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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 07, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सृजन से जाने सारण जिले की थाती को

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Published: Wed, 07 Sep 2016 07:34 PM (IST)Updated: Thu, 08 Sep 2016 04:49 PM (IST)

छपरा। जिलाधिकारी दीपक आनंद ने बुधवार को समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय में सारण सृजन विवरणिका (सा

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छपरा। जिलाधिकारी दीपक आनंद ने बुधवार को समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय में सारण सृजन विवरणिका (सारण गजेटियर) नामक पुस्तक का लोकार्पण किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज से एक सौ वर्ष पूर्व सारण जिला कैसा था और आज कैसा है। उस समय लोग क्या पसंद करते थे और आज लोग क्या पसंद करते हैं। सभी विवरणी सारण सृजन विवरणिका में दी गई है। इस विवरणिका में सामान्य परिचय, इतिहास परिचय, जनता, कृषि एवं सिचाई उद्योग, बैं¨कग और व्यापार, संचार व्यवस्था, अल्प व्यय प्रवृत्ति, प्रशासन व्यवस्था, राजस्व प्रशासन, विधि व्यवस्था एवं न्याय, अदर डिपार्टमेंट्स, लोकल सेल्फ गारमेन्ट्स, शिक्षा और संस्कृति, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, अन्य सामाजिक सेवाएं, आम जनजीवन एवं स्वयंसेवी सामाजिक सेवा संस्थान, प्लेसेस आफ इंटरेस्ट सहित 18 अध्याय 222 पृष्ठों का है। उन्होंने कहा कि तिरहुत प्रमंडल के पश्चिमी छोर पर अवस्थित सारण जिला भौगोलिक ²ष्टि से 25 डिग्री 39 अंश तथा 32 डिग्री 39 अंश, उत्तरी अक्षांश एवं 83 डिग्री 54 अंश तथा 85 डिग्री 12 अंश पूर्वी देशांतर के मध्य में स्थित है। सारण का वर्गक्षेत्र 2.678 वर्गमील तथा 1951 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 31 लाख 55 हजार 144 है। इसका प्रमुख नगर तथा प्रशासनिक मुख्यालय छपरा है जो कि घाघरा (सरयू) नदी के उत्तरी क्षोर पर अविस्थत है। यह स्थान गंगा नदी के अपने पिछले संगम के करीब है तथा 25 डिग्री 47 अंश उत्तर तथा 84 डिग्री 44 अंश पूरब में स्थित है। उन्होंने बताया कि आज से एक सौ वर्ष पूर्व छपरा साहेबगंज मुहल्ला मुख्य बाजार था। डच, अंग्रेज इसी मोहल्ले में रहते थे। जनगणना के आंकड़ें शहरी क्षेत्र केवल साहेबगंज से दौलतगंज तक ही था। दूसरा महत्वपूर्ण मुहल्ला भगवान बाजार था। छपरा रेलवे स्टेशन को भगवान बाजार रेलवे स्टेशन के नाम से भी जाना जाता है। भगवान बाजार में ही जिला जेल, अस्पताल थे। सदर अस्पताल 1856 ई. में बना था जिसे स्व. बनवारी लाल द्वारा बंगाल के ले. गर्वनर के यात्रा की स्मृति में बनाया गया था। बाद में हथुआ महारानी द्वारा वार्ड भी बनाया गया था। सिविल क्रिमिनल न्यायालय एवं अन्य सरकारी भवनों के अलावा तीन 3 डिग्री कालेज थे। डीएम ने बताया कि एतिहासिक दस्तावेज आज भी दस्तक देते हुए यह कह रहा है कि स्वतंत्रता संग्राम में यहां के सुरमाओं ने बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया था और यदि दान देने की बारी आयी तो भी अपने को हंसते - हंसते कुरबान करने में कभी पीछे नहीं हटे। युवाओं के साथ-साथ महिलाओं ने भी पर्दा प्रथा को नकारते हुए आजादी की लड़ाई में आगे बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।