बिहार के इतिहास की बच्चों को दी जानकारी
सुपौल। वैसे तो बिहार को बंगाल से अलग करना अंग्रजों की मजबूरी थी।
सुपौल। वैसे तो बिहार को बंगाल से अलग करना अंग्रजों की मजबूरी थी। परन्तु उससे कहीं ज्यादा बिहार के तत्कालीन ईमानदार नेताओं द्वारा शुरू किया गया अभियान था। इस अभियान ने आंदोलन का रूप ले लिया। इसके बाद 1912 में बिहार नामक एक अलग प्रांत भारत के मानचित्र पर उदित हुआ। बिहार दिवस के मौके पर बच्चों को बिहार प्रांत के गठन एवं इसके इतिहास से रूबरू कराते हुए सेवानिवृत प्रधानाध्यापक सुरेश चन्द्र मिश्र ने कहा कि 22 मार्च 1912 को ब्रिटिश इंडिया के गवर्नर लार्ड हार्डिंग्स ने सम्राट जार्ज पंचम के निर्देशानुसार बंगाल, बिहार, और उड़ीसा तथा असम प्रांत के गठन की अधिसूचना जारी की थी। कोलकाता से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र अमृत बा•ार के 23 मार्च 1912 के अंक में नए प्रांतों के गठन की विस्तृत खबर प्रकाशित की थी। जिसकी प्रति कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी में आज भी सुरक्षित है। इसके अनुसार भारतीय परिषद् अधिनियम 1861 की अनुसूची ख'' के अंतर्गत नियम कानून शांति एवं अनुशासन के उद्देश्य से बंगाल के फोर्ट विलियम प्रांत से बिहार, उड़ीसा और असम प्रांत का गठन किया गया। इसे 1 अप्रैल 1912 से प्रभावी होने की घोषणा की गई थी। श्री मिश्र ने बताया कि सर चार्ल्स स्टुअर्ट वेली को संयुक्त बिहार और उड़ीसा प्रांत जिसका एकीकृत नाम बिहार था को प्रथम लेफ्टिनेंट गवर्नर जनरल नियुक्त किया गया। अधिनियम के अनुसार बिहार को पांच प्रमंडलों में बांटा गया। ये प्रमंडल भागलपुर, पटना, तिरहुत, छोटानागपुर और उड़ीसा प्रमंडल थे। उन्होंने बताया कि बिहार को अपने वर्तमान स्वरूप प्राप्ति हेतु तीन बार विभाजन के दौर से गुजरना पड़ा। पहली बार 1 अप्रैल 1936 को उड़ीसा प्रमंडल को बिहार से अलग कर उड़ीसा नामक प्रांत का गठन किया गया। दूसरी बार 01 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन की सिफारिश पर बिहार के पुरुलिया जिला और पूर्णिया जिले के इस्लामपुर को पश्चिम बंगाल में मिला दिया गया। फिर तीसरी बार 15 नवंबर 2000 को बिहार के खनिज एवं वन संपदा से संपन्न 18 जिलों को मिलाकर झारखंड राज्य बनाया गया। तबसे लेकर आजतक बिहार अपने वर्तमान स्वरूप के साथ विकास की राह पर अग्रसर है।
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