससे अब तक न सिर्फ जागृत होते हैं, बल्कि निरंतर प्राणायाम अभ्यास से जन्मांतर के पापों का विनाश होता है। यह कहना है योग प्रचारिका ऋतंभरा भारती का। वे 21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर दैनिक जागरण से बोल रही थीं। कहा कि व्यवहारिक स्तर पर योग करने से शरीर मन और भावना को संतुलन और आपसी तालमेल बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे व्यक्ति को विराट बनने या समग्र रूप से स्वयं को रूपांतरित, विकसित करने का आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है। योग मनुष्य की क्षमता और ममता को मजबूती प्रदान करता है। यह एक प्रकार का शारीरिक व्यायाम ही नहीं जीवात्मा का परमात्मा से पूर्णतया मिलन है। योग शरीर को तो स्वस्थ रखता ही है। इसके साथ-साथ मन और दिमाग को भी एकाग्र रखने में अपना योगदान देता है, जिससे मनुष्य के अंदर नए-नए सकारात्मक विचारों की उत्पत्ति होती है और मनुष्य को गलत प्रवृत्ति में जाने से रोकता है। इतना ही नहीं योग मन और दिमाग की शुद्धता को बाहर निकाल कर फेंक देता है और चेतना को मजबूती प्रदान करता है। असल में कहा जाए तो योग जीवन जीने का एक माध्यम है।
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