सारण। छपरा में कहने के लिए सारण काफी पुराना जिला है। मुगल शासक अकबर के दरबारी अबुल फजल ने आइने अकबरी में सारण की चर्चा की है। साथ ही टोडरमल के समय भी सारण जिले का उल्लेख प्रमुखता से है। लेकिन, काफी पुराना जिला होने के बावजूद जिस अनुपात में यहां का विकास होना चाहिए उस अनुपात में विकास नहीं हुआ है। हां, यह बात जरूर है कि यहां के पूर्व सांसद व तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद को जब मौका मिला तो उन्होंने सारण का कायाकल्प करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। उन्होने छपरा से गुजरने वाली रेलखंड का जहां दोहरीकरण कराया, वहीं रेलवे का विद्युतीकरण करा दिया। हालांकि अभी इलेक्ट्रिक ट्रेनें उस अनुपात में नहीं चलती हैं, लेकिन मालगाड़ी का परिचालन शुरू है। रेलवे के क्षेत्र में यहां काफी कार्य हुआ है। रेलवे ट्रैक को अपडेट कर उसकी गति भी बढ़ायी गयी है। उसी का परिणाम है कि इस मार्ग से राजधानी एक्सप्रेस भी गुजरती है। बात सिर्फ रेल तक ही सीमित नहीं होती। सड़क परिवहन के क्षेत्र में भी यहां काफी कार्य हुआ है। जिले से चार एनएच व दो एसएच गुजरती है जिनपर अब वाहनें सरपट दौड़ती है। हाजीपुर से छपरा तक एनएच-19 पर फोरलेन का निर्माण कार्य अबतक पूरा न होना कष्टदायी है। एक समय राज्य ट्रांसपोर्ट की कोई भी गाड़ी डिपो में दिखाई नहीं देती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षो से कुछ प्राइवेट लोगों ने अपनी बसों को सरकार को देकर राज्य ट्रांसपोर्ट को भी हरा-भरा कर दिया। जिले में वायु परिवहन की स्थिति बदतर ही है, तिस पर कोढ़ में खाज यह कि नागरिकों में इसकी बेहतरी की उम्मीद तक दूर-दूर तक नहीं है। कारण है, यहां के स्थानीय बड़े नेताओं की जुबान पर भी वायु परिवहन के विकास की बातें नहीं आना, प्रयास करना तो दूर की बात है। कुल मिलाकर, रेल और सड़क के माध्यम से जिले में विकास अपना पांव पसार रहा है, लेकिन सारणवासियों को अपने ही आकाश में उड़ने के लिए 'उड़नखटोला' सपने की बात है। अलग बात है कि उड़नखटोला उतारने के लिए यहां हवाई अड्डा की व्यवस्था बहुत पहले से है। हालांकि हवाई अड्डा भी अब जर्जर स्थिति में पहुंच रहा है।

रेल परिवहन :

