दीपोत्सव का शंखनाद: 6 को धनतेरस, 8 को दिवाली और 13 नवंबर से महापर्व छठ, जानिए पूजा के सबसे सटीक मुहूर्त
धनतेरस से महापर्व छठ तक बिहार में दीपोत्सव का माहौल है, जिसमें विभिन्न त्योहारों की तिथियां और शुभ मुहूर्त बताए ...और पढ़ें

धनतेरस से दीपोत्सव शुरू, 15 को महापर्व छठ का पहला अर्घ्य (AI Generated Image)
HighLights
धनतेरस से छठ महापर्व तक त्योहारों की विस्तृत जानकारी।
दीपोत्सव में दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज के शुभ मुहूर्त।
भगवान राम, महावीर, बुद्ध से जुड़े दीपोत्सव का महत्व।
संवाद सूत्र, उदवंतनगर। शुक्रवार 6 नवंबर को धनतेरस के साथ ही दीपोत्सव की शुरुआत हो रही है। धनतेरस से लेकर महापर्व छठ तक बिहार में पर्व का माहौल होता है। इस दौरान पूजन के साथ-साथ आत्मिक व आध्यात्मिक समृद्धि पर जोर दिया जाता है।
घर और आसपास की चतुर्दिक सफाई का विशेष ख्याल रखा जाता है। दीपावली में जहां घरों की सफाई होती है वहीं व्यापकता लिए रास्ता धाट आदि का महापर्व छठ में सफाई व पवित्रता का विशेष महत्व होता है। दीपावली व महापर्व छठ को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर है।
पंडित विवेकानंद पांडेय कहते हैं कि दीपोत्सव आमतौर पर पांच दिनों का होता है, लेकिन इस साल कायस्थ समाज छठे दिन चित्रगुप्त पूजा मना रहा है। धनतेरस अथवा धन त्रयोदशी से शुरू होने वाला दीपोत्सव भैया दूज और चित्रगुप्त पूजा के दिन समाप्त होगा।
सनातन धर्मावलंबियों के अलावा जैन और बौद्ध धर्म में दीपोत्सव मनाने की परंपरा है। भगवान राम के रावण (लंका) विजय के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में दीपावली मनाई जाती है।
वहीं, जैन धर्मावलंबी इस दिन भगवान महावीर के ज्ञान प्राप्ति की खुशी में दिए जलाते हैं। बौद्ध मतावलंबी 18 वर्षों के बाद भगवान बुद्ध के कपिलवस्तु लौटने की खुशी में यह प्रकाश पर्व मनाते हैं।
त्रयोदशी को आरोग्य के देवता धनवंतरी, धन के देवता कुबेर और महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन को आरोग्य के देवता धनवंतरी का जन्मदिन भी माना जाता है।
इस वर्ष 6 नवंबर, शुक्रवार को दिन में 11.07 बजे त्रयोदशी तिथि का आगमन हो रहा है, जो 7 नवंबर को दिन में 10.44 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि मिलने के कारण धनतेरस 6 नवंबर को मनाया जाएगा।
धनतेरस के दूसरे दिन चतुर्दशी तिथि को हनुमत जन्मोत्सव और मृत्यु के देवता यम की पूजा की जाती है। इस दिन यम के नाम पर घर से बाहर दीया निकालने की परम्परा है। इस दिन को नरक चतुर्थी भी कहा जाता है। इस साल 6 नवंबर, शुक्रवार को धनतेरस के साथ दीपोत्सव शुरू होगी।
7 नवंबर, शनिवार को हनुमान जी जयंती मनेगी। 8 नवंबर, रविवार को दीपावली मनाई जाएगी। 9 नवंबर, सोमवार को सोमवती अमावस्या, अन्नकूट व गोबर्धन पूजा तथा दीपोत्सव के अंतिम दिन 10 नवंबर, मंगलवार को भैया दूज और वहीं इस वर्ष कायस्थ समाज 11 नवंबर बुधवार को चित्रगुप्त पूजा मनाएगा।
13 नवंबर शुक्रवार को नहाए खाए से महापर्व छठ की शुरुआत होगी। छठ का पहल अर्घ्य 15 नवंबर रविवार को होगा।
जानें, किस दिन मनाए जाएंगे कौन-से त्योहार?
- 6 नवंबर, शुक्रवार - धनतेरस, धन्वंतरि जयंती
- 7 नवंबर, शनिवार - हनुमत जन्मोत्सव, धन्वंतरि जयंती व नरक चतुर्दशी
- 8 नवंबर, रविवार - दीपावली
- 9 नवंबर, सोमवार - सोमवती अमावस्या,अन्नकूट व गोवर्धन पूजा
- 10 नवंबर, मंगलवार - भैयादूज
- 11 नवंबर, बुधवार - चित्रगुप्त पूजा
- 13 नवंबर, शुक्रवार - महापर्व छठ की शुरुआत, नहाय खाय
- 14 नवंबर, शनिवार - खरना
- 15 नवंबर, रविवार - छठ व्रत का पहला अर्घ्य
- 16 नवंबर, सोमवार - छठ का दूसरा अर्ध्य
- 1 8 नवंबर, बुधवार - अक्षय नवमी
- 20 नवंबर, शुक्रवार - प्रबोधिनी एकादशी, चतुर्मास समाप्ति
- 24 नवंबर, मंगलवार - कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली
शुभ मुहूर्त कब-कब?
पंडित विवेकानंद पाण्डेय ने बताया कि धनतेरस का सर्वोत्तम प्रदोष काल में स्थिर वृष लग्न का शुभ मुहूर्त सांय 5.49 से 7.44 बजे तक होगा। कुंभ लग्न दिन में 1.23 - 2.54 बजे तक तथा सिंह लग्न रात्रि 12.27 - 2.41 बजे तक रहेगा। नरक चतुर्दशी को सांय मेष लग्न में हनुमानजी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
वहीं, दीपावली के दिन व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के लिए स्थिर कुंभ लग्न दिन में 1.20 बजे से 2.51 बजे तक, सर्वोत्तम प्रदोष काल में स्थिर वृष लग्न सांय 5.56 - 7.52 बजे तक तथा महानिशा में तांत्रिक पूजा मंत्र सिद्धि के लिए स्थिर सिंह लग्न रात्रि में 12.24 बजे से 2.38 बजे तक रहेगा। इस दौरान पूजा करना श्रेयस्कर व मंगलकारी होगा।
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