चोरौत महारानी मंदिर मेंश्रद्धालुओं का लगा रहता है आना-जाना
जिला मुख्यालय सीतामढ़ी से 45 किलोमीटर दूर चोरौत के दुर्गा चौक के समीप स्थित महारानी मंदिर चोरौत बारहो मौजे में एकमात्र मंदिर है।
सीतामढी। जिला मुख्यालय सीतामढ़ी से 45 किलोमीटर दूर चोरौत के दुर्गा चौक के समीप स्थित महारानी मंदिर चोरौत बारहो मौजे में एकमात्र मंदिर है। यहां आसपास के गांवों से ही नही बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। यहां हमेशा भक्तों की भीड़ लगी रहती है। मंदिर का इतिहास चोरौत के महारानी मंदिर के स्थापना संबंधी सही जानकारी वर्तमान में किसी के पास नहीं है। लेकिन स्थानीय लोगों की माने यहां सदियों से पूजा होती आ रही है। प्राचीन काल में मंदिर के परिसर काफी बड़ा था। इसके परिसर में पुस्तकालय, वाणी मंदिर भी था। इसके परिसर में कबड्डी प्रतियोगिता आयोजित होती थी। लेकिन देख रेख के अभाव में पुस्तकालय, वाणी मंदिर व परिसर समेत धीरे-धीरे तालाब में समाता चला गया । सन 1987 में आए बाढ़ ने मंदिर के पुराने ढांचे को जर्जर बना दिया। स्थानीय माप तौल निरीक्षक पद पर कार्यरत परमानंग पाठक ने वर्ष 1987 में प्रलयंकारी बाढ़ के बाद मंदिर को नए ढांचे के साथ निर्माण कराया। उस समय में भी भगवती की पूजा प्राण प्रतिष्ठा के साथ विधिवत रूप से होता आ रहा है । महारानी मंदिर के दक्षिण में बाबा भैरवनाथ का एक छोटा मंदिर है । यहां हमेशा ग्रामीणों द्वारा नवाह, कीर्त्तन, अष्टयाम हुआ करता है । आज लोग इसे मनोकामना महारानी स्थान के नाम से जानते है। वर्तमान में यह आस्था का केन्द्र बना हुआ है । आसपास के लोग खासकर महिलाएं मंदिर स्थित तालाब में स्नान कर प्रत्येक दिन पूजा पाठ करने की दिनचर्या बना चुकी है। यहां आसपास के गांव चन्द्रसैना, बर्मा, अमनपुर, सकरम, हरिपुर के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल के भी भक्तों की भीड़ लगी रहती है । मंदिर समिति कर रही देखरेख:
समिति के सदस्य बेचन राय, अध्यक्ष गुल्ठा महाराज, सुरेन मुखिया की माने तो लोग जब अपने घरों में शुभ कार्य करते हैं उससे पहले यहां पूजा अर्चना करने से मनोकामना पूरी होती है। लोगों की अपेक्षा है कि महारानी मंदिर व सामने में स्थित तालाब का सौंदर्यीकरण हो सके । कैसे पहुंचे महरानी मंदिर : चोरौत प्रखंड मुख्यालय स्थित नीमबारी परिसर से दुर्गा चौक के समीप से सीधा रास्ता है। यह मंदिर चोरौत गांव बसने से पूर्व से ही है । इसके स्थापित तिथि का पता नहीं है । यहां के लोगों की इतनी आस्था है कि भक्त सोना तक चढ़ावा चढ़ाते हैं । भक्त गाजा बाजे के साथ यहां पूजा करने आते हैं ।
---- गुलठा महराज, महारानी मंदिर के अध्यक्ष चोरौत के चौगामा में एक ही महारानी मंदिर है । इस स्थान के प्रति भक्तों की इतनी आस्था है कि नेपाल तक के लोग गाजे बाजे के साथ पूजा-अर्चना करने आते हैं।
--- जानकी देवी, मंदिर की पुजारी
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