उद्घाटन के साथ आज दिखेगी सेमरिया मेला की रौनक
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा एवं सरयू नदी के संगम स्थल गोदना में स्थान का पौराणिक महत्व होने के कारण सैकड़ों वर्षो से लगातार लगने वाले प्रसिद्ध गोदना सेमरिया मेला की रौनक शुक्रवार को उद्घाटन के साथ दिखेगी।
रिविलगंज (सारण): कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा एवं सरयू नदी के संगम स्थल गोदना में स्थान का पौराणिक महत्व होने के कारण सैकड़ों वर्षो से लगातार लगने वाले प्रसिद्ध गोदना सेमरिया मेला की रौनक शुक्रवार को उद्घाटन के साथ दिखेगी। यहां कार्तिक पूर्णिमा से शुरु होकर लगभग एक माह तक मेला लगता है। जिसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी जिले सिवान एवं गोपालगंज सहित यूपी के बलिया जिले के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में जुटते हैं।
रिविलगंज व गोदना का है धार्मिक ऐतिहासिक एवं व्यापारिक महत्व
धार्मिक, ऐतिहासिक एवं व्यापारिक महत्व को देखते हुए पर्यटन के दृष्टिकोण से रिविलगंज एक महत्वपूर्ण स्थान है। न्याय शास्त्र के प्रणेता महर्षि गौतम की यह नगरी कभी श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि रही हैं। उसकाल में यह क्षेत्र मिथिला नरेश राजा जनक के क्षेत्र मिथिला का ही हिस्सा माना जाता था। रिविलगंज- गोदना घाघरा या सरयू नदी के उतर तट पर समुद्र तल से लगभग 58 मीटर पर जिला मुख्यालय से छपरा से लगभग12 किलोमीटर पश्चिम राष्ट्रीय राज्य मार्ग 19 हाजीपुर से गाजीपुर मार्ग पर स्थित हैं। गोदना लगभग 100 वर्ष पूर्व गंगा व सरयू नदी के संगम स्थल होने के कारण धार्मिक और वाणिज्यिक रुप से बहुत महत्वपूर्ण स्थान था। यह पटना एवं बंगाल जलमार्ग से जुड़ा मुख्य जलमार्ग था। जिसमें बड़ी बड़ी नाव एवं स्टीमर जहाज भी चला करते थे। यह व्यापारिक केंद्र था और बंगाल से चावल ,नमक एवं फैजाबाद से गेहूं, जौ,तेलहन और दलहन आता था। आढ़त एवं मालगोदाम के कारण महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्रों में इसकी गिनती होती थी। लगभग 1900 ई0 के आसपास नदी की धारा के पीछे हटने के कारण और नदी के पूरब की ओर खिसकने के कारण इस स्थान का व्यापारिक महत्व धीरे धीरे कम होने लगा। लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि ऋषि महर्षियों की यह तपोभूमि रही हैं। महर्षि श्रृंगी ऋषि तथा महर्षि गौतम की तपोस्थली के रुप में यह स्थान अत्यंत ही आध्यात्मिक क्षेत्र हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां लोग स्नान करने आते हैं और एक भव्य मेला भी लगता हैं। सरयू नदी में स्नान दान की परम्परा अनादिकाल से चली आ रही हैं । इसके अलावा यह बजरंगबली का ननिहाल भी है।
कार्तिक पूर्णिमा को श्रापमुक्त हुई थी अहिल्या
कहा जाता हैं कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या अपने ही पति के श्राप से मुक्त हुई थी। महर्षि के श्राप से वह गौतम ऋषि के आश्रम के समीप ही
