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मिठाई की दुकान से चीन तक गूंजी सुपौल की बेटी की धाक, अंशु ने संभाली भारतीय रग्बी टीम की कप्तानी, चोट भी नहीं तोड़ सकी हौसला

Published: Sun, 11 Oct 2026 09:49 AM (GMT+05:30)

सुपौल की अंशु ने रग्बी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। पिता की मिठाई की दुकान ...और पढ़ें

देश का मान बढ़ाने वाली सुपौल के निर्मली गांव की होनहार खिलाड़ी अंशु

देश का मान बढ़ाने वाली सुपौल के निर्मली गांव की होनहार खिलाड़ी अंशु

HighLights

  1. मिठाई विक्रेता की बेटी अंशु ने रग्बी में बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान।

  2. भारतीय रग्बी टीम की कप्तानी की, कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते।

  3. गंभीर चोट के बाद भी मैदान में वापसी के लिए संकल्पित।

सुनील कुमार, सुपौल। यदि हौसलों में उड़ान हो और कुछ कर गुजरने का अटूट जज्बा हो, तो तंगहाली भी राह का रोड़ा नहीं बन सकती। इस बात को पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत निर्मली गांव की बेटी अंशु ने।

एक छोटी सी मिठाई की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले पिता पवन कुमार साह ने अपनी बेटी को कभी आर्थिक तंगी का अहसास नहीं होने दिया।

पिता के त्याग और अपनी निरंतर मेहनत के दम पर रग्बी के इस उभरते सितारे ने न केवल बिहार बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।

  • सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत निर्मली गांव निवासी मिठाई विक्रेता पवन कुमार साह की बेटी अंशु ने रग्बी में बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

  • अब तक 12 राष्ट्रीय और 3 अंतरराष्ट्रीय रग्बी प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व; राजगीर में एशिया अंडर-20 चैंपियनशिप में जीता कांस्य

  • चीन के होह्होट में आयोजित एशिया रग्बी अंडर-18 चैंपियनशिप में निभाई भारतीय टीम के कप्तान की भूमिका

  • चोटिल होने के बाद पैर का हुआ सफल ऑपरेशन; डॉक्टरों की 18 महीने की विश्राम सलाह के बाद दोबारा मैदान में उतरने को संकल्पित

अंशु ने एथलेटिक्स से अपने खेल जीवन की शुरुआत की थी, लेकिन 27 मई 2022 को उन्हें पहली बार सुपौल जिले की रग्बी टीम में बतौर रिजर्व खिलाड़ी शामिल किया गया, जहां से उनकी तकदीर बदल गई।

एथलेटिक्स से रग्बी का सफर; ताइपे से लेकर राजगीर तक भारत को दिलाए पदक

नवादा में आयोजित एक मैच के दौरान मुख्य खिलाड़ी के चोटिल होने पर अंशु को खेलने का मौका मिला। इसके बाद उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें राज्य और फिर राष्ट्रीय टीम में चुन लिया गया।

ओडिशा में कड़े प्रशिक्षण के बाद उन्होंने भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की की। वर्ष 2023 में चीनी ताइपे में आयोजित 'एशियाई अंडर-18 रग्बी 7s चैंपियनशिप' में भारतीय टीम को सिल्वर मेडल दिलाने में अंशु की अहम भूमिका रही।

इसके बाद राजगीर में आयोजित 'एशिया रग्बी अंडर-20 चैंपियनशिप 2025' में उज्बेकिस्तान को 12-5 से हराकर भारत को कांस्य पदक दिलाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

चीन में भारतीय टीम की कप्तानी और चोट की चुनौती; 18 महीने बाद मैदान में वापसी का संकल्प

अंशु की खेल प्रतिभा, नेतृत्व क्षमता और निरंतर बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 13-14 सितंबर 2025 को चीन के होह्होट में आयोजित 'एशिया रग्बी एमिरेट्स अंडर-18 चैंपियनशिप' में भारतीय टीम की कप्तानी की कमान सौंपी गई।

हालांकि, प्रतियोगिता के दौरान पैर में गंभीर चोट लगने के कारण वह चोटिल हो गईं। सफल ऑपरेशन के बाद उनके पैर में रॉड लगाई गई है और डॉक्टरों ने उन्हें 18 महीने के संपूर्ण आराम की सलाह दी है।

इसके बावजूद अंशु का हौसला जरा भी कम नहीं हुआ है और वह आराम की अवधि पूरी करने के बाद एक बार फिर पूरे दमखम के साथ मैदान में वापसी कर देश का मान बढ़ाने के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं।

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