सारण जिले में बिजली पर ट्रेनो का परिचालन एक बड़ी उपलब्धि है। भले ही अभी मालगाड़ी का परिचालन किया जा रहा है, लेकिन वह दिन भी दूर नहीं जब पैसेंजर ट्रेनें भी बिजली से चलेगी। रेल मंत्री रहते नीतीश कुमार व लालू प्रसाद ने जिले के लिए कई घोषणाएं की थीं। उनमें से लालू प्रसाद ने जो भी घोषणाएं की वह अब धीरे-धीरे मूर्त रूप ले रही है। कई घोषणाओं ने तो मूर्त रूप ले भी लिया है। लालू प्रसाद ने सारण को छपरा रेल चक्का कारखाना, मढ़ौरा रेलवे इंजन कारखाना, छपरा-मुजफ्फरपुर के बीच नई रेलवे लाइन, परमानंदपुर में बैगन कारखाना, मशरक-महाराजगंज के बीच रेल लाइन, सोनपुर में डीएमयू-इएमयू सर्विसिंग सेंटर, बरौनी से बाराबंकी तक विद्युतीकरण, सोनपुर से गोरखपुर तक रेलवे लाइन के दोहरीकरण सहित कई योजनाएं दी। इनमें से छपरा से बरौनी तक विद्युतीकरण, सोनपुर से सिवान तक दोहरीकरण, दरियापुर के बेला स्थित रेल चक्का कारखाना योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। वहीं छपरा-थावे रेलखंड पर आमान परिवर्तन का कार्य अपने अंतिम चरण में है। अधिकारियों ने दावा किया है कि मार्च 16 से इस रेलमार्ग पर ट्रेनो का परिचालन शुरू हो जायेगा। यही नहीं मशरक-महाराजगंज नवनिर्मित रेलखंड पर भी ट्रेनों का परिचालन मार्च के बाद शुरू कर दिया जायेगा। छपरा से बरौनी के लिए विद्युत ट्रेन का परिचालन भी शुरू हो गया है हालांकि प्रारंभिक दौर में सिर्फ मालगाड़ी को ही चलाया जा रहा है। दरियापुर का रेल चक्का कारखाना से ट्रायल के रूप में पहिया निकाला जा रहा है। छपरा जंक्शन पर रोजाना पांच दर्जन अप व पांच दर्जन डाउन गाड़ियों का ठहराव होता है। यहां से प्रत्येक दस मिनट पर एक गाड़ी गुजरती है। इसी से इस स्टेशन की व्यस्तता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सड़क परिवहन :

सारण जिले से चार एनएच व दो स्टेट हाइवे गुजरती हैं। हाजीपुर से छपरा होते हुए गाजीपुर तक एनएच-19, छपरा से बनियापुर होते हुए महमदपुर तक एनएच-101, छपरा से रेवाघाट होते हुए मुजफ्फरपुर तक एनएच-102 व छपरा से एकमा होते हुए सिवान तक एनएच-85 गुजरती है। इसके अलावा, हाजीपुर से छपरा होते हुए सिवान तक एनएच-19 व 85 को फोरलेन में बदलने का कार्य द्रूत गति से चल रहा है। फिलहाल यह काम रूका हुआ है। राजकीय उच्च पथ जो छपरा से इसुआपुर, मशरक होते हुए सत्तरघाट तक जाता है, इस निर्माणाधीन सड़क पर कच्छप गति से कार्य हो रहा है। आठ माह पूर्व इस सड़क का निर्माण करने वाली कंपनी फरार हो गयी। इसके बाद सरकार ने सड़क को चलने लायक बनाने के लिए जिले के ही एक संवेदक जितेन्द्र सिंह को काम सौंपा है। तीन माह में कार्य को पूरा कर लिया जाना है। जिले के प्राय: सभी गांव सड़क से जुड़ गए हैं, लेकिन ग्रामीण सड़कों की हालत अभी बहुत नहीं सुधरी है।

वायु परिवहन :

शहर के पुलिस लाइन के आगे जिला मुख्यालय का वर्षो पुराना हवाईअड्डा है जो काफी जर्जर स्थिति में है। यहां से कहीं के लिए किसी विमान की सुविधा नहीं है। हवाई उड़ान के लिए जिले के लोग वर्षो से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई पहल तक नहीं हुई है। यहां के लोगों के मुताबिक, यहां से पटना, रांची, गोरखपुर, लखनऊ, दिल्ली, गोवा, मुम्बई, बंगलूर, कोटा आदि शहरों के लिए सीधी उड़ान भरने वाले विमानों की आवश्यकता है जिसमें छपरा से पटना, रांची, दिल्ली व मुम्बई के लिए सबसे अधिक यात्री हैं।

जिले के कुछ प्रमुख व्यवसायी व चिकित्सकों एवं अधिवक्ताओं व बुद्धिजीवियों का कहना है कि छपरा काफी पुराना शहर है। यहां से वायु परिवहन की व्यवस्था होनी चाहिए।