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    जब भी संकट का घेरा होता है, हनुमान का पहरा होता है..

    By JagranEdited By:
    Updated: Sat, 16 Apr 2022 11:53 PM (IST)

    सीतामढ़ी। नगर के महावीर स्थान स्थित सिद्धपीठ दक्षिणमुखी श्री हनुमान मंदिर में तीन दिवसीय श्री हनुमान जन्मोत्सव के तीसरे व अंतिम दिन चैत्र पूर्णिमा शनिवार की सुबह में मां जानकी जन्म भूमि हनुमानमय हो गई।

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    जब भी संकट का घेरा होता है, हनुमान का पहरा होता है..

    सीतामढ़ी। नगर के महावीर स्थान स्थित सिद्धपीठ दक्षिणमुखी श्री हनुमान मंदिर में तीन दिवसीय श्री हनुमान जन्मोत्सव के तीसरे व अंतिम दिन चैत्र पूर्णिमा, शनिवार की सुबह में मां जानकी जन्म भूमि हनुमानमय हो गई। सुबह सबसे पहले मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित तेजपाल शर्मा व पंडित मुन्ना शर्मा द्वारा हनुमानजी का महाभिषेक किया गया। फिर हनुमान प्रभु के दर्शन, महाआरती एवं प्रसाद का भोग लगाया गया, उसके बाद भारी संख्या में हनुमान भक्तों ने श्री हनुमते नम: महामन्त्र के जाप के साथ पूजा अर्चना की। पूजा पाठ के बाद महाआरती का आयोजन के साथ अखंड ज्योत पूरी हुई। इसके पूर्व देर रात्रि में पंडित लालबाबू शर्मा ने हनुमानजी की ज्योति प्रज्ज्वलित की और भक्तों ने क्रमबद्ध होकर ज्योति में आहुति देकर हनुमानजी का आशीर्वाद लिया। इसी के साथ सुमधुर संगीत में भजन कीर्तन की शानदार प्रस्तुति हुई। इस अवसर पर दक्षिणमुखी श्री हनुमानजी का हजारों फूल - मालाओं से श्रृंगार किया गया और मंदिर परिसर में सजावट से हनुमान जी की मनोहारी छवि नजर आ रही थी। बाहर से आएं कलाकारों ने सुमधुर भजन कीर्तन के साथ रात भर जागरण किया। कलाकारों द्वारा मीठे भजन में अंजनी मां के हुयो लाल बधाई सारे भक्ता ने , जब जब भी संकट का मुझ पर घेरा होता है, मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा होता है , तेरे सीने में बसे रघुराई बजरंग बली , आदि बोल पर श्रद्धालु भाव - विभोर होकर झूमते नजर आए। भावपूर्ण भजन गायन से मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं के मन के भाव व चित्त हनुमानमय हो गए थे। भजन के साथ जहां श्री हनुमान मंदिर में भक्ति की रसधारा बहती रही, वही, जय सियाराम के जयकारे से पूरा वातावरण गुंजायमान होता रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्त्री, पुरुष व बच्चे सहित हनुमान भक्त उपस्थित थे। कार्यक्रम का श्री दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के मीडिया प्रभारी राजेश कुमार सुंदरका ने कहा कि श्री हनुमान भक्त मंदिर आने पर सबसे पहले हनुमानजी महाराज की अखंड ज्योत की पूजा कर आशीर्वाद लेते, उसके बाद भजन की सुर लहरी में शामिल हो जाते थे।

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