हजारों साल से पत्थर बनी थी। इसी दिन प्रभु श्रीराम के चरण स्पर्श से अहिल्या का उद्धार हुआ था। अत: उसी काल से मेला लगता आ रहा है। यह मेला व्यापार के दृष्टिकोण से तो महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन धार्मिक महत्व बहुत है। परंपरा के अनुसार लोग सरयू में स्नान करने के बाद पूजा-पाठ एवं दान करने के बाद सतुआ- मूली खाते है। इसके संबंध में कहा यह जाता हैं कि श्रीराम जी,लक्ष्मण जी एवं विश्वामित्र जी ने भी स्नान कर सतू- मूली का ही भोजन किया था।
365 मठ मंदिरों के घंटों की आवाज गूंजती थी यहां
गोदना सेमरिया के सरयू नदी मे कार्तिक पूर्णिमा के स्नान का महत्व रखने वाले इस इलाके के लगभग चार किलोमीटर की दूरी मे कभी 365 मठों व मंदिरों में घंटों की आवाजों के साथ हवन व धूप की खुशबू से सुगंधित हो जाता था क्षेत्र। लेकिन सभी विलुप्त होने के कारण पर है। उसमें से 29 मठ मंदिरों के अवशेष अभी बचे हुए है। जो अहिल्या की तरह ही अपने उद्घारक की बाट जोह रहे है। प्राचीन काल मे राजा- रजवारो एवं समर्थ वाले श्रद्धालु द्वारा मंदिर, धर्मशाला और अपने लिए कार्तिक प्रवास स्थल बनाया गया था। उनमें से अभी भी बेतिया महाराज, मांझा स्टेट, हथुवा स्टेट आदि के अवशेष धरोहर जर्जर अवस्था मे बचे हुए हैं। लेकिन सरकारी उदासीनता एवं देखरेख की कमी होने से खंडहर मे तब्दील होते जा रहे हैं।
ये हैं रिविलगंज के खास मंदिर
सामाजिक एवं प्रशासनिक उदासीनता को झेलने के बाद भी ये मठ मंदिर आज भी खास है। इनका वजूद आज भी कायम है। इनमें पयहारी बाबा मंदिर, श्रीनाथ बाबा मंदिर, ब्रह्माचारी बाबा मंदिर, श्रृंगी ऋषि मंदिर, करियवा मंदिर, पक्की ठाकुरवारी मंदिर, गंढ़देवी मंदिर,गौतम ऋषि मंदिर, मांझा स्टेट मंदिर, हथुआ स्टेट मंदिर, रुसी छावनी मंदिर, बेतिया राज मंदिर आदि मंदिर अपने उद्धारक की बाट के इंतजार मे अपनी अवशेष बचाए हुए हैं।
रिविलगंज इतिहास के आइने में
रिविलगंज नगरपालिका बिहार के सबसे पुरानी नगरपालिकाओं मे एक हैं। 1876 ई. में इसका गठन हुआ और इसके पहले चेयरमैन मि. सीसी क्वीन्न तथा वाइस चेयरमैन ताराचंद प्रसाद मुखर्जी हुए। वैसे अंग्रेजों ने इस क्षेत्र पर 1764 ई.से अपना प्रभुत्व स्थापित किया था। चूंकि यह स्थान उस समय गंगा और सरयू नदियों के संगम पर था, इसलिए ईस्ट इंडिया कंपनी ने 9 जुलाई 1888 को यहां एक चुंगी वसूली कार्यालय खोला।
जिसमे चुंगी अधिकारी मि.हेनरी रिवेल थे। मि.रिवेल ने चुंगी वसूली के साथ साथ नदी में जहाज द्वारा व्यापार भी शुरू कराया। उस समय गोदना जहाज घाट हुगली के बाद चुंगी का सबसे बड़ी चौकी थी। व्यापारिक गतिविधियों मे वृद्वि के कारण यह स्थान एक नगर के तौर पर विकसित होने लगा जिसका नाम तत्कालीन परपंरा के अनुसार मि. रिवेल के नाम पर रिवेलगंज प्रचलित होने लगा। जो आज तक बरकरार है।
लोग करते रहे हैं नाम बदलने की मांग
