पीएम मोदी के 'मन की बात' से मिली प्रेरणा, मुंगेर की प्रीति ने आटा मिल से बदली तकदीर, एक दर्जन महिलाओं को दे रहीं रोजगार
मुंगेर की प्रीति कुमारी ने 2022 में छोटे स्तर पर आटा मिल का कारोबार शुरू कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश ...और पढ़ें

मुंगेर के जमालपुर में आटा मिल का सफल संचालन कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करतीं महिला उद्यमी प्रीति कुमारी
HighLights
प्रीति कुमारी ने 2022 में आटा मिल व्यवसाय शुरू किया।
PMRGP ऋण से मुंगेर, भागलपुर तक फैला कारोबार।
ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार, बनीं आत्मनिर्भर।
हैदर अली, जागरण, मुंगेर। सपनों को हकीकत में बदलने के लिए अटूट हौसले और दृढ़ संकल्प की जरूरत होती है, और इस बात को जमालपुर प्रखंड के फरदा गांव की रहने वाली प्रीति कुमारी ने पूरी तरह साबित कर दिखाया है।
वर्ष 2022 में बेहद छोटे स्तर पर आटा मिल का कारोबार शुरू करने वाली प्रीति आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। उनकी मेहनत और दूरदर्शिता का परिणाम है कि आज उनकी मिल का शुद्ध आटा मुंगेर जिले के साथ-साथ लखीसराय, भागलपुर और खगड़िया तक के बाजारों में अपनी पहुंच बना चुका है।
मुंगेर जिले के जमालपुर प्रखंड के फरदा गांव निवासी प्रीति कुमारी ने वर्ष 2022 में छोटे स्तर पर शुरू किया था आटा मिल का कारोबार
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) और जिला उद्योग विभाग से मिले 11 लाख के ऋण व पारिवारिक सहयोग से कारोबार को दी उड़ान
मुंगेर के अलावा लखीसराय, भागलपुर और खगड़िया तक पहुंच रहा मिल का आटा; एक दर्जन से अधिक महिला-पुरुषों को मिला रोजगार
नीलम देवी, पूनम देवी और सुनीता जैसी ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा प्रतिदिन 300 से 400 रुपये तक का पारिश्रमिक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' से गहरे रूप से प्रेरित होकर प्रीति ने उद्यमी बनने और खुद कुछ नया करने का साहसिक निर्णय लिया था।
सरकारी ऋण और परिवार के सहयोग से संवारी तकदीर; 5 से 20 किलो के पैकेट में हो रही पैकिंग
कारोबार को पटरी पर लाने के सफर के बारे में प्रीति ने बताया कि दिसंबर 2022 में उन्हें जिला उद्योग विभाग की ओर से 11 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ था। इसके बाद व्यवसाय के विस्तार के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत मिलने वाले ऋण और सब्सिडी का भी पूरा लाभ उठाया।
इस कार्य में उनके परिवार ने भी करीब 17 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी। शुरुआती दौर में कई प्रकार की चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने ग्राहकों की मांग और गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए काम जारी रखा। धीरे-धीरे व्यवसाय बढ़ता गया और अब उनकी मिल में 5, 10 और 20 किलोग्राम के आकर्षक पैकेटों में आटा तैयार कर बाजार में भेजा जाता है।
ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल; बच्चों को दिलाई उच्च शिक्षा
प्रीति की इस पहल से केवल उनका परिवार ही नहीं, बल्कि आसपास की कई महिलाओं के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। उनकी मिल में काम करने वाली नीलम देवी, पूनम देवी, कुंती कुमारी, सुनीता कुमारी और शीला कुमारी जैसी ग्रामीण महिलाओं को अपने ही गांव में रोजगार का अवसर मिल गया है, जिससे उन्हें प्रतिदिन 300 से 400 रुपये तक की कमाई हो जाती है।
प्रीति ने अपनी व्यावसायिक सफलता के बल पर बैंक ऋण का 90 प्रतिशत हिस्सा और परिवार से ली गई राशि भी चुकता कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने अपने बेटे राघव को इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कराई और बेटी रिया को जीएनएम कोर्स कराया है।
उनकी यह प्रेरणादायक कहानी साबित करती है कि सरकारी योजनाओं और दृढ़ इच्छाशक्ति से महिलाएं परिवार व समाज दोनों की तस्वीर बदल सकती हैं।
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