Sitamarhi: बागमती कटौझा में लाल निशान के पार तो हरदी नदी में भी उफान, लहुरिया बाजार तक पहुंचा बाढ़ का पानी
Sitamarhi News सीतामढ़ी में नदियों में उफान बरकरार है। बागमती नदी मुजफ्फरपुर की सीमा पर कटौझा में लाल निशान को पार कर गई है तो परिहार प्रखंड में हरदी नदी में उफान से बाढ़ का पानी लहुरिया बाजार तक पहुंच गया है। एक दिन पहले बागमती नदी सोनाखान तो लालबकेया नदी गुआबाड़ी में खतरे के निशान को पार कर गई थी।
सीतामढ़ी, जागरण संवाददाता: सीतामढ़ी में नदियों में उफान बरकरार है। बागमती नदी मुजफ्फरपुर की सीमा पर कटौझा में लाल निशान को पार कर गई है तो परिहार प्रखंड में हरदी नदी में उफान से बाढ़ का पानी लहुरिया बाजार तक पहुंच गया है।
एक दिन पहले बागमती नदी सोनाखान तो लालबकेया नदी गुआबाड़ी में खतरे के निशान को पार कर गई थी। बागमती नदी ढेंग, डुबाघाट, बेलसंड के चंदौली व मुजफ्फरपुर की सीमा पर कटौझा में उफान पर थी। अधवारा नदी सुंदरपुर में उफान पर है तो पुपरी में यह स्थिर भाव में है।
सोनबरसा में झीम नदी भी उफान पर है। प्रशासन का कहना है कि शुक्रवार शाम छह बजे बागमती नदी का जलस्तर कटौझा में खतरे के निशान से दशमलव 45 मीटर उपर बह रही थी। यहीं नदी ढेंग, सोनाखान, डुब्बाघाट और चंदौली में नीचे आई है।
नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते सीमावर्ती इलाके में बाढ़ की संभावना से लोग भयभीत हैं। डीएम मनेश कुमार मीणा ने बाढ़ की संभावना वाले क्षेत्रों में तमाम अधिकारियों के साथ एसडीआरएफ को अलर्ट किया है। मौसम विभाग ने अगले 72 घंटे के लिए अलर्ट जारी किया है। नेपाल में लगातार हो रही भारी से जलस्तर में उफान है।
सिंचाई के लिए पानी के अभाव के बीच बाढ़ आने से खेती पर संकट
परिहार, संवाद सहयोगी: नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में तेज बारिश के कारण शुक्रवार को प्रखंड के रास्ते बहने वाली हरदी नदी में उफान आ गया, जिसके कारण बारा, बंसवरिया, लहुरिया आदि गांवों के सरेह में चारों तरफ पानी फैल गया है। बाढ़ का पानी लहुरिया बाजार तक पहुंच गया है।
परवाहा-लालबंदी पथ में लहुरिया बाजार के समीप सड़क पर एक से डेढ़ फीट पानी का बहाव हो रहा है, जिससे आवागमन में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अचानक बाढ़ का पानी आ जाने के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
उल्लेखनीय है कि इस मानसून हरदी नदी पहली बार उफनाई है। वर्षा के अभाव में धान की रोपनी नहीं हो पा रही है। यहां तक की धान रोपनी के लिए लगाए गए बिचड़े खराब होने लगे थे। बहुत ही कम लोगों ने पंपिंग सेट से खेतों में पटवन करा धान की रोपनी कराई थी। बाढ़ आ जाने से फसल के नष्ट होने का भी संकट गहरा गया है।
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