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धनतेरस 2026: सोने-चांदी से भी अनमोल है 'आरोग्य', भगवान धन्वंतरि से लें स्वस्थ जीवन का संदेश

Published: Thu, 05 Nov 2026 02:14 PM (IST)

धनतेरस पर केवल धन ही नहीं, बल्कि आरोग्य की भी पूजा की जाती है, क्योंकि भगवान धन्वंतरि ने समुद्र मंथन से प्रकट होकर निरोगी जीवन का संदेश दिया था।

धनतेरस पर धन के साथ आरोग्य पूजा भगवान धन्वंतरि का संदेश (AI Generated Image)

धनतेरस पर धन के साथ आरोग्य पूजा भगवान धन्वंतरि का संदेश (AI Generated Image)

HighLights

  1. धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि आरोग्य का संदेश देते हैं।

  2. स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है, धन से भी अनमोल।

  3. आयुर्वेद संतुलित जीवनशैली और निरोगी काया पर जोर देता है।

संवाद सूत्र, शाहपुर (आरा)। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है। इसका संदेश सनातन संस्कृति में मिलता है। इसलिए धनतेरस (Dhanteras 2026) के दिन कीमती धातुओं के साथ-साथ आरोग्य रूपी धन भी अनमोल उपहार है। दीपावली के पांच-दिवसीय पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है।

धनतेरस का नाम धन और त्रयोदशी शब्दों से मिलकर बना है। सनातन परंपरा के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का जनक और देवताओं का वैद्य माना जाता है।

इसलिए धनतेरस केवल सोना, चांदी, बर्तन और अन्य कीमती वस्तुओं की खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि आरोग्य और निरोगी जीवन के महत्व को समझने का भी विशेष अवसर है।

आज के आधुनिक दौर में जहां लोग भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-दौलत को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानने लगे हैं, वहीं भारतीय संस्कृति का यह पर्व याद दिलाता है कि मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी उसका स्वास्थ्य है।

स्वस्थ शरीर के बिना धन-दौलत और तमाम सुख-सुविधाओं का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता। यही कारण है कि भगवान धन्वंतरि की पूजा को आरोग्य, दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना से भी जोड़कर देखा जाता है।

सोना-चांदी से भी अनमोल है आरोग्य धन

धनतेरस के दिन लोग शुभ मुहूर्त में सोना, चांदी, बर्तन और अन्य वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। हालांकि, इस पर्व का एक गहरा संदेश यह भी है कि धन के साथ स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जाए।

बीमारियों से मुक्त शरीर और स्वस्थ मन ही वास्तविक संपत्ति है। भगवान धन्वंतरि की आराधना हमें नियमित दिनचर्या, संतुलित खानपान, स्वच्छता और प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा देती है।

आयुर्वेद में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर जोर

आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सी.एन. पांडे के अनुसार, भगवान धन्वंतरि से जुड़ी आयुर्वेद परंपरा का मूल उद्देश्य मनुष्य को स्वस्थ रखना और रोगों से बचाव करना है।

आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को शरीर के प्रमुख दोष माना गया है। इनके संतुलन को स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। इसमें ऋतुचर्या, दिनचर्या, संतुलित आहार, योग और प्राकृतिक जीवनशैली को विशेष महत्व दिया गया है।

आज जब बदलती जीवनशैली के कारण मधुमेह, रक्तचाप, मोटापा और तनाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, तब आयुर्वेद की पारंपरिक जीवनशैली का महत्व और भी बढ़ जाता है।

प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है धन्वंतरि परंपरा का उल्लेख

सहजौली गांव के आचार्य पंडित मनोज चौबे ने बताया कि भारतीय चिकित्सा परंपरा के प्राचीन ग्रंथों में भगवान धन्वंतरि का विशेष स्थान है। सुश्रुत संहिता में काशीराज दिवोदास को धन्वंतरि के रूप में वर्णित किया गया है।

महर्षि सुश्रुत ने उन्हें अपना गुरु मानते हुए शल्य चिकित्सा संबंधी ज्ञान प्राप्त किया था। सुश्रुत संहिता को प्राचीन भारतीय शल्य चिकित्सा का महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।

इसके अलावा चरक संहिता, काश्यप संहिता और धन्वंतरि निघंटु जैसे ग्रंथ भी भारतीय चिकित्सा एवं औषधीय ज्ञान की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं। धन्वंतरि निघंटु में औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों से संबंधित जानकारियां संकलित हैं।

देखा जाए तो धनतेरस का पर्व हमें केवल धन अर्जित करने और नई वस्तुएं खरीदने का संदेश नहीं देता, बल्कि स्वस्थ जीवन के महत्व का भी बोध कराता है।

भगवान धन्वंतरि की आराधना के साथ यदि हम अपनी दिनचर्या में स्वास्थ्य, स्वच्छता, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को स्थान दें, तो यही इस पर्व की सार्थकता होगी।

आखिरकार धन खोने पर दोबारा अर्जित किया जा सकता है, लेकिन स्वास्थ्य की अनदेखी जीवन को कई तरह से प्रभावित कर सकती है।

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