लड़कियों के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और लोगों के बीच बराबरी का दर्जा
सीतामढ़ी। राष्ट्रीय बालिका दिवस को सबने अपने अंदाज में मनाया। बेटियों ने अपने लिए मांगी सुरक्षा

सीतामढ़ी। राष्ट्रीय बालिका दिवस को सबने अपने अंदाज में मनाया। बेटियों ने अपने लिए मांगी सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और लोगों के बीच बराबरी का दर्जा। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर बेटी को आत्मनिर्भर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता सबको दोहराना चाहिए। पीएम नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' को देश ने जन अभियान बनाया, जिससे विद्यालयों में बेटियों के नामांकन में बढ़ोतरी और लिगानुपात में अभूतपूर्व सुधार हुआ। वैसे इस बात पर प्रसन्नता भी जताई कि अब हालात धीरे-धीरे ही सही बदल रहे हैं मगर, इसमें अभी मीलों चलना बाकी है। लिगानुपात में सीतामढ़ी ने अन्य जिलों के लिए आदर्श पेश किया है। भारत सरकार द्वारा नेशनल फैमिली हेल्प सर्वे में सीतामढ़ी जिला में लिगानुपात प्रति 1000 पुरुष से बढ़कर 1209 हो गई है। यह संख्या पहले प्रति एक हजार पर 1103 ही थी। वैसे देश में 1000 लड़कों पर 918 लड़कियों की संख्या है। बेटियां मांगे अपनी सुरक्षा, संरक्षण और प्रोत्साह
शंकर चौक वार्ड-2 डुमरा की स्वाति कुमारी, प्रतापनगर की शालू सिंह, पलक कुमारी, बसबरिया की मोनिका साह, बगाही रुन्नीसैदपुर की स्वाति चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने कई प्रयास किए हैं जो कि बालिकाओं के सशक्तिकरण से जुड़ी हैं। हमारी बहनें हमारा अभिमान हैं। उन्हें पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ाएं, उनको प्रोत्साहित करें। बेटियां पूरी दुनिया में देश का नाम रौशन करने की काबिलियत रखती हैं। यूपीएससी की तैयारी कर रही मौसम भारती ने कहा-कोई साथ न दे मेरा, चलना मुझे आता है, मैं आग से वाकिफ हूं, जलना मुझे आता है। प्रतापनगर के रहने वाले शिक्षक उदय सिंह व गृहिणी निलम सिंह की पुत्री मौसम ने कहा कि आज की बेटियां हर चुनौतियों से जूझते हुए आगे बढ़ रही हैं, देश का नाम रोशन कर रही हैं। हिमालय की चोटी और चांद को हौसलों से छुआ। अंतरीक्ष में भी फतह किया। देश में सत्ता का संचालन कर वहां भी अपना दमखम दिखाया और पूरी दुनिया का लोहा मनवाया। हम बेटियों को संरक्षण और प्रोत्साहन की जरूरत भर है फिर हम पूरा आसमान अपने हौसले की बदौलत नाप देंगे।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।