सिवान में बच्चों की सुरक्षा के साथ हो रहा खिलवाड़, अधिकांश स्कूल बसों में नहीं लगे हैं जीपीएस व सीसी कैमरें
सिवान में स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। सरकार के आदेशानुसार बसों में जीपीएस सीसी कैमरा और स्पीड गवर्नर अनिवार्य हैं लेकिन कई स्कूल प्रबंधन नियमों का पालन नहीं कर रहे। ऑटो और ई-रिक्शा जैसे असुरक्षित वाहनों का उपयोग किया जा रहा है साथ ही अन्य सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी हो रही है।

जागरण संवाददाता, सिवान। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा स्कूल बसों में जीपीएस, सीसी कैमरा और स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य किया गया है। लेकिन स्कूल प्रबंधनों व संचालकों द्वारा परिवहन विभाग के नियमों को ताक पर रखकर न तो आदेशों का पालन हीं किया जा रहा है बल्कि उनकी जान के साथ खिलवाड़ भी किया जा रहा है।
जिला परिवहन विभाग की मानें तो स्कूल वाहन के तौर पर सभी प्रकार के वाहनों का उपयोग नहीं किया जा सकता है। इसके लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की गई है। इसमें सबसे प्रमुख है कि स्कूल प्रबंधन या उनके प्रधानाचार्य या निदेशक या स्कूल के किसी अन्य पदाधिकारी के नाम पर वाहन का निबंधन होना चाहिए।
दूसरा निजी ऑपरेटर या विद्यालय प्रबंधन के बीच समझौते के तहत किराया या लीज पर संचालित वाहन होना चाहिए। या फिर अन्य वाहन जो विद्यालय या अभिभावक की सहमति से किसी विद्यालय के छात्र-छात्राओं काे नियमित स्कूल पहुंचाने और फिर उन्हें घर तक लाने का काम कर रहे हों।
इन्हीं तीन श्रेणियों के वाहन का प्रयोग विद्यालय वाहनों के लिए किया जा सकता है। जबकि नियमों की अनदेखी करते हुए ऑटो, ई-रिक्शा, मारुती वैन सहित अन्य वाहनों का उपयोग स्कूल वाहन के रूप में भी किया जा रहा है।
इन नियमों का भी नहीं हो रहा अनुपालन
गाइडलाइन के अनुसार स्कूल बसों की बाडी सुनहरे नीले रंग की होनी चाहिए। जबकि कुछ विद्यालयों को छोड़ दें तो अधिकांश निजी विद्यालयों द्वारा इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है। इन विद्यालय प्रबंधनों द्वारा किसी भी तरह के वाहनों का उपयोग बच्चों को स्कूल लाने व उन्हें घर तक छोड़ने के लिए किया जा रहा है।
इसके अलावा वाहनों में पैनिक बटन लगाने के साथ रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप लगाना अनिवार्य है। जबकि अधिकांश स्कूल बसों में इसका भी अनुपालन नहीं हो रहा है। वाहन का जीपीएस युक्त होना चाहिए और सभी वाहनों में प्राथमिक चिकित्सा बाक्स रखा जाना अनिवार्य है।
वहीं, वाहनों में तो जीपीएस लगाने की बात दूर है, जबकि बस नाम मात्र के फर्स्ट एड बाक्स रखा रहता है। वाहनों में अग्निशमन यंत्र लगाना जरूरी है, लेकिन बड़े स्कूल वाहनों में यह सुविधा देखने को मिल भी जाता है, लेकिन छोटे वाहनों में यह उपलब्ध नहीं है।
स्कूृल बस में सीसी कैमरा लगा होना चाहिए, जिसके फुटेज को 60 दिन तक संरक्षित रखा जाना अनिवार्य है। जबकि किसी भी स्कूल बस में सीसी कैमरा हीं लगाया गया है। स्कूल वाहनों में स्पीड गर्वनर लगाना अनिवार्य है, वहीं वाहन की गति सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटा होना चाहिए। जबकि बड़े वाहनों में यह सुविधा लगाई गई है, जबकि छोटे वाहन इससे अभी भी अछूते हीं हैं।
क्या कहते हैं पदाधिकारी
सभी स्कूल वाहनों के लिए जारी किए गए गाइडलाइन का अनुपालन अनिवार्य रूप से करना होगा। विभागीय निर्देश के आलोक में इसकी समय-समय पर जांच भी की जाती है। - अर्चना कुमारी, एडीटीओ, सिवान
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