अंगूठे से दस्तखत तक का सफर, मुंगेर की खुशी ने 50 से अधिक महिलाओं को सिखाया लिखना-पढ़ना, जगाई आत्मनिर्भरता की अलख
मुंगेर के गोविंदपुर गांव में खुशी कुमारी ने 2024 से साक्षरता अभियान चलाकर 50 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया ...और पढ़ें
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महिलाओं को साक्षर कर आत्मनिर्भर बनातीं खुशी कुमारी. जागरण
HighLights
खुशी कुमारी ने मुंगेर में 50 से अधिक महिलाओं को साक्षर बनाया।
महिलाएं अब बैंक व सरकारी काम स्वयं कर रही हैं।
बच्चों की शिक्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
शशिकांत, धरहरा (मुंगेर)। कभी जिन हाथों को कलम पकड़ने में झिझक महसूस होती थी और जो महिलाएं बैंक या सरकारी दफ्तरों में कागजों पर अंगूठा लगाने को मजबूर थीं, वे अब पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने नाम के दस्तखत गढ़ रही हैं।
यह सुखद और दूरगामी बदलाव किसी बड़े शहर या चमक-दमक वाले संस्थान से नहीं, बल्कि मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड स्थित महगामा पंचायत के गोविंदपुर गांव में आकार ले रहा है। इस सामाजिक बदलाव की अलख जगाने वाली सूत्रधार हैं हिंदी विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहीं गांव की ही होनहार बेटी खुशी कुमारी।
वर्ष 2024 से शुरू हुई उनकी साक्षरता मुहिम अब तक 50 से अधिक महिलाओं के जीवन में अक्षर ज्ञान और उजाला बिखेर चुकी है। खुशी कुमारी राज्य सरकार से पंजीकृत सामाजिक संस्था 'आई सक्षम' से जुड़कर गांव-गांव जाकर उन महिलाओं को साक्षर बना रही हैं, जो सामाजिक और आर्थिक विषमताओं के कारण बचपन में शिक्षा से वंचित रह गई थीं।
एक घंटे की अनूठी पाठशाला से टूटी झिझक; बैंक और जीविका के कामों में बढ़ी सहूलियत
खुशी ने सबसे पहले अनुसूचित जाति, जनजाति और अतिपिछड़ा वर्ग की उन महिलाओं को एक मंच पर जोड़ा, जिन्हें रोजमर्रा के प्रशासनिक व वित्तीय कामों में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

सप्ताह में कई दिन किसी घर के दरवाजे या पेड़ की छांव में महिलाओं का समूह जुटता है और करीब एक घंटे की चौपाल पाठशाला में पढ़ाई-लिखाई का सिलसिला शुरू होता है। शुरुआत में महिलाओं को कलम पकड़ने में संकोच हुआ, लेकिन निरंतर अभ्यास से यह झिझक दूर हो गई।
आज बिकिनी देवी, साबुजा देवी, कल्पना देवी, सावित्री देवी, राम सखी देवी और सुजाता देवी जैसी दर्जनों महिलाएं स्वयं अपने नाम के हस्ताक्षर कर रही हैं। इससे बैंकों में लेनदेन, जीविका से जुड़े कार्यों और सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरने में उनकी दूसरों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो गई है।
मां साक्षर हुईं तो बच्चों में बढ़ा पढ़ाई का रुझान; खेलकूद के माध्यम से शिक्षा से जुड़ाव
खुशी कुमारी की यह सकारात्मक पहल केवल महिलाओं को साक्षर करने तक ही सीमित नहीं है। वह गांव के उन छोटे बच्चों को भी अपनी पाठशाला में बैठाती हैं, जो किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पाते थे।
खेलकूद, चित्रकारी और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में प्रारंभिक शिक्षा दी जा रही है। जब घर की महिलाएं स्वयं पढ़ने-लिखने लगीं, तो इसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव उनके परिवारों पर भी दिखाई देने लगा है।
अब ये महिलाएं अपने बच्चों के भविष्य और शिक्षा को लेकर अधिक सजग हैं और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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