Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    गुरु-शिष्य के रिश्ते में आया है बदलाव

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 05 Sep 2017 03:01 AM (IST)

    वर्तमान समय में गुरु शिष्य की परंपरा में भी बदलाव आया है।

    गुरु-शिष्य के रिश्ते में आया है बदलाव

    सारण। वर्तमान समय में गुरु शिष्य की परंपरा में भी बदलाव आया है। गुरु भी आज किताब के ज्ञान के साथ ही शिष्यों को टेक्नो फ्रेंडली शिक्षा लेने की सलाह दे रहे है। लेकिन पहले एवं आज के गुरू का भी लक्ष्य एक ही उनका शिष्य बेहतर करे और अपने साथ अपने गुरु का भी नाम रौशन करे। वे भी शिष्य के उज्जवल भविष्य का निर्माण करने के लिए लगे हुए है। हालांकि इसमें भी बदलाव आया है। पहले शिक्षक कक्षा के साथ ही छात्र के विकास के लिए हमेशा व्यक्तिगत स्तर से सोचते रहे थे। लेकिन अब यह दायरा कक्षा तक ही सीमित होता जा रहा है। वह कक्षा के बाहर छात्रों के किसी भी गतिविधि पर ध्यान नहीं दे रहे है। जिसके कारण वर्तमान समय में शिक्षक -छात्र के रिश्ते भी खराब हो रहे है। लेकिन इसके बाद भी कई ऐसे शिक्षक है और छात्र है जो अपने प्रयास से इस रिश्ते को ऊंचाई दे रहे है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    शिक्षक दिवस के पूर्व संध्या पर दैनिक जागरण ने शिक्षक दिवस के पूर्व संध्या पर गुरू -शिष्य के बदलते रिश्ते एवं व्यवहार के बारे शिक्षक एवं छात्रों से विस्तार से बातचीत हुई प्रस्तुत है उसके प्रमुख अंश : -

    गुरु का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। उनके कारण ही सकारात्मक विचार हमारे अंदर आ पाती है। कभी निराश की तरफ कदम बढ़े तो उचित मार्गदर्शन मिल पाता है। हमारी जीत उनके चेहरे की खुशी बढ़ा देती है। इसलिए हमें अपने गुरु का सम्मान करना चाहिए।

    प्रीति कुमारी

    पहले गुरु-शिष्य की परंपरा कुछ अलग थी। आज यह काफी बदल गई है। शिक्षक पहले छात्रों के अभिभावक तुल्य हुआ करते थे। लेकिन आज के छात्र शिक्षकों का सम्मान नहीं करना चाहिए। वर्तमान समय में सभी को मिलकर इसे वापस कायम करने की जरूरत है।

    डॉ. पूनम ¨सह

    प्राध्यापक पीजी मनोविज्ञान विभाग

    गुरु का हमारे जीवन मे विशेष महत्व है। उनके कारण ही सकारात्मक सोच हमारे अंदर आ पाती है। कभी निराश के तरफ कदम नहीं बढ़ता है। सही मार्गदर्शन के कारण हम सही रास्ते पर चलते है। इसलिए हमें अपने गुरु का सम्मान करना चाहिए।

    सोनाली कुमारी, छात्रा

    शिक्षा देने के साथ-साथ जीवन में आने वाली भावी चुनौतियों के लिए बच्चों को तैयार करने का दायित्व शिक्षकों का है। लेकिन छात्रों को भी उसके लिए तैयार होने की जरूरत है। तभी गुरू व शिष्य का संबंध अभिभावक व पुत्र की तरह होगा।

    डॉ. श्वेता रानी, शिक्षिका

    हमारे समाज में शिक्षक का महत्व बहुत बड़ा है। माता-पिता एवं ईश्वर से भी पहले गुरू का स्थान है। गुरु के बताएं मार्ग पर चलकर शिष्य समाज में प्रतिष्ठा पा सकता है। गुरू की महत्व सर्वोपरि है।

    अमृता कुमारी, छात्रा

    आधुनिक युग में शिक्षक अपने बढ़े दायित्व को निभा रहे है। आज शिक्षा का फलक बड़ा हुआ है। इसमें नैतिक शिक्षा के साथ -साथ विषय ज्ञान और तकनीकी शिक्षा का समावेश हो गया है।

    डॉ. नीलम ¨सह, शिक्षिका

    छात्रों के जीवन में गुरु के ज्ञान का बहुत ही महत्व पूर्ण स्थान है। गुरू ही है जो अपने दायित्व का निर्वहन कर समाज व देश के लिए बेहतर नागरिक निर्माण की नींव डालते है। उनकी बदौलत हम जीवन में सफल होते है।

    रंजीत कुमार, छात्र

    योग्य शिक्षक विद्यार्थियों का उचित मार्गदर्शन करते है। अपनी ऊर्जा केवल शिक्षा देने में व्यय करते हैं। विद्यार्थियों को शिक्षक तभी अच्छे ढ़ंग से पढ़ा सकते है। जब वे उनका व्यवहार अभिभावक एवं पुत्र जैसा होगा। लेकिन वर्तमान समय में यह नहीं हो पा रहा है।

    जटी विश्वनाथ मिश्र

    पूर्व प्राधानाध्यापक