Muzaffarpur News: बागमती नदी का बढ़ रहा जलस्तर, बाढ़ नियंत्रण के लिए हुआ कमेटी का गठन
मेजरगंज के रसूलपुर गांव में बागमती नदी में कटाव हो रहा है, जिसके मद्देनजर प्रशासन बाढ़ नियंत्रण के लिए सक्रिय हो गया है। बीडीओ की अध्यक्षता में हुई बैठाक में कटाव निरोधी कार्य की निगरानी के लिए एक संयुक्त कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी कटाव स्थल का निरीक्षण करने के साथ बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दे रही है।

बागमती नदी का बढ़ रहा है जलस्तर।
जागरण, मेजरगंज। प्रखंड के रसूलपुर गांव में बागमती नदी से कटाव हो रहा है। हालांकि, कटाव स्थल पर कटाव निरोधी कार्य भी कराया जा रहा है। इधर संभावित बाढ़ के मद्देनजर प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है।
इस संदर्भ में मेजरगंज प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में बाढ़ आपदा एवं उसके नियंत्रण को लेकर बीडीओ चंदन कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इसमें बाढ़ नियंत्रण को लेकर विमर्श किया गया।
सीओ विनीता ने बताया कि बाढ़ नियंत्रण के लिए एक संयुक्त कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी में प्रियंका कौशिक वरीय उप समाहर्ता,अंचल अधिकारी विनीता, नूपुर सिंहासिनी, राजपुताना राइफल्स के कमांडेंट रुद्र प्रताप एवं जनप्रतिनिधि शामिल हैं।
टीम के सदस्यों ने रसूलपुर में कटाव स्थल का निरीक्षण किया तथा कटाव निरोधी कार्य करा रहे संवेदक को आवश्यक दिशा निर्देश दिया। आपदा नियंत्रण के लिए आपदा मित्र द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बोतल एवं थर्मोकोल की सहायता से लाइफ जैकेट बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
बाढ़ के समय आपात स्थिति से निपटने के लिए नाव उपलब्ध कराने को लेकर जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। सीओ ने बताया कि उक्त कमेटी द्वारा रसूलपुर में कटाव स्थल का निरीक्षण किया गया है।
वहीं, बागमती परियोजना द्वारा बंबू पाइलिंग की बैरिकेडिंग कर बोरी में बालू डालकर कटाव रोकने का उपाय हो रहा है। इसमें तेजी लाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि कटाव नियंत्रण को लेकर बोल्डर पायलिंग की जरूरत है, जो संभवतः अगले वर्ष से शुरू हो पाएगी।
मौके पर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर ललित कुमार, बीपीआरओ विशाल राव, मुखिया राघवेंद्र कुमार सिंह, सोहन पासवान, राजू स्वर्णकार, ओमप्रकाश साह, केशव सिंह, धर्मेंद्र यादव, विवेक सिंह, प्रखंड समन्वयक एवं सभी राजस्व कर्मचारी शामिल थे। पिछले साल आई प्रलयकारी बाढ़ में दर्जनों घर बह गए थे।
सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि बागमती की धारा में समाहित हो गई थी। दर्जनों परिवार घर से बेघर होकर विद्यालय एवं अपने सगे-संबंधियों के यहां पनाह ली थी। बीते तीन साल में बाढ़ से अभी तक तीन सौ एकड़ से अधिक फसल नदी में विलीन हो गई है। वहीं, 35 घर बागमती नदी की भेंट चढ़ चुके हैं।
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