देखकर रामजी को जनकनंदिनी, बाग में बस खड़ी की खड़ी रह गई
विद्यापति महोत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक संध्या में लोकगीत के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं के मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ी। कलाकारों की गायिकी ने मिथिला की माटी की सौंधी खुशबू बिखेरी।
समस्तीपुर । विद्यापति महोत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक संध्या में लोकगीत के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं के मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ी। कलाकारों की गायिकी ने मिथिला की माटी की सौंधी खुशबू बिखेरी। लोक गायिका डॉ.नीतू कुमारी नवगीत ने महाकवि विद्यापति रचित कई गीतों की प्रस्तुति करके श्रोताओं का मन मोहा। उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना मंगल के दाता भगवन से की। फिर नीतू नवगीत में 'जय-जय भैरवि असुर भयाउनि पशुपति भामिनी माया', 'बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे', 'पिया मोरा बालक हम तरुणी गे, कौन तप चुक भेल मोर सजनी गे' जैसे विद्यापति रचित गीतों की प्रस्तुति की। उन्होंने 'रामजी से पूछे जनकपुर के नारी बता द बबुआ, लोगवा देत काहे गारी', 'देखकर रामजी को जनक नंदिनी, बाग में बस खड़ी की खड़ी रह गई' 'राजा जनक जी के बाग में अलबेला रघुवर आयो जी' जैसे राम सिया से जुड़े प्रसंगों पर आधारित लोकप्रिय गीतों को पेश किया। जिस पर श्रोता झूमते रहे। नीतू नवगीत ने डर लागे ए हमरा डर लागे ए, का ले के शिव के मनाई हो शिव मानत नाही, मांगी ला हम वरदान हे गंगा मैया मांगी ला हम वरदान, कौने देश गइले बलमुआ कथिया लाइहे ना सहित कई पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके साथ मनोज कुमार सुमन ने नाल पर, सुजीत कुमार ने कैसियो पर, पिटू कुमार ने पैड पर और सोनू कुमार ने बैंजो पर संगत किया।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।