सोना-चांदी ही नहीं, धनतेरस पर झाड़ू, धनिया और कौड़ी खरीदने से भी घर आती हैं मां लक्ष्मी
दिघवारा समेत ग्रामीण बाजारों में धनतेरस की तैयारियां पूरी हैं, जहां सुख-समृद्धि के लिए सोना, चांदी, बर्तन और नई वस्तुएं खरीदी जाएंगी।

सोना-चांदी ही नहीं, धनतेरस पर झाड़ू, धनिया और कौड़ी खरीदने से भी घर आती हैं मां लक्ष्मी
HighLights
धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।
झाड़ू खरीदने से माता लक्ष्मी घर में वास करती हैं।
प्रदोष काल में कुबेर, लक्ष्मी, धन्वंतरि की पूजा करें।
संवाद सूत्र, दिघवारा। सुख-समृद्धि और धन-धान्य की कामना के पर्व धनतेरस के लिए दिघवारा समेत ग्रामीण बाजारों की दुकानें सज गई हैं और आज जमकर खरीदारी होगी।
मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में सोने-चांदी, बर्तनों और अन्य नई वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और धन की बरकत बनी रहती है। साबुत धनिया, नई झाड़ू और कौड़ी खरीदना भी शुभ माना जाता है।
दिघवारा नगर पंचायत के राइपट्टी गांव निवासी आचार्य कमलेश दूबे के अनुसार, छह नवंबर शुक्रवार को सुबह 10:30 बजे त्रयोदशी तिथि शुरू होगी, जिसका समापन सात नवंबर को सुबह 10:57 बजे होगा।
धनतेरस पर प्रदोष काल शाम 5:30 से रात 8:10 बजे तक रहेगा। धनतेरस की पूजा के लिए प्रदोष काल को सर्वोत्तम समय माना जाता है। इस तरह धनतेरस पर कुबेर, मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा।
मान्यता है कि इस दिन घर में नई वस्तुएं लाने से सुख-समृद्धि आती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदने की परंपरा वर्षों पुरानी है।
इसके अलावा पीतल के बर्तन खरीदने का भी विशेष महत्व है। खासकर धनतेरस पर झाड़ू खरीदने का विशेष महत्व बताया गया है। किंवदंती है कि धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने से माता लक्ष्मी घर छोड़कर नहीं जाती हैं।
झाड़ू को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। धनतेरस पर झाड़ू खरीदने से घर में सुख-समृद्धि और धन में वृद्धि होती है। झाड़ू घर में आई दरिद्रता को दूर करती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
इधर, धनतेरस पर दिघवारा के बर्तन और सर्राफा कारोबारी अधिक से अधिक व्यवसाय करने के लिए पहले से तैयार हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार अच्छा कारोबार होगा।
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