एक अंग्रेज के नाम पर रिविलगंज का नाम होने के कारण स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से इसका नाम महर्षि गौतम के नाम पर करने की मांग करते रहे है। नगर पंचायत के वर्तमान बोर्ड की पहली बैठक मे ही रिविलगंज के नाम बदलकर गौतम ऋषि के नाम पर करने का प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजा गया। गोदना स्थित गौतम ऋषि स्थान के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने संगठित होकर 1965 मे रिविलगंज रेलवे स्टेशन के नाम गौतम ऋषि के नाम पर रखने का आंदोलन किया जिसके कारण भारत सरकार ने 8 जनवरी 2004 मे स्टेशन भवन का उद्घाटन गौतम ऋषि मंदिर के अनुसार बना कर किया और स्टेशन का नामकरण गौतम स्थान किया गया।रेलवे स्टेशन के नामकरण गौतम स्थान होने के बाद रिविलगंज क्षेत्र के नाम भी गौतम ऋषि के नाम पर करने की मांग जोड़ पकड़ लिया है। लोगों को उम्मीद है कि यदि कलकत्ता को कोलकाता, मद्रास को चेनैई, बाम्बे का मुम्मबई सहित देश के विभिन्न हिस्से में अंग्रेजों द्वारा दिए गए नाम से मुक्त किया जा सकता तो रिविलगंज भी गौतम नगर या अहिल्या धाम के रुप में जाना जाएगा।
ब्रह्मा के मानस पुत्र थे गौतम ऋषि
गौतम ऋषि भी सप्तर्षियों मे माने गये हैं। वे ब्रह्मा के मानस पुत्र थे। महर्षि गौतम की यह नगरी कभी श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि रही हैं।यह क्षेत्र मिथिलांचल का हिस्सा था। गौतम ऋषि के परिवार में एक पुत्र सदानंद जी, पुत्री अंजनी एवं पत्नी अहिल्या थी। अपने पुत्र को मिथिला नरेश जनक जी की सभा में स्थापित करने के बाद अपनी पत्नी और पुत्री अंजनी के साथ गंगा-सरयू के संगम पर यहां आये और इसे अपना तपोभूमि बनाया। उस समय गंगा- सरयू की संगम गोदना मे ही था। गौतम ऋषि की पुत्री अंजनी की शादी कि¨ष्कधा नरेश के सेनापति केशरी जी के साथ हुआ। अंजनी हनुमानजी की माता थी इस कारण इस स्थान को हनुमानजी का ननिहाल कहा जाता हैं। रिविलगंज की दशहरा की चर्चा पड़ोसी राज्य तक मशहूर हैं । दशहरा मेला एवं विसर्जन मेला देखने के लिए कई जिले से लोग आते हैं। यहां के लोगों में हनुमानजी में बहुत आस्था है । उनकी कृपा से यहां के लोगों का कल्याण होता हैं।रिविलगंज ठाकुरबाड़ी आखड़ा नं एक के हनुमानजी की प्रतिमा पर खर्च करने वालों की लाइन लगती है। हनुमानजी तो यहां लगभग 40 वर्षो तक के लिए बुक हो चुके है। महर्षि गौतम की कुटिया होने का लोक विश्वास हैं । वहां मंदिर बना हुआ है। मंदिर परिसर मे श्री राम, जानकी,एवं लक्ष्मण जी का मंदिर, हनुमानजी मंदिर, गौतम जी, अहिल्याजी,सदानन्द जी,अंजनी जी, महर्षि विश्वामित्र, शिव जी,दुर्गा जी,राधा कृष्ण कुटिया, अहिल्या उद्वार मंदिर, श्रीराम के चरणचिह्न, ताम्र-पत्र,यज्ञशाला, चहारदीवारी एवं मुख्य द्वार का निर्माण हुआ है। वही विनोद कुमार श्रीवास्तव के प्रयास से मंदिर परिसर में ही गौतम ऋषि पुस्तकालय, आरोग्य चिकित्सालय, माता अहिल्या नारी उत्थान केंद्र तले गरीब परिवार के महिलाओं के लिए सिलाई प्रशिक्षण एवं छात्राओं के लिए स्पी¨कग इंग्लिश कोर्स एवं कंप्यूटर सिखाने के लिए क्लास लगता है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।