अर्हताएं पूरी करने के बावजूद सोनपुर नगर पंचायत नहीं बन सका परिषद
सभी अर्हताएं पूरी करते हुए भी नगर परिषद के दर्जे से सोनपुर नगर पंचायत वंचित रह गया। कहा जाता है कि तत्कालीन डीएम ने रिपोर्ट ही सरकार को नहीं भेजी। इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।

संवाद सहयोगी, सोनपुर : सभी अर्हताएं पूरी करते हुए भी नगर परिषद के दर्जे से सोनपुर नगर पंचायत वंचित रह गया है। अभी हाल ही में बिहार की अनेकों नगर पंचायतें परिषद में शामिल हुई, लेकिन सोनपुर इससे वंचित रह गया। सारण जिला प्रशासन के निर्देश पर यहां के पदाधिकारियों ने सोनपुर में उपलब्ध नागरिक सुविधाओं, संसाधनों, धार्मिक मान्यता व उसके महत्व, महत्वपूर्ण स्थल तथा जेपी सेतु बनने के बाद यहां की बढ़ती व्यवसायिक हलचल एवं विकास की संभावनाओं को उजागर करते रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी। बताया जाता है कि तत्कालीन डीएम ने यह रिपोर्ट या प्रस्ताव सरकार तक नहीं भेजा। परिणामस्वरूप सोनपुर नगर परिषद का दर्जा प्राप्त करने से वंचित रह गया।
नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि सोनपुर नगर परिषद का दर्जा प्राप्त करने की सभी मापदंडों को पूरा करता है ।नगर परिषद में सोनपुर को तब्दील किये जाने को लेकर जो परिसीमन किया गया था उसमें बैजलपुर तथा जहांगीरपुर को भी शामिल किया गया। जिलाधिकारी को जो रिपोर्ट भेजी गई थी उसमें यहां कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले एशिया प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र मेला की धार्मिक, ऐतिहासिक, पौराणिक तथा सांस्कृतिक महत्व को भी दर्शाया गया था। यहां सावन के महीने में लगने वाले श्रावणी मेला व कांवरियों के संदर्भ को भी दर्शाया गया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में जेपी सेतु चालू होने के बाद सोनपुर सीधे न केवल राजधानी पटना के बहुत करीब हो गया है बल्कि यहां व्यवसायिक गतिविधियां भी बढ़ गयी हैं। ऐसे में यहां विकास की संभावनाएं भी बढ़ गयी है। डीएम को सौंपे गये रिपोर्ट इन सभी तथ्यों का खुलासा किया गया था। गौरतलब है कि सोनपुर नगर पंचायत अंतर्गत कुल 21 वार्ड हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार नगर पंचायत की आबादी 37 हजार थी। वर्ष 2021 में यह बढकर लगभग 42 हजार के आसपास पहुंच गया होगा। सोनपुर में न केवल हरिहर क्षेत्र मेला लगता बल्कि यहां धार्मिक पर्यटन के ²ष्टिकोण से हरि और हर की दुर्लभ संयुक्त विग्रह बाबा हरिहर नाथ के रुप में विराजमान हैं। यहां अनुमंडलीय चिकित्सालय, अवर निबंधन कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय, एसडीपीओ कार्यालय, कभी एशिया में नंबर वन स्थान रखने वाला प्लेटफार्म तथा पुराणों में वर्णित जड़भरत ऋषि का आश्रम हैं। कुल मिलाकर यह नगर परिषद नहीं अपितु जिला बनाये जाने का रुतबा रखता है। बावजूद अब तक यह सरकार की नजरों से ओझल है।
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