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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 06, 2011 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

व्याकरण के बिना भाषा अधूरी

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Published: Wed, 06 Apr 2011 07:40 PM (IST)Updated: Thu, 17 Nov 2011 02:14 PM (IST)

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छपरा, जागरण प्रतिनिधि : स्थानीय तेलपा स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय सभागार में बुधवार को आचार्य सारंगधर सिंह द्वारा रचित पुस्तक 'शब्द-विज्ञान' का विमोचन किया गया। व्याकरण-भाषा विज्ञान पर केन्द्रित इस पुस्तक की समीक्षा करते हुए पूर्व प्राचार्य व समालोचक डा. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि व्याकरण के बिना कोई भी भाषा पूरी हो ही नहीं सकती। भाषा को नियमित करने के लिए व्याकरण की अनिवार्यता है। उन्होंने कहा कि आचार्य सारंगधर ने इस पुस्तक में शब्द और अर्थ के अंत:संबंध पर पाण्डित्यपूर्ण तथ्यों का प्रतिपादन किया है। इससे पूर्व पुस्तक का विमोचन करते हुए दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति डा. उमेश शर्मा ने कहा कि पुस्तक की गुणवत्ता, उपयोगिता, महत्ता एवं व्यावहारिकता प्रासंगिक है। उन्होंने इस पुस्तक को विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में रखने की भी बात कही। अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. हरिकिशोर पांडेय ने संस्कृत, अंग्रेजी, हिंदी एवं भोजपुरी के विशाल प्रयोग क्षेत्रों से रामांचित करने वाले प्रसंगों को उद्धृत कर पुस्तक की सार्थकता को रेखांकित किया। जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह ने भाषा, व्याकरण, भाषा शास्त्र, लोक और लोक व्यवहार के परस्पर संबंध को अन्योन्याश्रित बताया। उन्होंने कहा कि इस लिहाज से सारंगधर की पुस्तक की सार्थकता और बढ़ जाती है। पुस्तक का परिचय कराते हुए डा. सुरेश कुमार मिश्र ने कहा कि इस पुस्तक में हिंदी वर्तनी लेखन में अनुस्वार, अनुनासिक, संयुक्ताक्षर, अर्थ विस्तार, अर्थ संकोच, अर्थादेश, स्वरलोप, व्यंजनागम, व्यंजनलोप एवं वर्णो की वाहकता शक्ति को अत्यंत सहज रूप से प्रस्तुत किया गया है। प्रो. केके पांडेय ने व्याकरण के ज्ञान न होने के कारण होने वाली परेशानियों को उद्धृत किया। इस मौके पर पूर्व मंत्री उदित राय, आलमगीर, प्रो. लालबाबू यादव, योगेन्द्र यादव, नागेन्द्र सिंह, डा. अनीता, डा. सुधाबाला, वीरेन्द्र झा, शशिकांत झा, डा. वैद्यनाथ मिश्रा आदि ने अपने विचार दिये। इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ रजनीश मिश्र और सोनू मिश्र के मंगलाचरण से हुआ। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर की छात्राओं ने स्वागत गान तथा आचार्य रामदत्त पांडेय ने स्वागत भाषण किया।

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