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सुपौल में बिना वैध कागजात चल रहा था अल्ट्रासाउंड सेंटर, जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने विजय अल्ट्रासाउंड किया सील

Published: Wed, 14 Oct 2026 08:08 AM (IST)

सुपौल के त्रिवेणीगंज में स्वास्थ्य विभाग ने अवैध रूप से संचालित विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापा मारा और उसे सील कर दिया।

सुपौल के त्रिवेणीगंज में स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी के दौरान सील किया गया विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर।

सुपौल के त्रिवेणीगंज में स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी के दौरान सील किया गया विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर।

HighLights

  1. त्रिवेणीगंज में विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापा।

  2. अवैध संचालन, बिना पंजीकरण, डॉक्टर अनुपस्थित पाए गए।

  3. स्वास्थ्य विभाग ने सेंटर को तत्काल प्रभाव से सील किया।

संवाद सूत्र, त्रिवेणीगंज (सुपौल)। Supaul Sealed Health Center: सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज शहर में अवैध रूप से संचालित हो रहे अल्ट्रासाउंड सेंटरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई लगातार तेज हो गई है।

इसी क्रम में मंगलवार की शाम अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उमेश कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य प्रबंधक एस. अदीब अहमद और स्थानीय पुलिस बल की मौजूदगी में एक जांच टीम ने अस्पताल चौक स्थित विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर पर औचक छापेमारी की।

इस दौरान जांच टीम को सेंटर का मुख्य संचालक मौके पर अनुपस्थित मिला, जिसके बाद टीम ने सेंटर की गहन और विस्तृत जांच की, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से सेंटर को सील करने की कार्रवाई की।

अस्पताल चौक पर औचक छापेमारी और सील करने की कार्रवाई

स्वास्थ्य विभाग को लंबे समय से त्रिवेणीगंज में अवैध और बिना मानकों के संचालित हो रहे जांच केंद्रों की शिकायतें मिल रही थीं। इसी के मद्देनजर मंगलवार की शाम अनुमंडलीय

अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उमेश कुमार और स्वास्थ्य प्रबंधक एस. अदीब अहमद ने पुलिस बल के साथ मिलकर अस्पताल चौक स्थित विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर पर औचक धावा बोला। अचानक हुई इस कार्रवाई से आसपास के अन्य अवैध संचालकों में हड़कंप मच गया और कई लोग अपनी दुकानें बंद कर खिसक गए।

मौके पर संचालक की अनुपस्थिति और भाई की मौजूदगी

जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर पर प्रवेश किया, तो वहां मुख्य संचालक मौके पर मौजूद नहीं मिला। छानबीन करने पर वहां उसका भाई उपस्थित पाया गया।

अधिकारियों ने जब संचालक से संपर्क करने या मौके पर बुलाने को कहा, तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। टीम ने संचालक की गैर-मौजूदगी में ही वहां मौजूद अन्य कर्मियों और परिजनों के सामने सेंटर के कागजातों की पड़ताल शुरू की।

वैध पंजीयन, अनुमति और कागजातों का पूर्ण अभाव

जांच के दौरान सबसे बड़ी खामી यह सामने आई कि सेंटर के संचालन से संबंधित कोई भी वैध पंजीयन (रजिस्ट्रेशन), सरकारी अनुमति पत्र या अन्य जरूरी कानूनी कागजात प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जब दस्तावेजों की मांग की, तो संचालक के पास ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जो यह सिद्ध कर सके कि सेंटर का संचालन नियमानुसार कानूनी रूप से वैध है।

विशेषज्ञ चिकित्सक न मिलने पर स्वास्थ्य महकमे की सख्ती

नियमों के अनुसार किसी भी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर मरीजों की जांच के लिए योग्य और मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ चिकित्सक का होना अनिवार्य है। लेकिन छापेमारी के वक्त सेंटर पर कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था।

केवल बाहर लगे बोर्ड पर 'डॉ. विजय' का नाम अंकित पाया गया, लेकिन मौके पर डॉक्टर की अनुपस्थिति और कोई डिग्रीधारक चिकित्सक न मिलने से मरीजों की जान से खिलवाड़ का मामला स्पष्ट हो गया।

उपाधीक्षक का बयान और आगे की कानूनी प्रक्रिया

इस पूरी कार्रवाई के संबंध में अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उमेश कुमार ने बताया कि औचक जांच के दौरान सेंटर संचालित पाया गया था, लेकिन न तो संचालक मिला और न ही कोई वैध कागजात या डॉक्टर मौजूद थे।

सभी गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए तत्काल प्रभाव से सेंटर को सील कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे ऐसे अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ भी अभियान लगातार जारी रहेगा।

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"विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर की जांच की गई थी जहाँ संचालन से संबंधित कोई वैध कागजात या विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिले। प्रथम दृष्टया अनियमितता मिलने पर सेंटर को सील कर दिया गया है और मामले में अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है।"

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— डॉ. उमेश कुमार, उपाधीक्षक (अनुमंडलीय अस्पताल, त्रिवेणीगंज, सुपौल)